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हाईकोर्ट का फैसला : पत्नी हत्या की दोषी तो भी पेंशन की हकदार

यह मामला अंबाला निवासी बलजीत कौर की फैमिली पेंशन रोकने के मामले से जुड़ा हुआ है। बलजीत कौर के पति तरसेम सिंह सरकारी कर्मचारी थे और उनकी 2008 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 2009 में उनकी पत्नी पर हत्या का मामला दर्ज हुआ था।

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चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सरकारी कर्मचारी की विधवा यदि हत्या की दोषी है तो भी वह फैमिली पेंशन की हकदार है। यह मामला अंबाला निवासी बलजीत कौर की फैमिली पेंशन रोकने के मामले से जुड़ा हुआ है। बलजीत कौर के पति तरसेम सिंह सरकारी कर्मचारी थे और उनकी 2008 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 2009 में उनकी पत्नी पर हत्या का मामला दर्ज हुआ था। बलजीत को 2011 में दोषी करार दिया गया था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने उसको दिए जाने वाले वित्तीय लाभ रोक दिए थे।

यह हैं नियम : नियम के अनुसार सरकारी कर्मी की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को सेवानिवृत्ति की तिथि तक वित्तीय लाभ जारी किए जाते हैं। सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के बाद फैमिली पेंशन की हकदार होती है। सरकार ने यह कहते हुए वित्तीय लाभ तथा फैमिली पेंशन से इनकार कर दिया था कि पत्नी का आचरण सही नहीं है। वह दोषी करार दी जा चुकी है।

सरकार ने गलती की: कोर्ट ने कहा कि सरकार ने आदेश जारी करते हुए गलती की है। यदि कर्मचारी की हत्या उसकी पत्नी करती है तभी उसे वित्तीय लाभ से वंचित रखा जा सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सोने की अंडे देने वाली मुर्गी को कोई नहीं काटता। कोई पत्नी केवल वित्तीय लाभ के लिए कर्मचारी की हत्या न कर दे इसलिए नियम बनाया गया था।

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