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विदेश में रहकर भी इन हरियाणवियों ने किया ऐसा काम, हर कोई कर रहा तारीफ

रक्तदान मुहिम के राष्ट्रीय संयोजक सतीश खत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अवकाश होने के बावजूद गणतंत्र दिवस पर सिडनी, मेलबर्न और एडिलेड शहर से 150 से ज्यादा लोगों ने सहर्ष रक्तदान किया।

विदेश में रहकर भी इन हरियाणवियों ने किया ऐसा काम, हर कोई कर रहा तारीफ
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आस्ट्रेलिया में रक्तदान करते हरियाणावासी।

रक्तदान महादान को चरितार्थ करते हुए ऑस्ट्रेलिया में बसे हुए हरियाणवियों ने भारत के 72वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में राष्ट्रीय संगठन एएचए ( Association of Haryanvis in Australia) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर रक्तदान मुहिम का आयोजन किया। इस रक्तदान मुहिम के राष्ट्रीय संयोजक सतीश खत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अवकाश होने के बावजूद इस पर्व पर सिडनी, मेलबर्न और एडिलेड शहर से 150 से ज्यादा लोगों ने सहर्ष रक्तदान किया। इस रक्तदान से क़रीब 450 जिंदगियां बचाई जा सकती है। सतीश खत्री ने बताया कि इनमें से बहुत सारे लोगों ने अपने जीवन में पहली बार रक्तदान जैसा महान कार्य किया और गौरव का अनुभव किया। इस मुहिम के सफल आयोजन के लिए 20 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने दिन रात मेहनत की। पंकज मित्तल, प्रवीण कुमार सिंगरोहा, अशोक कुंडू, और अमन बुरा ने विभोर शर्मा और मनजीत साहू की मदद से अपनी-अपनी टीम के साथ मिलकर इस रक्तदान मुहिम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

एएचए के संस्थापक अध्यक्ष सेवा सिंह रेडू ने बताया कि रक्तदान की ऐसी मुहिम एएचए साल में दो बार, यानी भारत के गणतंत्र दिवस और भारत के स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर करती है। 26 जनवरी का महत्व ऑस्ट्रेलिया में बसे हुए हरियाणवीयों के लिए ही नहीं बल्कि समस्त भारतीयों के लिए बहुत ज्यादा है क्योंकि इसी दिन ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ अपना राष्ट्रीय दिवस साझा करता है जिसे ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया डे कहते हैं। सेवा सिंह रेडू ने बताया कि उनकी और उनकी टीम की योजना है की ऐसे रक्तदान शिविरों का आयोजन एएचए साल में कम-से-कम 4 बार करें ताकि इस महान कार्य के द्वारा ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके।

संगठन के विक्टोरिया चैप्टर के अध्यक्ष सतपाल चहल ने मेलबर्न से बताया कि इस आयोजन के लिए एक टीम स्थाई रूप से नियुक्त है जो स्वयंसेवकों का चयन करती है और इसके सफल आयोजन के लिए दिन रात काम करती है। सतपाल चहल ने मेलबर्न में रह रहे हरियाणवीओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें उन पर गर्व है क्योंकि इस मुहिम में सबसे ज्यादा रक्तदाता मेलबर्न शहर से आए थे।



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