Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

कहां खो गया निंदाना का प्रसिद्ध नगाड़ा, बजते ही इकट्ठा हो जाते थे महम चौबीसी के लोग, हांसी से ले आए थे विशालकाय तोप

महम चौबीसी के लोग अपनी आन-बान और शान के लिए किसी भी तरह का जोखिम उठाने से नहीं कतराते। पुराने जमाने में इनके युद्ध कौशलों को दशार्ने वाली रणभेरी के रूप में एक बहुत बड़ा निगारा (नगाड़ा) गांव निंदाना में मौजूद था।

कहां खो गया निंदाना का प्रसिद्ध नगाड़ा, बजते ही इकट्ठा हो जाते थे महम चौबीसी के लोग, हांसी से ले आए थे विशालकाय तोप
X

प्रतीकात्मक फोटो। 

राज कुमार बड़ाला : महम

महम चौबीसी क्षेत्र वीरता व पराक्रम के लिए दूर-दूर तक विख्यात हैं। जब भी देश पर कोई संकट आया है तो यहां के रणबांकुरों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी है। स्वतंत्रता आंदोलन में 1857 की क्रांति की बात हो, वर्ष 1965 व 1971 में हुए भारत पाक युद्ध और 1962 के भारत चीन युद्ध का जिक्र हो या फिर कारगिल युद्ध हो। इन सभी युद्धों में यहां के नौजवानों ने अपना पराक्रम दिखाया है। महम चौबीसी के लोग अपनी आन-बान और शान के लिए किसी भी तरह का जोखिम उठाने से नहीं कतराते। पुराने जमाने में इनके युद्ध कौशलों को दशार्ने वाली रणभेरी के रूप में एक बहुत बड़ा निगारा (नगाड़ा) गांव निंदाना में अब तक मौजूद था। जिसका प्रयोग यहां के लोग एकजुटता दिखाने और बाहरी आक्रमणों के समय एक जगह पर एकत्रित होने के लिए करते थे। इस निगारा का प्रयोग महम चौबीसी में चुनाव के बाद निकाले जाने वाले विजयी जुलूस में भी होता रहा है।

भारत पाकिस्तान विभाजन के समय भी निंदाना गांव में नगाड़ा बजता था और चौबीसी क्षेत्र के गांवों के लोग यहां पर एकत्रित होते थे। बैंसी व लाखनमाजरा क्षेत्र में कई मुस्लिम बहुत गांव थे। विभाजन के दौरान गांवों का आपस में तनाव हो गया। इस तनाव के चलते महम चौबीसी क्षेत्र के लोगों को एकत्रित करने के लिए नगाड़ा बजाया गया। निंदाना में चौबीसी के हजारों लोग एकत्रित हो गए। अत्यधिक तनाव बढ़ गया और आक्रमण का खतरा बढ़़ गया तो, निंदाना गांव के लोग हांसी से एक बहुत बड़ी तोप तक ले आए थे। हांसी से जब तोप को लाया जा रहा था तो रास्ते में पुट्ठी गांव में तोप अत्यधिक कीचड़ में फंस गई। उसके बाद गांव से बैल ले जाए गए और बैल जोतकर तोप गांव में लाई गई। तोप पुरानी थी और उसके अंदर जंग लगा हुआ था। बारूद भरकर तोप को चलाया गया तो तकनीकि खामियों के चलते तोप का गोला बारूद वहीं पर फट गया। जिस वजह से निंदाना गांव के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति की इस हादसे में टांग चली गई थी।

आन बान और शान की खातिर जान तक कर दी कुर्बान

निंदाना गांव निवासी बुजुर्ग रामफल बताते हैं कि अपनी आन बान और शान के लिए यहां के लोगों ने अपनी जान तक कुर्बान कर रखी हैं। कुछ साल पहले तक उनके गांव की छाजू वाली चौपाल में वह विशाल निगारा रखा रहता था। लेकिन अब चौपाल को तोड़ दिया गया है। उसके बाद वह निगारा कहां गया, किसी को कुछ पता नहीं है। हरिभूमि संवाददाता ने गांव के लोगों के साथ मिलकर विशाल नगाड़े को कई लोगों के जरिए ढूंढवाया। लेकिन अब उस निगारे का कोई अता पता नहीं है।

हांसी के स्कीनर हॉर्स रेजिमेंट परिसर में खड़ी रहती थी तोप

यह वही विशालकाय तोप थी जिससे अंग्रेजों ने 1857 में हांसी के आस पास के गांवों रोहनात, पुट्ठी मंगलखां, हाजमपुर, जमालपुर और भाटोल रांगड़ान पर गोले बरसाए गए थे। यह तोप लगाकर अंग्रेजों ने गांव के गांव तबाह कर दिए थे। उसके बाद यह तोप वर्तमान में हांसी के नागरिक अस्पताल के सामने स्थित मेम के बाग की जगह पर स्थित स्कीनर हॉर्स रेजिमेंट परिसर में खड़ी रहती थी। बताते हैं कि निंदाना गांव का एक व्यक्ति उस समय हांसी की स्कीनर स्टेट में अधिकारी था। जिसका फायदा उठाकर निंदाना गांव के लोग उस बड़ी तोप को निंदाना ले गए थे। निंदाना में नाल फटने के बाद वह तोप कहां गई, यह बात आज तक भी रहस्य बनी हुई है।

Next Story