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शोध : जहां लोग अशिक्षित और बेरोजगार वहां ज्यादा होता है अपराध

यह अनुसंधान महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के भूगोलवेत्ता प्रो. डॉ. महताब सिंह राणा और साफिया कॉलेज ऑफ गर्ल्ज अजमेर राजस्थान की प्रो.डॉ. मोनिका कण्णन ने किया है।

शोध : जहां लोग अशिक्षित और बेरोजगार वहां ज्यादा होता है अपराध
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 प्रो. महताब राणा व प्रो. मोनिका कण्णन। 

अमरजीत एस गिल : रोहतक

पुलिस अपराध का डाटा शेयर करे तो अपराधों में कमी आ सकती है। जहां लोग अशिक्षित और बेरोजगार हैं, वहां क्राइम ज्यादा होते हैं। हर अपराधी की अपनी प्रकृति होती है। अपराधी की शारीरिक भाषा सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा अलग मिलती है। यह अनुसंधान किया है महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के भूगोलवेत्ता प्रो. डॉ. महताब सिंह राणा और साफिया कॉलेज ऑफ गर्ल्ज अजमेर राजस्थान की प्रो.डॉ. मोनिका कण्णन ने।

डॉ. मोनिका भी महाविद्यालय के भूगोल विभाग की अध्यक्ष हैं। इन शिक्षाविदों का यह शोध गत 4 नवम्बर को टेलर एंड फ्रांसिस पब्लिकेशन हाउस ने किया है। मालूम हो कि इस पब्लिकेशन हाउस की दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा है। टेलर एंड फ्रांसिस के जर्नल में किसी भी शिक्षाविद का शोध प्रकाशित होना अपने-आप में ही बड़ी उपलब्धि है।

दस साल के अपराधों का विश्लेषण किया

मदवि प्रो. डॉ. महताब सिंह राणा ने हरिभूमि से बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 2009-19 तक उन्होंने और प्रो. मोनिका कण्णन ने अजमेर शहर के अपराधिक आंकड़ों पर संयुक्त शोध किया है। यह शोध प्रोजेक्ट आईसीएसएसआर के तहत स्वीकृत हुआ था। प्रो. राणा बताते हैं कि पुलिस अपराध के आंकड़ों को शोधर्थियों से ठीक से शेयर नहीं करती है। प्रो. राणा ने कहा कि अपराध पर शोध तब तक सही नहीं होता, जब तक जिस स्थान पर अपराध हुआ है, उसका मौका ए मुआयना नहीं होता है, तब तक सही निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है। डॉ. राणा और डॉ. मोेनिका कण्णन ने अजमेर के सभी 55 वार्ड का दौरा किया, जहां पिछले दस साल में किसी भी प्रकार के अपराध हुए थे।

सुरक्षा के लिए काम करता है एप

220 पेज के शोध में अजमेर पुलिस की संवेदनशीलता का उल्लेख भी किया गया है। पुलिस ने दोनाें शोधार्थियों का न केवल सहयोग किया। बल्कि दूसरे सहायता भी मुहैया करवाई गई। बताया जा रहा है कि किसी भी व्यक्ति अजमेर शहर के लिए सर्त्तक एप बनाया गया है। इस एप से लोगों को यह जानकारी मिलने लगी कि शहर के किसी क्षेत्र में किस तरह के अपराध हो रहे हैं। मोबाइल पर एप को डाउनलोड करके लोग जब इधर-उधर जाते हैं तो जानकारी मिलती है कि कौनसा क्षेत्र आपरधिक घटनाओं की दृष्टि सुरक्षित है और कौनसा नहीं।

हर अपराध की अलग प्रकृति

डॉ. राणा ने अपने शोध में बताया है कि अपराध किसी भी जगह नहीं होते। बल्कि विशेष जगह पर ही क्राइम की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं। किसी भी रोड पर अपराध की सबसे ज्यादा घटनाएं हो सकती हैं। अपराध करने वाले की बॉडी लैंग्वेज अलग होती है। उनके चेहरे के हाव-भाव सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा अलग होते हैं। डॉ. कण्णन और डॉ. राणा ने बताया है कि अगर पुलिस अपराध का डाटा शोधार्थी से शेयर कर ले तो अपराधों में कमी हो सकती है। शोध में बताया गया है कि अजमेर शहर में दरगाहगंज, करिश्चयनगंज और क्लॉक टॉवर में बाकि शहर की अपेक्षा सबसे ज्यादा अपराध हुए। जब इन क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक अध्ययन किया तो पाया गया कि यहां के लोग अशिक्षित और बेरोजगार थे। शोध में बताया गया है कि शिक्षा और राेजगार मुहैया करवाकर अपराधों को कम किया जा सकता है।

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