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आंकड़ाें का खेल शुरू : स्कूलों को बंद करने का फरमान आया तो बढ़ने लगी बच्चों की संख्या

स्कूलों के बंद होने व शिक्षकों के अन्यंत्र स्थानातंरित होने के भय के चलते 25 स्कूलों के शिक्षकों ने सरकार के निर्धारित नौ पंजीकृत बच्चों के आंकड़े को पार कर दिया।

आंकड़ाें  का खेल शुरू : स्कूलों को बंद करने का फरमान आया तो बढ़ने लगी बच्चों की संख्या
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स्कूल

पुरुषोत्तम तंवर : भिवानी

कहते है जब तक कार्रवाई नहीं की होती, तब तक कोई कार्य नहीं होता। ऐसा ही उदाहरण प्रदेश के 25 राजकीय प्राइमरी स्कूलों का है। नौ से कम पंजीकृत बच्चों वाले प्राइमरी स्कूलों को बंद करने या दूसरे स्कूल के साथ शिफ्ट करने का फरमान आया तो शिक्षकों में भगदड़ मच गई। स्कूलों के बंद होने व शिक्षकों के अन्यंत्र स्थानातंरित होने के भय के चलते 25 स्कूलों के शिक्षकों ने सरकार के निर्धारित नौ पंजीकृत बच्चों के आंकड़े को पार कर दिया। शिक्षकों में स्थानातरण का भय इतना था कि हिसार के एक स्कूल ने सरकारी फरमान आने के बाद प्राइमरी स्कूल में 52 बच्चों को पंजीकृत करा दिया। विभाग के पोर्टल पर बच्चों की संख्या बढने के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे 25 स्कूलों को बंद न करने का ऐलान किया है।

शिक्षा विभाग ने मई माह में प्रदेश के ऐसे स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया था। जिन स्कूलों में पहली क्लास से लेकर पांचवीं कक्षा तक नौ से कम बच्चे पंजीकृत है। विभाग ने इस तरह के स्कूलों के बच्चों को पडोसी स्कूल में शिफ्ट करने तथा शिक्षकों को अन्यंत्र भेजने के आदेश दिए थे। शिक्षा विभाग के इस आदेश का कई जगहों पर विरोध भी हुआ,लेकिन विभाग ने निर्देशों पर अमल करते हुए इस योजना को आगे बढाना शुरू कर दिया। सरकार के आदेश व स्थानातंरण के भय के चलते शिक्षकों ने बंद होने वाले स्कूलों में बच्चों की संख्या बढानी शुरू कर दी। प्रदेश के 25 स्कूल ऐसे है। जिनमें 22 फरवरी 2021 को एमआईएस पोर्टल पर नौ से कम बच्चे पंजीकृत थे,लेकिन अब पोर्टल पर उन्हीं स्कूलों में बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है।

गुरुग्राम के गीलावास के प्राइमरी स्कूल में 7 बच्चे पंजीकृत थे,लेकिन शिक्षा विभाग की चाबुक चली तो उस स्कूल में बच्चों की संख्या बढकर 30 तक पहुंच गई। यही स्थिति करनाल के जीपीएस बैनी में 22 फरवरी को 6 बच्चे पंजीकृत थे,लेकिन बुधवार(आज) 11 बच्चे पंजीकृत है। कुरुक्षेत्र के चार स्कूलों में बच्चों के पंजीकरण की संख्या में बेहताशा बढौतरी हुई है। यहां के चार स्कूल बंद होने की सीमा से बाहर निकलते हुए बच्चों की संख्या बढा ली है। महेंद्रगढ के आठ, रेवाड़ी व सोनीपत का एक.एक स्कूल में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोनीपत एक,पलवल एक तथा यमुनानगर के तीन,अंबाला,गुरुग्राम एक,भिवानी के दो तथा हिसार का एक स्कूल में बच्चों की संख्या बढने के बाद इनको दोबारा से खोले जाने के आदेश जारी किए गए है।भिवानी के ढाणी अजीमपुर व झंाझड़ा बास के प्राइमरी स्कूल में एक भी बच्चा नहीं था,लेकिन अजीमपुर स्कूल में 21 व झांझड़ा बास के स्कूल में 28 बच्चे पंजीकृत हुए है। यही स्थिति हिसार के ढाणी बुढा खेड़ा में पहले जीरो बच्चे पंजीकृत थे,लेकिन आज उक्त स्कूल में 52 बच्चे एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत है।

स्थानातंरण का भय, टीचर दाखिले की ओर : विगत में शिक्षा विभाग ने जीरो से नौ से कम पंजीकृत बच्चों वाले स्कूलों पर कैची चलाने का फरमान जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि इस तरह के स्कूलों को बंद किया जाएगा। इन स्कूलों में दाखिल बच्चों को पड़ोस के स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया था कि इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों को अन्यंत्र स्कूलों में भेजा जाएगा। कम संख्या वाले स्कूलों में कुंडली मारे बैठे शिक्षकों में खलबली मच गई। संयोगवश शिक्षा विभाग ने विगत में दाखिले का पोर्टल खोल दिया तो इस तरह के स्कूलों में तैनात शिक्षक बच्चों को दाखिले के लिए गांव की गलियों व घर-घर पहुंचने लगे। उनकी मेहनत रंग लाई भी। उनके घर-घर जाने की वजह से प्रदेश के 25 स्कूलों में निर्धारित संख्या से ज्यादा बच्चों का पंजीकरण हो गया।

11 जिलों के अधिकारियों को भेजे निर्देश : शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने बच्चों की संख्या बढने पर प्रदेश के 11 जिलों के डीईईओ को पत्र भेजकर इन स्कूलों में टीचरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए है। भेजे गए आदेशों में कहा गया है कि वे चाहे पड़ोसी स्कूल या किसी अन्य स्कूल से प्रतिनियुक्ति के आधार पर इन स्कूलों में टीचर नियुक्त करें। इस मामले में किसी तरह की ढिलाई न बरते। अगर किसी ने ढिलाई बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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