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यह कैसी व्यवस्था : शैक्षणिक सत्र को बीते 112 दिन, अभी तक नहीं मिलीं पाठ्य पुस्तकें

अबकी बार सरकार की योजना छात्र-छात्राओं को सीधे पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने की बजाए उनके खातों में पैसे डाले जाने की योजना है, लेकिन अब 21 जुलाई बीत चुकी है और पैसे भी नहीं डाले हैं। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पूर्णतया चौपट होती नजर आ रही है। हालांकि शिक्षकों द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था अपनाते हुए पास हो चुके सीनियर बच्चों की पाठ्य पुस्तकें मंगवाकर जूनियर बच्चों को देकर काम चलाऊ रणनीति पर चलकर सैलेब्स पूरा कराने की कोशिशें जारी हैं।

यह कैसी व्यवस्था : शैक्षणिक सत्र को बीते 112 दिन, अभी तक नहीं मिलीं पाठ्य पुस्तकें
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नारनौल : एक गांव में स्थित सरकारी स्कूल,  डीईईओ विजेंद्र श्योराण। 

हरिभूमि न्यूज : नारनौल

हरियाणा सरकार के आदेशानुसार कक्षा छठी से आठवीं तक के स्कूल 23 जुलाई से खोले जाएंगे, लेकिन कमाल की बात है कि नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होने के बाद अब तक शिक्षा विभाग कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं करा पाया है। अबकी बार सरकार की योजना छात्र-छात्राओं को सीधे पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने की बजाए उनके खातों में पैसे डाले जाने की योजना है, लेकिन अब 21 जुलाई बीत चुकी है और पैसे भी नहीं डाले हैं। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पूर्णतया चौपट होती नजर आ रही है। हालांकि शिक्षकों द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था अपनाते हुए पास हो चुके सीनियर बच्चों की पाठ्य पुस्तकें मंगवाकर जूनियर बच्चों को देकर काम चलाऊ रणनीति पर चलकर सैलेब्स पूरा कराने की कोशिशें जारी हैं।

जानकारी के मुताबिक कि देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 लागू है और इस अधिनियम के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के सभी बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, लेकिन शिक्षा विभाग इस नियम पर खरा उतरने में नाकाम सिद्ध हो रहा है। हालांकि इसके पीछे शिक्षा अधिकारियों का तर्क है कि कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में पुस्तक प्रकाशन करने वाली प्रिटिंंग प्रेस बंद थी और पुस्तकें छप ही नहीं पाई। इस कारण कठिनाई आ रही है। ऐसे में अब सभी विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा पाना संभव नहीं हो पा रहा। दूसरी ओर हरियाणा सरकार द्वारा अबकी बार विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने की बजाए उनके बैंक खातों में पैसे डाले जाएंगे। शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर इस बाबत ब्यान दे चुके हैं। मगर अब तक यह तय नहीं किया गया है कि यह राशि कितनी होगी। हालांकि चर्चा है कि कक्षा पांचवीं तक 200 रुपये तथा कक्षा छठी से आठवीं तक 300 रुपये विद्यार्थियों के बैंक खातों में डाले जाएंगे। जबकि अब तक फूटी कोड़ी भी नहीं मिली है।

पुस्तक विक्रेताओं के पास उपलब्ध हैं पुस्तकें

एकतरफ कोरोना महामारी एवं लॉकडाउन का तर्क देकर पाठ्य पुस्तकों की कमी होना बताया जा रहा है, वहीं गौर करने वाली बात यह है कि बाजार में पुस्तक विक्रेताओं के पास कक्षा पहली से आठवीं तक की एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। कक्षा आठवीं की पाठ्य पुस्तकें करीब 700-800 रुपये की हैं, जबकि सरकार द्वारा इस कक्षा के विद्यार्थियों को 300 रुपये देने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा ही हुआ तो 400-500 रुपये की खुद की व्यवस्था करनी होगी।

स्कूलों में मंगवाई जा रही सीनियर की पुस्तकें

स्कूलों में शिक्षकों द्वारा सीनियर विद्यार्थियों से उनकी पाठ्य पुस्तकें मंगवाकर जूनियर बच्चों को देकर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। यह व्यवस्था माध्यमिक शिक्षा के सहायक निदेशक (शैक्षणिक) द्वारा जारी आदेश पत्र क्रमांक:8/5-2020 एसीडी(5) दिनांक 18.5.2021 की पालना में की जा रही है। बीते सत्र में भी सीनियर-जूनियर की यही व्यवस्था बीते शैक्षणिक सत्र में भी अपनाई गई थी। मगर जिन बच्चों की पाठ्य पुस्तकें फटी हुई है, उन्हें बड़ी दिक्कत आई। इस समय कक्षा पहली से आठवीं तक जिले में 42 हजार 163 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं।

बाजार में हैं पुस्तक उपलब्ध

पुस्तक विक्रेता संघ के जिला प्रधान नरेश गोगिया ने बताया कि बाजार में कक्षा पहली से आठवीं तक की एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध है। यदि कोई ग्राहक पुस्तकें खरीदता है तो उसे उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रिंट नहीं हो पाई पुस्तकें

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विजेंद्र श्योराण ने बताया कि आरटीई के अनुसार पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन अबकी बार कोरोना महामारी के कारण पुस्तकें प्रिंट नहीं हो पाई। इस कारण सीनियर छात्रों से पुस्तकें मंगवाई गई हैं। सरकार द्वारा पुस्तकों के लिए विद्यार्थियों के खातों में सीधे पैसे भी डाले जाएंगे।

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