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VVS Laxman के मन को भाया हरियाणा का दिव्यांग मदनलाल, मुख्यमंत्री खट्टर ने भी कहा, वो एक नायक है

फतेहाबाद का रहने वाला दिव्यांग मदनलाल बिना हाथों के ही अपने जीवन की गाडी को खींच रहा है। वह न केवल पैराें से सिलाई करता है बल्कि दूसरे काम भी आसानी से कर लेता है।

VVS Laxman के मन को भाया हरियाणा का दिव्यांग मदनलाल, मुख्यमंत्री खट्टर ने भी कहा, वो एक नायक है
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हरिभूमि न्यूज. रोहतक

वैरी वैरी स्पशेल के रूप में विख्यात भारत के भूतपूर्व क्रिकेट खिलाडी VVS Laxman के एक ट्वीट से हरियाणा का दिव्यांग मदनलाल चर्चा में आ गया है। लोग अचानक मदनलाल के गूगल पर सर्च कर रहे हैं कि आखिर VVS Laxman ने मदनलाल में ऐसा क्या स्पेशल देखा है। मदनलाल पर वीवीएस के ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी अपना जवाब दिया है और कहा है कि मदनलाल सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।

क्रिकेटर वीवीएस लक्षण में मदनलाल के दो फोटो के साथ एक ट्वीट करते हुए लिखा था कि हरियाणा के मदन लाल के पास कोई बाजू नहीं है और वे बहुत संघर्ष से गुजरे हैं। लेकिनउन्होंने हार नहीं मानी और अपने पैरों का इस्तेमाल करते हुए सिलाई सीखी और उनकी सिलाई की दुकान अच्छी चल रही है। एक ऐसी दुनिया में, जहां लोग अपने भाग्य और जीवन के बारे में शिकायत करना बंद नहीं करते हैं, मदन लाल एक प्रेरणा है।


इस ट्वीट पर को काफी लोगों ने ट्वीट किया तो हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी इसको रीट्वीट करते हुए लिखा कि मदनलाल सबके लिए प्रेरणा देने वाले इंसान हैं।

भाजपा के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड ने भी इस ट्वीट को रीट्वीट किया है। अब लोग मदनलाल की जानकारी जुटा रहे हैं कि ऐसा मदनलाल में क्या देखा गया है जो इतने लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल, हरियाणा के फतेहाबाद के गांव बनगांव के मदनलाल जिनके साथ जन्म से ही कुदरत ने उनके साथ अजीब मजाक किया है कि उसके दोनों बाजू ही नहीं लगाई। जैसे-तैसे उम्र बढ़ती गई वैसे वैसे उसकी दिखते भी बढ़ती गई लेकिन एक दिन उसने कुछ नया कर दिखाने की ठान ली और उसी दिन से मदनलाल पूरे क्षेत्र के लिए एक उदाहरण बना हुआ है।

मदनलाल ने जीवन चलाने के लिए हाथ के बजाए पैरों से आसानी से हो जाने वाला कोई काम ना चुनने की जगह दर्जी का काम चुना और अपने पैरों को अपने हाथों की तरह इस्तेमाल किया। उनके इलाके में उन्हें सिलाई के लिए जाना जाता है। वे बताते हैं कि शुरू में तो लोग उन्हें शक की निगाहों से देखते रहे लेकिन बाद में उन्हें यकीन हो गया कि मदनलाल एक अच्छे दर्ज़ी हैं।

इसके अलावा अपने परिवार के सदस्यों के कामों में मदद करना. इतना ही नहीं समाज में जागृति लाने के लिए कि विकलांगता अभिशाप नहीं है जहां शहरों में गांव में जाकर स्कूलों-कॉलेजों व अन्य शैक्षणिक स्थानों पर जागरुकता शिविर लगाता है जिसमें यह सारे काम स्टेज पर कर के दिखाता है।

इस तरह मदनलाल साधारण होते हुए भी असाधारण तरीके से अपनी जिंदगी जी रहा है और आज सोशल मीडिया ने उसे फिर से चर्चा में ला दिया है।

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