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सावधान ! 15 मिनट से अधिक ईयरफोन का प्रयोग करना कान के लिए खतरनाक

जो भी व्यक्ति या बच्चे मोबाइल फोन एंव ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते है या गाना सुनते है जो कि कई वर्ष बाद उनको आदत हो जाती है जिसकी वजह से उन्हे तेज आवाज लगातार सुनने से श्रवण क्षमता प्रभावित होती है। मोबाइल फोन से ईयर फोन लगाकर तेज संगीत सुनना घातक हो रहा है।

सावधान ! 15 मिनट से अधिक ईयरफोन का प्रयोग करना कान के लिए खतरनाक
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कार्यक्रम को संबोधित करती सीएमओ डॉ. सपना गहलावत

हरिभूमि न्यूज : भिवानी

सामान्य अस्पताल भिवानी में विश्व श्रवण दिवस मनाया गया। इसमें अस्पताल में आए मरीज व अन्य लोगों को इस बारे जागरूक किया गया। सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने बताया कि विश्व स्तर पर विश्व श्रवण दिवस प्रति वर्ष 3 मार्च को बहरेपन और सुनवाई की हानि को रोकने और दुनियाभर में कान से सुनने की क्षमता की देखभाल को बढ़ावा देने बारे लोगों को जागरूक किया जाता है। इसलिए इस बारे अस्पताल में आए मरीज व अन्य लोगों को जागरूक किया गया। उन्होंने बताया कि जो भी व्यक्ति या बच्चे मोबाइल फोन एंव ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते है या गाना सुनते है जो कि कई वर्ष बाद उनको आदत हो जाती है जिसकी वजह से उन्हे तेज आवाज लगातार सुनने से श्रवण क्षमता प्रभावित होती है। मोबाइल फोन से ईयर फोन लगाकर तेज संगीत सुनना घातक हो रहा है।

कान का परदा हो सकता है खराब

उन्होंने बताया कि शोध के अनुसार सामान्य बातचीत 60 डेसिबल में होती है अगर 120 डेसिबल की ध्वनि कान में पड़ती है तो असहजता एवं घबराहट होने लगती है। अगर यह ध्वनि बढ़कर 130 डेसिबल पहुंच जाती है तो कान में दर्द होने लगता है वही ध्वनि 140 डेसिबल से अधिक हो जाए तो कान का परदा तत्काल खराब हो सकता है। सिविल सर्जन ने बताया कि अधिक ईयरफोन का इस्तेमाल ना करें।

15 मिनट से अधिक समय तक न लगाए ईयरफोन

उन्होंने बताया कि किशोर-किशोरियां 10-15 मिनट से अधिक समय तक ईयरफोन न लगाएं अगर ईयरफोन का प्रयोग करना है तो कम ध्वनि का प्रयोग करें। सिविल सर्जन ने बताया कि विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर जो भी संदेश विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आप लोगों को दिए जा रहे है वह संदेश आप जन-जन तक अवश्य पहुंचाए ताकि आमजन सभी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सके। वहीं सिविल सर्जन ने अस्पताल में आए मरीज व अन्य लोगों को आयुष्मान योजना में भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त आयुष्मान भारत योजना में निर्धारित किए गए प्राइवेट संस्थाओं में जाकर अपना इलाज करवा सकते है।

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