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सेना के नकली पहचान पत्र पर हरियाणा से हथियार खरीदकर दूसरे राज्यों में बेचते थे, चार पकड़े

इनमें तीन बिहार के तो एक यूपी का रहने वाला है। आरोपितों के पास से सेना के नकली पहचान पत्र, फर्जी आर्म्स लाइसें, पिस्तौल, बंदूक व कारतूस बरामद किए।

सेना के नकली पहचान पत्र पर हरियाणा से हथियार खरीदकर दूसरे राज्यों में बेचते थे, चार पकड़े
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 पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

सेना के नकली पहचान पत्र व फर्जी शस्त्र लाइसेंस पर हरियाणा से हथियार खरीदकर दूसरे राज्यों में बेचने वाले एक गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस की अपराध जांच शाखा ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से सेना के नकली पहचान पत्र, फर्जी लाइसेंस, एक गाड़ी, हथियार व कारतूस बरामद हुए हैं। इनमें तीन बिहार के तो एक यूपी का रहने वाला है। इन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए 11 दिन के रिमांड पर लिया है।

सीआईए-1 को गुप्त सूचना मिली कि बिहार के कुछ लोग फर्जी लाइसेंस पर हथियार लेकर दूसरे राज्यों में बेचते हैं। इस गिरोह के चार सदस्य रोहतक की ओर से आकर झज्जर की तरफ जाएंगे। झज्जर रोड पर जांच के दौरान एक बोलेरो गाड़ी को रुकवाया गया। गाड़ी में चार युवक सवार थे। इन सभी को पुलिस ने पकड़ लिया। इनकी पहचान विक्की तिवारी निवासी बिहार, अनुज निवासी बलिया यूपी, विरमन निवासी बिहार व मुन्ना तिवारी निवासी बिहार के रूप में हुई है। इनके पास मिले हथियार, कारतूस, फर्जी लाइसेंस व पहचान पत्रों को देखकर एक बार पुलिस भी दंग रह गई। इसके बाद पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया।

शातिरों से ये बरामद किए

विक्की तिवारी के पास से पुलिस को 32 बोर की पिस्तौल व 45 रौंद मिले हैं। इसके अलावा इसके पास से विकास कुमार ठाकुर नाम का फर्जी लाइसेंस, इसी नाम का आधार कार्ड व बीएसएफ का पहचान पत्र मिला है। विक्की तिवारी नाम का एक आधार कार्ड भी मिला है। अनुज के पास से डबल बैरल बंदूक, धनंजय नाम का आर्म्स लाइसेंस, इसी नाम का बीएसएफ का पहचान पत्र और खुद के नाम का आधार कार्ड बरामद हुआ है। विरमन के पास से 32 बोर का पिस्तौल, 32 कारतूस, संजय तिवारी नाम का आर्म्स लाइसेंस, आधार कार्ड व सेना का पहचान पत्र मिला। जबकि मुन्ना तिवारी के पास से पुलिस को 315 बोर के 50 कारतूस मिले हैं। जिस बोलेरो गाड़ी में सवार थे, वह भी झारखंड नंबर की है।

11 दिन के रिमांड पर लिए

ये आरोपित हरियाणा के विभिन्न शहरों के गन हाउस से असलाह व कारतूस खरीदकर दूसरे राज्यों में अच्छी कीमत पर बेचते थे। दूसरे राज्यों में इन हथियारों की डिमांड ज्यादा है। प्रारंभिक तौर पर अभी यही सामने आया है कि ये फर्जी लाइसेंस तैयार करके हथियार खरीदते-बेचते हैं। इनके गिरोह में और कौन शामिल है, कब से इस कार्य में जुड़े हैं, कहां-कहां इनका नेटवर्क फैला है, क्या लोकल गन हाउस मालिक इनसे मिले हुए हैं सहित कई तरह के सवाल बने हुए हैं। पुलिस ने अदालत से इनको 11 दिन के रिमांड पर लिया है।


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