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आज 20वीं बरसी : 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर अलकायदा के हमले से कांप गई थी पानीपत टेक्सटाइल नगरी, वे दिन याद कर सहम जाते हैं एक्सपोर्टर

सन् 2001 से लेकर 2003 तक लड़खड़ाया रहा टेक्सटाइल एक्सपोर्ट, हजारों करोड़ रुपयों के नुकसान से सड़क पर आ गए थे टेक्सटाइल उद्यमी, लाखों प्रवासी श्रमिक बेरोजगार हुए थे जिससे पानीपत का औद्योगिक विकास रूक गया था।

​​on 11 september 2001 textile city of panipat was shaken by the attack of al qaeda on america
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अमेरिका पर अलकायदा के हमले से कांप गई थी पानीपत टेक्सटाइल नगरी 

हरिभूमि न्यूज : पानीपत

अफगानिस्तान ( Afghanistan ) में इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है, अमेरिका ( America ) समेत उसके मित्र देशों की फौज अफगानिस्तान से जा चुकी है और पठानों की धरती पर एक बार फिर तालिबान ( Taliban ) का राज स्थापित हो गया है। वर्तमान में पूरी दुनिया में तालिबान ( Taliban ) व अफगानिस्तान सुर्खियों में है। वहीं, अफगानिस्तान व तालिबान के कारण पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग को भारी नुकसान हो चुका है। तालिबान व अफगानिस्तान का नाम सुन कर पानीपत का टेक्सटाइल उद्योग जगत ( Panipat Textile Industry) अंदर तक सहम जाता है।

अमेरिका पर आतंकी हमले से थर्रा गई थी टेक्सटाइल नगरी

11 सितंबर सन् 2001 की सुबह अल कायदा ( AlQaeda) के आतंकियों ने अमेरिका के विमानों को हाईजैक कर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन आदि स्थानों पर हमले किए थे। इन हमलों में जान व माल का भीषण नुकसान हुआ था। आतंकी हमले के कारण अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बन गया था। जबकि पानीपत के टेक्सटाइल उत्पादों के एक्सपोर्टर के पैरों के नीचे से तो धरती ही खिसक गई थी। गौरतलब है कि अमेरिका व यूरोप महाद्वीपों के देश पानीपत टेक्सटाइल उत्पादों के बड़े ग्राहक, कल भी थे और आज भी है। वहीं क्रिसमस पर्व पर अमेरिका व यूरोप के देशों में पानीपत से सर्वाधिक टेक्सटाइल उत्पाद निर्यात किया है। एक्सपोर्ट किए जाने वाले उत्पादों का निर्माण कार्य अक्टूबर माह से चालू हो जाता है और नवंबर माह के दूसरे पखवाडे में माल की अमेरिका व यूरोप महाद्वीप के देशों के बॉयरों का समुंद्री मार्ग से डिलीवरी शुरू हो जाती है।

अधिकतर टेक्सटाइल उत्पादों के आर्डर किए थे रद्द

इधर, पानीपत में अल कायदा के अमेरिका पर आतंकी हमले के दौरान यानि अक्तूबर माह में बड़े पैमाने पर अमेरिका व यूरोप को ड्टोजे जाने वाले माल का निर्माण कार्य चल रहा था। वहीं 11 सितंबर को अमेरिका पर आतंकी हमले की जानकारी जैसे ही पानीपत के एक्सपोर्टरों ( Exporter ) को मिली तो वे अंदर तक हिल गए। सभी फैक्टरियों में अमेरिका व यूरोप के देशों के टेक्सटाइल आर्डरों का निर्माण कार्य बंद करवा दिया गया। वहीं एक्सपोर्टर विदेशी बॉयरों से संपर्क साधने में लग गए। फिर वही हुआ जिस का एक्सपोर्टरों को भय सता रहा था, अमेरिका व यूरोप के देशों ने क्रिसमस के लिए पानीपत के एक्सपोर्टरों को दिए गए अधिकतर टेक्सटाइल उत्पादों के आर्डरों को रद्द कर दिए या फिर निलंबित कर दिए थे।

सड़क पर आ गए थे एक्सपोर्टर व बुनकर

अमेरिका व यूरोप के देशों से मिले क्रिसमस पर्व के टेक्सटाइल उत्पादों के आर्डर रद्द होने व निलंबित किए जाने के कारण पानीपत के अधिकातर एक्सपोर्टरों को भीषण आर्थिक नुकसान हुआ था। जबकि फैक्टरियों के बंद होने से बड़ी संख्या में प्रवासी बुनकर बेरोजगार हो गए थे। अमेरिका व यूरोप के देशों से आतंकी हमले से पहले किए गए टेक्सटाइल उत्पादों के एक्सपोर्ट कर भुगतान रूक गया था। हालात उस समय और अधिक खराब हो गए जब पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग पर अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के दुष्प्रभाव के प्रति तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार व हरियाणा में चौटाला सरकार चुप्पी साध गई थी।

हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था

अमेरिका पर आतंकी हमले के कारण अमेरिका व यूरोप महाद्वीप के देशों, एशिया के खाड़ी देशों के साथ पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग से होने वाला निर्यात 2001 में तो पूरी तरह से ही बंद रहा था, वहीं अफगानिस्तान पर अमेरिका के हमले के बाद और वहां पर अमेरिकी फौजी का दबदबा बढने के बाद पानीपत से अमेरिका व यूरोप व खाड़ी देशों में टेक्सटाइल के उत्पादों का निर्यात तो शुरू हो गया था, वहीं कारोबार पूरी तरह से सन् 2003 के अगस्त माह में ढर्रो पर आया था। क्रिसमस पर्व पर अमेरिकी व यूरोप के देशों से पानीपत के एक्सपोर्टरों को आर्डर मिलने लगे। इधर, पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन के तत्कालीन चेयरमैन प्रो.रामनिवास गुप्ता ने बताया कि 2001 में अमेरिका पर आतंकी हमले से पानीपत के एक्सपोर्टरों का हजारों करोड़ रुपये का भीषण नुकसान हुआ था। आज भी वह दौर याद आ जाता है तो रात को नींद नहीं आती। सबसे बड़ी बात तो यह हुई थी कि पानीपत का औद्योगिक विकास ठहर गया था।

घरेलू बाजार से एक्सपोर्टरों को मिला था आर्थिक जीवनदान

अमेरिका पर आतंकी हमले के बाद पानीपत में तैयार हो चुके एक्सपोर्ट होने वाले टेक्सटाइल उत्पादों की बिक्री देश के विभिन्न बाजारों में की गई थी। घरेलू बाजार में एक्सपोर्ट क्वालिटी के टेक्सटाइल उत्पादों को जनता ने हाथों हाथ लिया था। घरेलू बाजार में टेक्सटाइल उत्पादों की बिक्री होने से अधिकतर एक्सपोर्टर को व्यापारिक रूप से जीवन दान तो मिल गया था, लेकिन अमेरिका आतंकी हमले के कारण हुए नुकसान की भरपाई नहीं हुई थी। वहीं अमेरिका पर आतंकी हमले के घटनाक्रम से पानीपत के एक्सपोर्टरों को भारत के घरेलू टेक्सटाइल बाजार की राह भी मिल गई थी।

अफगानिस्तान को नहीं किया टेक्सटाइल एक्सपोर्ट

अमेरिका पर आतंकी हमले के घटनाक्रम के बाद अफगानिस्तान में शांति स्थापित हुई, वहां पर प्रजातांत्रित सरकार बनी, भारत के रिश्ते भी अफगानिस्तान ने सुधरे, वहां पर भारतीय मदद से संसद भवन का निर्माण हुआ, भारत सरकार ने वहां पर अनेके प्रोजेक्ट शुरू किए, इसके बावजूद भी पानीपत से अफगानिस्तान में टेक्सटाइल का एक्सपोर्ट शुरू नहीं हुआ, इसका मुख्य कारण था अफगानिस्तान का घरेलू असुरक्षित माहौल। वहीं एक्सपोर्टर अरूण मलिक बताते हैं कि कई बार अफगानिस्तानी बॉयरों ने पानीपत से टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के लिए प्रयास किया, लेकिन कोई भी एक्सपोर्टर सीधे तौर पर अफगानिस्तान में टेक्सटाइल का एक्सपोर्ट करने को राजी नहीं हुआ, जबकि अफ्गानी बॉयर आयात किए जाने वाले टेक्सटाइल उत्पादों की कीमत अग्रिम राशि के रूप में देने को राजी थे।

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