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इस बार शुद्ध रूप से हरियाणवी हो जाएंगे कानून, हटेगा पंजाब शब्द

पांच मार्च से शुरू होने जा रहा हरियाणा का बजट-सत्र, पंजाब शब्द हटाने में नहीं आएगी कोई लीगल दिक्कत, शेषज्ञ कमेटी कर चुकी है अध्ययन।

इस बार शुद्ध रूप से हरियाणवी हो जाएंगे कानून, हटेगा पंजाब शब्द
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योगेंद्र शर्मा. चंडीगढ़

पंजाब से बंटवारे के बाद से चले आ रहे पंजाब शब्द के इस्तेमाल पर इस बार हरियाणा विधानसभा के बजट-सत्र में ब्रेक लगने जा रहा है, अर्थात साढ़े पांच दशक के बाद में अभी सभी कानूनों के पहले हरियाणा एक्ट का इस्तेमाल होगा इस तरह से राज्य के सभी कानून शुद्ध रुप से हरियाणवीं होने जा रहे हैं।

पांच मार्च से हरियाणा के बजट सत्र की शुरुआत होने जा रही है, फागुन माह में पंजाब शब्द को हटाकर सभी कानूनों को पूरी तरह से हरियाणवी करने के लिए होमवर्क पूरा हो चुका है। इस क्रम में हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट में हरियाणा के लिए काम कर रहे एजी हरियाणा औऱ उनकी टीम से विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता सभी कानूनी पहलुओं को लेकर विचार मंथन कर चुके हैं। इसी क्रम में विधिवित एक कमेटी का गठन भी किया गया था, जिसने मसौदा तैयार कर लिया था, इस बार के बजट सत्र में इसे पेश कर दिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता और हरियाणा के मुख्य सचिव विजय वर्धन ने एलआर के साथ भी कईं बैठकें की हैं। जिके बाद में विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता का कहना है कि सभी सिफारिशें पूरी तरह से सकारात्मक हैं औऱ विधेयकों के नाम बदलकर पंजाब की जगह पर हरियाणा शब्द का इस्तेमाल करने का रास्ता साफ हो चुका है।

163 कानूनों से हटेगा पंजाब नाम

संसदीय कार्य विभाग ने भी इस क्रम 163 कानूनों से पंजाब का नाम हटाने के लिए कानूनों को सूचीबद्ध कर लिया है। फाल्गुन मास की कृष्ण सप्तमी से हरियाणा विधानसभा बजट सत्र में प्रदेश के सभी कानूनों को हरियाणवी कर देने के लिए होमवर्क पूर्ण हो चुका है। इस बार के सत्र में सरकार ऐसा विधेयक पास कराने जा रही है, जिसमें 163 कानूनों के नाम से पंजाब शब्द हटा कर उसके स्थान पर हरियाणा कर दिया जाएगा। हरियाणा के अधिनियमों से पंजाब का नाम हटाने के उद्देश्य से गठित कमेटी ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर दी हैं। सिफारिशों को लेकर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने विधानसभा सचिवालय में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव विजय वर्धन, विधान सभा सचिव राजेंद्र कुमार नांदल और कानून एवं विधि विभाग की लीगल रिमेम्ब्रेन्सर बिमलेश तंवर के साथ बैठकों में विचार मंथन भी कर लिया ओके कर दिया गया है।

अधिकारियों ने विधान सभा अध्यक्ष को बताया कि इस मामले में गठित समिति अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव के सम्मुख प्रस्तुत कर चुकी है। इसके बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने रखी गई थी, जिस पर मुख्यमंत्री अपनी मंजूरी दे चुके हैं, जिसके बाद विधेयक का मसौदा तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार का संसदीय कार्य विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार करेगा। गुप्ता ने बताया कि हरियाणा के कानूनों के शीर्षकों से पंजाब शब्द हटाने के लिए विधेयक 5 मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। विधेयक के पास होने से करीब 163 कानूनों से पंजाब का नाम हट जाएगा। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर ने विधान सभा अध्यक्ष से इस विधेयक के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की। अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता का कहना है कि कमेटी की सिफारिशें सकारात्मक हैं और इससे विधेयकों के नाम हरियाणा के नाम पर करने का रास्ता साफ हो गया है।

स्पीकर ने इस पर मंथन कर की पहल

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने हरियाणा के अधिनियमों से पंजाब शब्द हटाने के लिए काफी लंबे अर्से से प्रयासों की शुरुआत की थी। मनोहरलाल सरकार पार्ट वन में गुप्ता ने प्रयास शुरू कर दिए थे। उस पर उन्हें पंचकूला से विधायक बनने के बाद में मुख्य सचेतक ( चीफ व्हिप) की भूमिका में रखा गया था। उस दौरान भी गुप्ता चाहते थे कि इन कानूनों के नाम से पंजाब शब्द को हटा दिया जाए, क्योंकि हरियाणा राज्य पांच दशक से ज्यादा समय में आत्मनिर्भर राज्य बन चुका है, इतना ही नहीं कईं मामलों में प्रदेश ने पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। भाजपा सरकार पार्ट टू में हरियाणा की विधान पालिका और कार्यपालिका ने मिलकर योजना बनाई।

इस बार उन्हें खुद ही बतौर अध्य़क्ष काम करने का मौका मिला है, इस बार कमेटी का गठन कर दिया गया। विधानसभा और प्रदेश सरकार के कानून एवं विधि विभाग के अधिकारी शामिल हैं, विधानसभा अध्यक्ष समय-समय पर इस कमेटी के साथ बैठकें करते रहे हैं। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर बिमलेश तंवर की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी ने अपनी सिफारिशें मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री के सम्मुख प्रस्तुत कीं। इस कमेटी ने 1968 के आदेश के अंतर्गत स्वीकृत अधिनियमों के उपशीर्षकों के संशोधन के विषय में पुनरावलोकन एवं परीक्षण किया है।

कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी इस काम में

लीगल रिमेम्ब्रेन्सर ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के अधिनियमों से ह्यपंजाबह्ण शब्द के स्थान पर ह्यहरियाणाह्ण करने में कोई भी किसी तरह की कानूनी अड़चन आड़े नहीं आएगी। राज्ज्य पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत हरियाणा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला है। उसे अपनी आवश्यकता अनुसार कोई भी नया कानून बनाने तथा राज्य से संबंधित किसी भी कानून में संशोधन का पूरा अधिकार है। लीगल रिमेम्ब्रेन्सर ने स्पष्ट किया कि हरियाणा विधान सभा को किसी भी अधिनियम के शीर्षक तथा उपशीर्षक में संशोधन करने की भी पूरी शक्ति है। मुख्य सचिव विजय वर्धन ने कहा कि ऐसा करने में कोई प्रशासनिक बाधा नहीं है।

पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत वर्ष 1966 में हरियाणा राज्य का गठन किया गया था। तब पंजाब में जिन अधिनियमों का अस्तत्वि था, वे ही हरियाणा में लागू रहे। व्यवस्था यह बनी थी कि 1968 में हरियाणा अपनी जरूरतों के मुताबिक इनमें आवश्यक संशोधन कर सकेगा। अनावश्यक कानूनों को हटाने का अधिकार भी प्रदेश की विधान सभा को मिला है। हरियाणा को विरासत में जो कानून मिले थे, वे सभी पंजाब के नाम पर थे और गत 54 वर्षों से हरियाणा की शासन व्यवस्था इन्हीं कानूनों के आधार पर चल रही है। इसके चलते प्रदेश की जनता और जनप्रतिनिधि इन कानूनों को हरियाणा के नाम पर करने की मांग करते रहे हैं। विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता इसे हरियाणा के स्वाभिमान का विषय मानते हैं।

हरियाणा प्रदेश का गौरवशाली इतिहास

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता का कहना है कि हरियाणा प्रदेश का गौरवशाली इतिहास रहा है। 1966 में स्थापना के बाद इस प्रदेश ने शक्षिा और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी विशष्टि पहचान बना ली है। आर्थिक विकास की तीव्र रफ्तार से प्रदेश ने बुलंदियों की तरफ बढ़ रहा है। खेलों औऱ हर क्षेत्र में हरियाणा का पूरी दुनिया में नाम हैं। इसके बावजूद इसके सभी पुराने कानून पंजाब के नाम पर चलते आ रहे हैं, प्रमुख कानूनों में हरियाणा शब्द जुड़ने से यहां नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में स्वाभिमान की भावना जागृत होगी, जो किसी भी आगे बढ़ते प्रदेश के लिए जरूरी है।

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