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मानवता को समर्पित ये सब इंस्पेक्टर : रक्तदान और प्लेटलेट्स देकर बचा रहे लोगों का जीवन

हरियाणा पुलिस के उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा एक ऐसा उदाहरण जो स्वयं 142 बार रक्तदान कर चुके हैं और 65 बार प्लेटलेट्स दे चुके हैं। इतना ही नहीं वे बिना किसी बैनर के 361 स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर चुके हैं।

मानवता को समर्पित ये सब इंस्पेक्टर : रक्तदान और प्लेटलेट्स देकर बचा रहे लोगों का जीवन
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 उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा 

तरुण वधवा : कुरुक्षेत्र

हरियाणा पुलिस के उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा पुलिस सेवा के साथ ही रक्तदान को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना चुके हैं। तभी तो वे रक्तदान का कोई भी अवसर नहीं छोड़ते। उन्हें जैसे ही कोई सूचना मिलती है तो वे रक्तदान और प्लेटलेट्स देने के लिए तैयार रहते हैं। हरियाणा पुलिस के उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा एक ऐसा उदाहरण जो स्वयं 142 बार रक्तदान कर चुके हैं और 65 बार प्लेटलेट्स दे चुके हैं। इतना ही नहीं वे बिना किसी बैनर के 361 स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर चुके हैं।

पिता से मिली रक्तदान की प्रेरणा

डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि 1989 में वे राजकीय महाविद्यालय करनाल में विद्यार्थी थे और एनसीसी कैडेट थे। एक बार उनके एनसीसी अधिकारी ने कहा कि डीएवी महाविद्यालय में रक्तदान शिविर लगा हुआ है और आप वहां जाकर रक्तदान करें। उन्होंने वहां जाकर रक्तदान किया लेकिन जैसे ही घर जाकर बताया तो मां ने इस पर गहन चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसा नहीं करना चाहिए था। इस पर डॉ. अशोक कुमार वर्मा को बहुत ठेस पहुंची लेकिन रात्रि में जैसे ही पिता जी घर पर आए, उन्हें सारी बात का पता लगा तो उन्होंने अपने पुत्र के इस पुनीत कार्य के लिए पीठ थपथपाई और कहा कि बहुत ही अच्छा कार्य किया है क्योंकि वे स्वयं एक सैनिक थे और उन्होंने भी भारतीय सेना में रहते हुए अनेकों बार रक्तदान किया था।बस यहीं से आरंभ हुआ रक्तदान का सिलसिला। डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि उन दिनों लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता न के बराबर थी तो भी वे किसी भी जरुरतमंद के लिए मां से छिपकर रक्तदान करते थे। अब ऐसा नहीं है अब न केवल डॉ. अशोक कुमार वर्मा रक्तदान करते हैं अपितु उनके परिवार में सभी भाईयों, भतीजों और रिश्तेदारों ने भी रक्तदान करना आरंभ कर दिया है।

भाई बहन पत्नी बेटियां और बेटा भी कर रहा है रक्तदान

बेटी प्रियंका एवं दिव्या वर्मा 3 बार, बेटा अक्षय वर्मा 3 बार, भाई विनोद कुमार वर्मा 56 बार और पत्नी सुषमा वर्मा 5 बार रक्तदान कर चुके हैं।

361 रक्तदान शिविर के माध्यम से 44370 लोगों को मिला नवजीवन

डॉ. अशोक कुमार वर्मा बताते हैं कि वे 1999 में पुलिस प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात चुनाव सेवा में नियुक्त थे। तब उनके घर बेटे अक्षय वर्मा ने जन्म लिया और उसे पीलिया हो गया। डॉ ने कहा कि इस बच्चे को बचाने के लिए इसका रक्त बदलना होगा तो डॉ. अशोक ने रक्तदान किया और उनका रक्त ही बच्चे को चढ़ाया गया। उस दिन डॉ. अशोक कुमार वर्मा को रक्त के महत्व का अनुभव हुआ और तब से नियमित रक्तदाता बन गए।

सैनिक पिता कली राम खिप्पल की पुण्यतिथि पर लगाया पहला रक्तदान शिविर

पुलिस उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने पहला रक्तदान शिविर अपने पिता कली राम खिप्पल की पुण्यतिथि पर लगाया था और इसके पश्चात वे अब तक अपने स्वयं के खर्चे पर 361 स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर चुके हैं। इन शिविरों में एकत्रित रक्त से 44370 लोगों को लाभ मिला है।

हजारों लोगों को जागरूक किया

डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने हजारों युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित कर उनसे रक्तदान करवाया है। प्रत्येक वर्ष वे अपने पिता की पुण्यतिथि पर सम्मान समारोह आयोजित कर रहे हैं। रक्तदान करना और कराना उनके जीवन का लक्ष्य बन गया है।

कोरोना के समय रक्त की आपूर्ति करने में योगदान

वर्ष 2020 में उन्होंने 54 रक्तदान शिविर आयोजित किए जबकि 2021 में अब तक 47 रक्तदान शिविर आयोजित कर 1481 रक्त इकाई राजकीय रक्त कोष को दे चुके हैं। पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार वर्मा के नाम एक हजार से अधिक प्रशंसा पत्र हैं।

प्लटलेटस देते डा. अशोक वर्मा।

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