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इस सन्यासी ने किसान आंदोलन पर खोला मोर्चा, दुष्यंत चौटाला को लेकर की ये घोषणा

स्वामी आर्यवेश आर्य समाज से जुड़े हैैं और किसान आंदोलन को अपना समर्थन देते हैं। उन्होंने हरियाणा की राजनीति को लेकर बड़ा ऐलान किया है।

इस सन्यासी ने किसान आंदोलन पर खोला मोर्चा, दुष्यंत चौटाला को लेकर की ये घोषणा
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रोहतक। हरियाणा के रोहतक से जुड़े स्वामी आर्यवेश आर्यसमाज के प्रखर वक्ता और सन्यासी हैं। वे किसान आंदोलन को लेकर न केवल अपना समर्थन दे चुके हैं बल्कि हरियाणा के राजनेताओं पर भी तीखे प्रहार कर रहे हैं। उन्होंने हरियाणा की राजनीति को लेकर कई तरह की भविष्यवाणी भी की हैं। उनकी भविष्यणवी अगर सच हुई तो दुष्यंत चौटाला जो हरियाणा के उपमुख्यमंत्री हैं वो काफी परेशानी का सामना कर सकते हैं। स्वामी आर्यवेश ने किसान आंदोलन सहित तमाम मुद्दों पर धर्मेंद्र कंवारी से बातचीत की है। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के अंश।

सवाल: किसान आंदोलन का हरियाणा की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

स्वामी आर्यवेश : इस किसान आंदोलन में किसान समझ गए हैं कि कौनसा नेता उनके साथ है। अब जो नेता किसानों का साथ नहीं दे रहा किसानों ने उसका सामाजिक बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। इस मामले में चौधरी देवीलाल जैसे योद्धा का नाम लेकर राजनीति में उतरे दुष्यंत चौटाला आज फेल हो गए हैं। वो किसानाें के समर्थन में कुर्सी का त्याग नहीं कर पाए। अगर पिपली कांड के बाद ही दुष्यंत चौटाला सरकार से हटकर खड़े हो जाते तो आज वो हरियाणा के बहुत बड़े नेता होते। किसानों का समर्थन करने का यही समय था जिसमें दुष्यंत फेल हो गए। अब तो शायद ही भविष्य में लोग दुष्यंत को माफ करें और दोबारा सत्ता में लाएं। आगे तो समय ही बताएगा।

सवाल: किसान आंदोलन पर आप क्या कहना चाहेंगे?

स्वामी आर्यवेश : मैं आभास कर रहा हूं कि हरियाणा के जितने भी जिले हैं उनमें जहां भी देहात के कार्यकर्ता और कई जगह शहरों के कार्यकर्ता जिनका भले ही भाजपा से समर्थन हो, वे लोग भी ये सोचने के लिए मजबूर हैं कि इतनी ज्यादा हठ और जिद सरकार को क्यों करनी चाहिए। देश में यह पहला बड़ा आंदोलन है तो इतना लंबा चला और किसी प्रकार की घटना नहीं हुई और शांतिपूर्वक, अनुशासन के साथ, बिना हिंसा के और मिल जुलकर बिना भेदभाव के जाहे कोई जात का हो या किसी मजहब का, सब लोग इस धरने में डटे रहे। 26 जनवरी को सरकार से बाकायदा बात करकेे किसानों ने अपनी ट्रैक्टर परेड निकालने का प्रस्ताव रखा। उसके पीछे बहुत मजबूत तर्क था कि देश का जो शौर्य है उसका प्रदर्शन हमारे देश के जवान करते हैं और उससे दुनिया के लोग हमारी शक्ति को देखते हैं। वो जवान किसान के बेटे हैं। किसानों ने कहा कि हमारे नौजवान राजपथ पर देश का शौर्य दिखाते हैं। दिल्ली की सड़कों पर हम किसान की शक्ति का भी शौर्य दिखाएंगे और उसमें हम अपनी झांकिया भी लेकर आएंगे। किसानों ने इसका पूरी तरह पालन किया। करीब चार लाख ट्रैक्टर परेड में आए थे और इन पर 40 लाख लोग बैठे थे।

सभी ट्रैक्टरों पर तिरंगा झंडा लगाकर किसान शांति से अपने रूट पर जुलूस निकालकर निकल गए। यदि वो उपद्रव करना चाहते तो आप सोच सकते हें कि आज दिल्ली की क्या हालत होती। परंतु चंद आदमी माहौल को खराब कर गए। किसान नेताओं ने साफ-साफ देश के सामने कह दिया कि तिरंगे को लेकर लाल किले पर जो हुआ हम इसे स्वीकार करते हैं और हम जिम्मेदारी लेते हैं व माफी मांगते हैं। पर सरकार ये बात देश के सामने लाए कि जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया वे लोग कौन हैं। पहले दिन से ही इन लोगों का कैंप किसानाें के बीच में नहीं था। इनका पंडाल पुलिस ने जान बुझकर पुलिस के कैंप की तरफ लगवा रखा था। ये लोग कभी किसी मीटिंग में नहीं आए। परंतु सरकार ने इनको परिमशन दी कि तुम यहां कैंप लगा लो और वहां बैठाए रखा। रात को इन लोगों ने घोषणा कर दी कि हम किसान नेताओं की नहीं मानेंगे और लाल किले पर जाएंगे। चंद युवाओं को भड़काकर वे लोग सुबह सात बजे ही लाल किले पर जाने के लिए निकल गए। जबकि ट्रैक्टर परेड 12 बजे शुरू होनी थी। यह सारी पहले से प्लान की गई योजना थी। जो मुख्य इसका मुख्य सरगना है ( दीप सिद्धू) उसकी प्रधानमंत्री के साथ फोटो वायरल हो गई हैं। उसी व्यक्ति की गृह मंत्री के साथ भी फोटो हैं। उसी ने लाल किले पर लोगों को भड़काया था। आखिर क्यों नहीं इसका राज खोलती सरकार। सरकार को इसका आरोप किसानाें पर लगाना बहुत महंगा पड़ेगा। किसानों ने शांतिपूर्वक ट्रैक्टर परेड निकालकर इतिहास बनाया और उन्हीं के ऊपर ये आरोप लगा दिया कि ये खालिस्तानी हैं और देशद्रोही हैं। जिस लाल किले पर इतने सुरक्षा कर्मचारी और सेना तैनात थी वे हाथ बांधकर क्यो खड़ रहे। यह शांतिपूर्वक आंदोलन को बदनाम करने की योजना थी।

सवाल : क्या आप मानते हैं कि राकेश टिकैत के आसुओं ने आंदोलन में नई जान फूक दी।

स्वामी आर्यवेश : जब उस व्यक्ति ( दीप सिद्धू) का प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ फोटो वायरल हुआ तो लोगों काे पता चल गया कि ये तो इन्हीं का आदमी है। लोग समझ गए कि ये तो हम पर झूूठा आरोप लगाया जा रहा है। जब राकेश टिकैत ने देखा कि यहां पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स आ गई है तो तब उनको सबसे बड़ा दुख हुआ। उनको रोना तब आया जब वहां के भाजपा के दो विधायक अपने भाड़े के लोगों को लेकर वहां रात के अंदेरे में आए और बिजली काट दी, पानी भी बंद कर दिया और वृद्ध किसानों को ठोकरें मारी गई। लाठी और डंडों से खोद मार अपमानित किया गया। तब टिकैत अंदर से रोये। ये साइंस का सिद्धांत है कि जब किसी आदमी के दिल से कोई बात निकलती है तो उसको जो भी उसी भाव से देखेगा, उसका भी दिल उसी तरह से रोयेगा। उस दिन सारा देश रोया और हजारों लोग दो घंटे के अंदर गाजीपूर बार्डर पर पहुंच गए।

आज राकेश टिकैत के पास लोगों का हुजूम इकट‍्ठा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से तय कर दिया कि अब किसान ही तय करेंगे कि भाग्य का फैसला कौन लिखता है। मैं एक ही बात कहता हूं कि भाजपा ने सबसे लंबा समय विपक्ष में बिताया, सड़कों पर आंदोलन किए, स्वामीनाथन आयोग के लिए तो ओमप्रकाश धनखड़ साइकिल पर निकल लेते थे। आज सबकी जुबान सील दी गई है। ऊपर की सरकार ने बहुत बड़ी डील कर रखी है। काॅरपोरेट हाउसों के साथ समझौते कर रखे हैं। जिनके बड़े बड़े गोदाम बन रहे हैं, उन गोदामों को भरने की तैयारी सरकार कर रही है। पर अब किसान जाग गए हैं। हर गांव से किसानों के लिए चंदा इकट‍्ठा किया जा रहा है। सभी खाप किसानों के साथ आ गई हैं। ये आंदोलन कुछ लोगों का नहीं है, ये जन आंदाेलन बन चुका है। सत्तारूढ़ लोगों को आराम से समझ लेना चाहिए और अपनी हेकड़ी दूर करके किसानों के आगे सरेंडर कर देना चाहिए। ये दीनबंधु सर छोटूराम का इलाका है जिन्होंने अंग्रेजों को भी चुनौती दे दी थी। अब सरकार के टाेटके चलेंगे नहीं। अब मोदी जी को ये कहना पड़ेगा कि सरकार इन कानूनों को खत्म करती है।

सवाल : आपको सन्यासी होकर भी इस आंदोलन में आना पड़ा और देश की मीडिया के बारे में आप क्या कहोगे ?

स्वामी आर्यवेश : सन्यासी तो बनता ही आदमी तब है जब वो सब लोगों को अपने परिवार का सदस्य मान लेता है और जिस परिवार में जन्म लिया उसे छोड़ देता है। वो काेई मजहब, संप्रदाय और जात पात नहीं देखता। जब भी समाज पर विपत्ती आई तो सन्यासियों ने पहले भी अपनी भूमिका निभाई है। सन्यासी का धर्म है संकट के समय लोगों का साथ देना। सन्यासी तो पहले से किसानों के हितैषी हैं। पर आज देश की मीडिया अपनी भूमिका नहीं निभा रही और सत्य को सामने नहीं ला रही। देश के चैनल इस समय अपनी भूमिका नहीं निभा रहे हैं। सारे राष्ट्रीय चैनल बिक चुके हें। प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा।

सवाल : क्या आपको लगता है प्रधानमंत्री किसानों की मांगें मानेंगे

स्वामी आर्यवेश : राजनीति में एक सिद्धांत है कि कितनी बार ही झूठ बोलते जाओ, चल जाए तो ठीक है नहीं तो पीछे हट जाओ। राकेश टिकैत की ताकत देखकर हजारों पुलिसकर्मी भेड़ियों की तरह उन पर टूट पड़े थे। जब टिकैत के समर्थन में जनता आई तो पुलिस को पीछे हटना पड़ा। अब प्रधानमंत्री को आगे आना चाहिए और किसानों की मांगें माननी चाहिए।

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