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मौसम तो बदला, नहीं बदली आबोहवा, जनवरी-फरवरी में गटकते रहे जहर, अब प्रदूषण कम तो हुआ पर सांस लेने लायक नहीं

इंडिया एयर क्वालिटी इंडक्स से मुताबिक जनवरी-फरवरी के 59 में से 53 दिन का डाटा उपलब्ध हुआ है। उसके मुताबिक एक जनवरी को रोहतक का एक्यूआई 410, दो को 442 और 18 को 409 दर्ज किया गया। यह खतरनाक श्रेणी में आता है।

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प्रदूषण का बढ़ा कहर

अमरजीत एस गिल:रोहतक

इस समय फसलों की कटाई-कढ़ाई का सीजन नहीं है। जिससे प्रदूषण फैलाने के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता। लेकिन दिनों-दिन प्रदूषण बढ़ रहा है। बीते 24 घंटे में इसमें तीन गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तीन मार्च बुधवार को रोहतक की आबोहवा में पीएम 2.5 की मात्रा जहां 82 थी। इसके अगले दिन बृहस्पतिवार का प्रदूषण सूचकांक 226 तक जा पहुंचा। आने वाले दिनों में अगर क्षेत्र में मौसम बदलकर बूंदाबांदी होती है तो इसमें कुछ कमी हो सकती है। बीते जनवरी-फरवरी के एक्यूआई पर सरसरी नजर डालें तो एक दिन भी ऐसा नहीं बीता जिस दिन रोहतक की आबोहवा सांस लेने के लायक रही हो।

बीते 53 दिन में पांच जनवरी को प्रदूषण सूचकांक 85 था। प्रदूषण के हिसाब से इसे संतोषजनक कहा जा सकता है। इसके अलावा अति खराब हवा के 19 , खराब के भी 19, मध्यम दर्जे के 11 दिन रहे। आने वाले दिनों में अगर हवा की गति बढ़ती है तो एक्यूआई में कमी हो सकती है। वरना जैसे-जैसे गर्मी का प्रकाेप बढ़ेगा, वैसे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ेगा। क्योंकि गर्मी के मौसम में धूल-मिट्टी ज्यादा उड़ती है। जिसकी वजह से पॉल्यूलशन का लेवल भी बढ़ता है। कुल मिलाकर मानसून तक अब हमें जहरीली और अति जहरीली में हवा सांस लेने को मजबूर होना पड़ेगा।

इंडिया एयर क्वालिटी इंडक्स से मुताबिक जनवरी-फरवरी के 59 में से 53 दिन का डाटा उपलब्ध हुआ है। उसके मुताबिक एक जनवरी को रोहतक का एक्यूआई 410, दो को 442 और 18 को 409 दर्ज किया गया। यह खतरनाक श्रेणी में आता है।

किसान को मानते जिम्मेदार

कोविड-19 की वजह से बेशक देश-दुनिया अभी भी तकलीफ झेल रहा हो। लेकिन इस महामारी ने यह साबित कर दिया कि प्रदूषण फैलाने के लिए किसान जिम्मेदार नहीं हैं। काेरोना का फैलाव रोकने के लिए 24 मार्च 2020 को देश को लॉकडाउन कर दिया गया था। जिसमें आपातकालीन वाहनों काे छोड़कर सभी प्रकार के दूसरे व्हीकल की आवाजाही पर काफी दिनों तक राेक लगी रही। लॉकडाउन के चार दिन बाद 28 मार्च को रोहतक का एक्यूआई मात्रा 26 दर्ज किया गया था। पांच-सात दशक में शायद कभी भी आबोहवा इतनी स्वच्छ रही हो।

लॉकडाउन के दौरान दौरान अन्य सालों की तरह ही रबी की कटाई-कढ़ाई किसानों ने की। लेकिन एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा, जिसमें प्रदूषण मध्यम दर्जे से ऊपर पहुंचा हो। अप्रैल 2020 में आठ दिन पूरी तरह से स्वच्छ हवा चली। इसी प्रकार मई माह भी प्रदूषण के नजरिये सामान्य ही बीता। जबकि अप्रैल और मई में फसल कटाई का कार्य चरम पर होता है। लॉकडाउन की वजह से ही जून, जुलाई, अगस्त और सितम्बर भी अच्छा और संतोषजनक रहा। अक्टूबर से हम फिर पहले वाली स्थिति में पहुंच गए हैं।

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