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प्रभात कुमार रॉय का लेख : शांति वार्ता से ही निकलेगा हल

इजराइल और फिलिस्तीन-हमास गोला-बारूद के दम पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचेंगे। इजराइल को फिलिस्तीनियों के साथ जोर जबरदस्ती करना बंद करना होगा। हां हमास जैसे कट्टर इस्लामिक आतंकी गुटों के खिलाफ वैश्वक स्तर पर किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं होना चाहिए, बल्कि इस पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र को आगे आकर इजराइल व फिलिस्तीन, गाजा पट्टी आदि के विवादों को सुलझाना चाहिए। पश्चिम एशिया में शांति सबके हित में है। भारत का रुख स्पष्ट है कि वह इजराइल व फिलिस्तीन के बीच शांति चाहता है, युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। दोनों मुल्क अपनी अपनी जिम्म्ेदारी समझे।

प्रभात कुमार रॉय  का लेख : शांति वार्ता से ही निकलेगा हल
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

इजराइल और फ़िलिस्तीन की ग़ाजा पट्टी के हमास जेहादियों के मध्य एक दफा फिर भयानक हिंसक संघर्ष शुरू हो गया। इजराइल और फ़िलिस्तीनियों के मध्य विगत 73 वर्षों से हिंसक संघर्ष चलता रहा है, किंतु वर्तमान हिंसक संघर्ष विगत कुछ महीनों से जारी तनाव का नतीजा है। जिस स्तर की गोलाबारी इस दफा नजर आ रही है, ऐसी भयानक गोलाबारी वर्ष 2014 के पश्चात अंजाम दी गई है। वस्तुतः यरूशलम में इजराइली पुलिस और फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों के बीच हफ़्तों तक जारी रही, हिंसक झड़पों के तत्पश्चात वर्तमान हिंसक संघर्ष शुरू हुआ। यरूशलम ऐतिहासिक स्थल है, जो कि समस्त विश्व के यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों के लिए पवित्र धर्मस्थल माना जाता है। पूर्वी यरुशलम में स्थित अलस्का मस्जिद के निकट मुस्लिमों की रिहाइशी बस्तियों को हटाने का कार्य इजराइल की हुकूमत अंजाम दे रही थी, जिसका प्रबल विरोध गाजापट्टी पर अपना कब्जा जमाए बैठे हमास ने किया। इजराइल हमास को आतंकी गुट घोषित कर रखा है।

उल्लेखनीय है कि इजराइल की तकरीबन 90 लाख जनसंख्या में लगभग 20 लाख अरब मुस्लिमों की आबादी हैं। फ़िलिस्तीनियों और इजराइल सुरक्षा बलों के मध्य जारी हिंसक झड़पों के दौरान ग़ाजा पट्टी से हमास जिहादियों द्वारा निरंतर दागे जाने वाले रॉकेटों का निशाना तेल अबीब, मोडिन, बीरशेबा जैसे इजराइली शहर रहे हैं। इजराइल ने हमास के राकेट आक्रमणों का जवाब अपने विनाशकारी हवाई हमलों से दिया है जोकि गाजा और वैस्ट बैंक में केंद्रित रहे हैं। इजराइल की मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली आयरन डोम हमास के हमलों का जवाब दे रही है। युद्धरत दोनों पक्षों को जान और माल का जबरदस्त नुक़सान हुआ है। सैकड़ों की तादाद में फ़िलीस्तीनी हलाक़ हो चुके हैं, जबकि दूसरी तरफ़ कम से कम 50 इजराइली नागरिकों की जानें गई हैं।

इजराइल और हमास के मध्य जारी ये विकट हिंसक संघर्ष अब वैश्विक मुद्दा बन गया है। इस हिंसक संघर्ष को रोकने की कोशिशें जारी हैं और इस प्रयास में मुख़तलिफ़ देश परस्पर विरोधी धाराओं में बँट गए हैं। ज्यादातर इस्लामिक देश फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में नज़र आ रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 25 देशों को समर्थन करने के लिए शुक्रिया अदा किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने फिलिस्तीनियों की उचित मांगों के स्वीकार करने की जोरदार हिमायत की है। भारतीय प्रतिनिधि तिरुमूर्ति ने कहा कि हिंसक संघर्ष को तत्काल खत्म किया जाना चाहिए। साथ ही दो राष्ट्रों के सैद्धांतिक आधार पर फिलिस्तीन को भी इसराइल की तरह से एक आजाद राष्ट्र का दर्जा देने की प्रबल पैरवी की।

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता के मुताबिक यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने फरमाया कि पिछले दिनों एक ही परिवार के दस सदस्यों की हलाकत से अत्यंत दुःखी हुए, इस हमले का उद्देश्य कथित तौर पर एक हमास नेता को बताया गया। एंटोनियो गुटेरेस इस हिसंक संघर्ष में मारे जा रहे नागरिकों की लगातार बढ़ती हुई संख्या को लेकर भी अत्यंत चिंतित है। एंटोनियो गुटेरेस को इजराइल द्वारा मीडिया संस्थानों की इमारत अल-जाला को निशाना बनाये जाने की घटना ने बेहद संतप्त किया। उल्लेखनीय है कि गत शनिवार को इजराइल ने ग़ाज़ा पट्टी में स्थित एक अल-जाला नाम की बारह मंज़िला इमारत को एक हवाई हमले से ध्वस्त कर दिया। इजराइल ने दावा किया कि उस अल-जाला बिल्डिंग के एक मंजिल पर हमास का भी ठिकाना मौजूद था। वस्तुतः इस इमारत में अल-जज़ीरा, एपी और अन्य मीडिया संगठनों के दफ़्तर विद्यमान थे। विगत 13 वर्षों से इसराइल के प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू ने मीडिया दफ्तरों पर अंजाम दिए गए नृशंस हमले को एकदम जायज ठहराया। भ्रष्टाचार से बेहद संगीन इल्जामों में गहरे फंसे हुए और चुनाव में अपनी पराजय से त्रस्त हुए, बेंजामिन नेतन्याहू वस्तुतः क्या हिसंक आक्रमकता में ही अपनी निजात तलाश कर रहे हैं, ताकि विकट हिसंक संघर्ष में इजराइल के लोगों को ध्यान जमा दिया जाए।

इजराइली सेना ने कहा कि हमास जिहादियों ने इजराइल को निशाना बनाकर 5000 से अधिक रॉकेट दाग़े हैं, लेकिन इनमें से ज़्यादातर रॉकेट इजराइल की सुरक्षा शील्ड के कारण ज़मीन तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिए गए। इस सुरक्षा शील्ड को आयरन डोम एंटी मिसाइल डिफेन्स सिस्टम कहते हैं। इजराइली हुकूमत के मुताबिक़ ये सुरक्षा तकनीक 90 प्रतिशत मामलों में कारगर साबित है। ये रॉकेट को रिहायशी इलाकों में ज़मीन पर गिरने से पहले ही मार गिराती है। आयरन डोम एक बड़े मिसाइल डिफेंस सिस्टम का हिस्सा है, जिसे इजराइल ने लाखों डॉलर खर्च कर बनाया है।

हमास का उदय 2008 में हुआ था। यह सुन्नी कट्टरपंथी जेहादी तंजीम है, जिसका आधार क्षेत्र गाजा पट्टी है। फिलिस्तीनियों द्वारा संचालित इंतिफादा संघर्ष के विरुद्ध वर्ष 2007 में इजराइल द्वारा ऑपरेशन पीलर संचालित किया गया और फिर ऑपरेशन प्रोटेक्टिव संचालित किया गया, इजराइल के सैन्य ऑपरेशन के दौरान हमास जेहादी तंजीम ताकतवर बनकर फ़िलिस्तीन की सरजमीं पर उभरी और फ़िलिस्तीन लिबरेशन ऑरगेनाइजेशन (पीएलओ) के लड़ाकू विंग अलफतह के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली हो गई। अलफतह समाजवादी सिद्धांतों पर विश्वास करता है, जबकि हमास का यकीन इस्लामिक कट्टरपंथ पर है। हमास को ईरान, सऊदी अरब तुर्की व पाकिस्तान की प्रबल हिमायत हासिल रही है।

आखिरकार हल क्या है फ़िलिस्तीनियों और इजराइल के मध्य विगत 73 वर्षों से जारी हिंसक टकरावों का, जिसमें दोनों पक्षों के कम से कम एक लाख से अधिक इंसान हलाक़ हो चुके हैं और अकूत संपदा नष्ट हो चुकी। वर्ष 1948 में इजराइल राष्ट्र का ऐलान होते ही हिंसक टकराव प्रारम्भ हुआ, जोकि वर्ष 1967 और वर्ष 1973 में दो बड़ी जंग में परिणीत हुआ। फिलिस्तीनियों के पक्ष में इजिप्ट, सीरिया और जोर्डन आए और इजराइल के हाथों पराजित हुए। यासर अराफात की कयादत में पीएलओ और अलफतह तंजीम ने लंबे दौर तक इजराइल के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध अंजाम दिया। इजराइल और फिलिस्तीन, हमास गोली-बारूद के दम पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचेंगे। इजराइल को फिलिस्तीनियों के साथ जोर जबरदस्ती बंद करना होगा। हां हमास जैसे आतंकी गुटों के खिलाफ वैश्वक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र को आगे आकर इजराइल व फिलिस्तीन, गाजा पट्टी आदि के विवादों को सुलझाना चाहिए। पश्चिम एशिया में शांति सबके हित में है। भारत इजराइल व फिलिस्तीन के बीच शांति चाहता है, युद्ध हल नहीं है।

(लेखक विदेश मामलों के जानकार हैं, इस लेख में उनके अपने विचार हैं।)

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