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सरसों की फसल ने किसानों के चेहरों पर रौनक ला दी, न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बिक रही

किसानों ने एक भी दाना एमएसपी रेट पर देने के लिए तैयार नहीं हुए। क्योंकि सरसों का सरकारी रेट 4650 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी में किसानों की फसल 4800 से 5100 रुपये तक बिक रही है।

सरसों की फसल ने किसानों के चेहरों पर रौनक ला दी, न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर    बिक रही
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हरिभूमि न्यूज : फतेहाबाद (भूना)

सरसों की फसल ने किसानों के चेहरों पर रौनक ला दी है। अनाज मंडी भूना में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर के रेट पर बिक रही है। सरसों का दाम किसानों को अच्छा मिल रहा है। इससे किसान खुश हैं। जबकि सरकारी हैफड़ खरीद एजेंसी के अधिकारियों ने वीरवार से सरसों सरकारी खरीद शुरू कर दी है। मगर पूरे दिन सरसों की ढेरियो पर खरीद के लिए भटकते रहे, मगर किसानों ने एक भी दाना एमएसपी रेट पर देने के लिए तैयार नहीं हुए। क्योंकि सरसों का सरकारी रेट 4650 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी में किसानों की फसल 4800 से 5100 रुपये तक बिक रही है।

मार्केट कमेटी के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वीरवार को मंडी में लगभग 3570 क्विंटल से ज्यादा सरसों की प्राइवेट खरीद हो चुकी है। जैसे-जैसे किसानों की फसल पकेगी, वैसे ही मंडी में आवक बढ़ेगी। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर भूना क्षेत्र के 210 किसानों ने लगभग 900 एकड़ में सरसों की फसल का पंजीकरण करवाया है। किसानों की फसल पककर तैयार हो चुकी है और किसान अपनी फसल मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं। मंडी पहुंचते ही किसानों की फसलों को प्राइवेट एजेंसियों द्वारा खरीद लिया जाता है। किसानों को उनकी फसल के अच्छे भाव भी मिल रहे हैं। वीरवार को जहां सामान्य सरसों 4800 से लेकर 5100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची। किसानों का कहना है कि वे सरसों की फसल मंडी में लेकर पहुंच रहे है। सरकारी खरीद शुरू हो चुकी हैं। लेकिन प्राइवेट मिलर्स की ओर से फसल ऊंचे दामों पर खरीदी जा रही है।

सरसों की ढेरियां एमएसपी से 500 रुपये प्रति क्विंटल ऊपर ही बिक रही हैं। वहीं खरीदारों की मानें तो सरसों की फसल मंडी में पहुंच रही है। इसे हाथोंहाथ खरीद लिया जाता है। जिस ढेरी में नमी ज्यादा नजर आती है, उसका रेट कम लगता है। जो ढेरी पूरी तरह सूखी होती है, उसको एमएसपी से कहीं ज्यादा दामों पर खरीदा जा रहा है। किसानों को फसल का अच्छा मूल्य मिल रहा है।किसान रघुवीर सिंह भैरो गांव जांड़ली कला ने बताया कि ना पोर्टल और ना कोई टोकन की जरूरत है। किसान कि सरसों ढेरी करने से पहले ही प्राइवेट एजेंसियों के लोग हाथों- हाथ खरीद रहे हैं। जिससे किसानों को आर्थिक रूप से अधिक फायदा हो रहा है। इसलिए किसान अपनी फसल एमएसपी रेट पर क्यों लूटाएंगे।

किसान प्रदीप बिशनोई जांडली खुर्द का कहना है कि प्राइवेट मिलर्स सरसों की खरीद अच्छे ढंग से कर रही है किसानों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं हो रही। मगर सरकारी खरीद एजेंसी 8 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक लेती नहीं थी। इसलिए किसान ज्यादा परेशान होते थे। मगर अब कोई परेशानी नहीं हो रही।किसान रामप्रकाश उर्फ रामू टिब्बी ने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसी को सरसों बेचने के लिए पिछली बार धरने प्रदर्शन करने पड़ते थे। परंतु टोकन लेने के लिए किसानों को लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। मगर अब प्राइवेट मिलर्स ने सरसों के अच्छे दाम देकर किसानों को बड़ी राहत दी है।सरसों का दाम किसानों को अच्छा मिल रहा है। इससे किसान खुश हैं।किसान कृष्ण कुमार ढाणी सांचला का कहना है कि हैफड़ सरकारी खरीद एजेंसी से प्राइवेट मिलर्स 500 रुपये प्रति क्विंटल का दाम अधिक दे रहे हैं। कोई भी किसान अपनी फसल घाटे में क्यों बेचेगा। क्योंकि 6 महीनों तक कड़ाके की सर्दी में फसल को पकाया है। एमएसपी रेट पर देकर नुकसान नहीं उठाना चाहते।

क्या कहते हैं मार्केट कमेटी के सचिव

मार्केट कमेटी भूना के सचिव ईश्वर सिंह ढाका ने बताया कि किसान अपनी फसल कहीं पर ही बेचे उसका अधिकार है। लेकिन प्राइवेट लोग सरसों का अधिक दाम दे रहे हैं। वही हैफड़ खरीद एजेंसी के भूना प्रबंधक राजकुमार भारद्वाज ने बताया कि वीरवार को सरकारी खरीद शुरू कर दी गई है मगर किसान प्राइवेट लोगों को ऊंचे दामों पर सरसों की फसल बेच रहे हैं। हैफड़ एजेंसी को वीरवार को एक भी दाना किसानों ने नहीं बेचा है।

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