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तीन बेटियों का बाप था टीकरी बॉर्डर पर फांसी लगाने वाला जींद का किसान, बेटे की भी हो चुकी मौत

मृतक कर्मबीर के भतीजे संदीप ने बताया कि कर्मबीर के नाम दो एकड़ जमीन है और उसी पर फसल उगा कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था।

तीन बेटियों का बाप था टीकरी बॉर्डर पर फांसी लगाने वाला जींद का किसान, बेटे की भी हो चुकी मौत
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 किसान कर्मवीर का फाइल फोटो और मृतक द्वारा छोड़ा गया नोट।

हरिभूमि न्यूज. जींद/ बहादुरगढ़

दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर रविवार सुबह नरवाना खंड के गांव सिंगवाल निवासी कर्मबीर ने फांसी का फंदा लगा लिया। मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। जिसमें मोदी सरकार पर काले कानूनों को रद्द करने के लिए तारीख पर तारीख दिए जाने का जिक्र किया गया है। कर्मबीर द्वारा आत्महत्या किए जाने की सूचना मिलने पर परिजन दिल्ली की तरफ रवाना हो गए। परिजनों के अनुसार कर्मबीर किसान आंदोलन में शुरुआत से ही सक्रिय था और चार दिन पहले ही दिल्ली जा रहे ट्रैक्टरों में सवार होकर टीकरी बॉर्डर गया था। कर्मबीर ने दिल्ली जाते समय कहा था कि सरकार कानूनों की आड़ में उनकी जमीन को हड़पना चाहती है। अब वह कानून वापस नहीं होने तक टीकरी बॉर्डर से वापस नहीं आएगा।

मृतक कर्मबीर के भतीजे संदीप ने बताया कि कर्मबीर के नाम दो एकड़ जमीन है और उसी पर फसल उगा कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। कर्मबीर को तीन बेटी हैं। इसमें बड़ी बेटी की वर्ष 2013 में शादी कर दी थी। जबकि 13 व पांच वर्ष की बेटी फिलहाल गांव के स्कूल में पढ़ रही है। कर्मबीर के साथ गांव के दूसरे किसान भी गए हुए हैं। उनके द्वारा ही रविवार अल सुबह पता चला कि कर्मबीर ने रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। उसके पास एक नोट भी मिला है। जिसमें कृषि कानूनों का जिक्र किया गया है। परिजनों ने बताया कि कर्मबीर के सबसे बड़ी बेटी है और उसकी शादी की जा चुकी है। जबकि दूसरे नंबर पर लड़का था लेकिन वर्ष 2006 में उसका बेटा बीमार हो गया और उसकी मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद कर्मबीर की पत्नी ने दो लड़कियों को जन्म दिया। अब खेती करके ही उनका पालन पोषण कर रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि कर्मबीर के छह भाई है और सभी खेतीबाड़ी का काम करते हैं। मृतक का शव दोपहर बाद ही गांव पहुंचेगा।

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