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टिकरी बॉर्डर पर किसान ने सुसाइड नोट लिखकर फांसी लगाकर दे दी जान, पढें क्या लिखा है

किसान का शव एक पेड़ पर लटका मिला और उसके पास से दो पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने सरकार से अंतिम इच्छा पूरी करने की अपील की है।

टिकरी बॉर्डर पर किसान ने सुसाइड नोट लिखकर फांसी लगाकर दे दी जान, पढें क्या लिखा है
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किसान राजबीर द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट। 

बहादुरगढ़ : हरिभूमि न्यूज

टीकरी बॉर्डर पर एक और आंदोलनकारी किसान ने आत्म हत्या कर ली। रविवार को उसका शव सड़क पेड़ पर लटका मिला। मृतक के पास एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। सुसाइड नोट में मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है। साथ ही किसानों से आंदोलन में डटे रहने की अपील की गई है। मृतक की पहचान करीब 48 वर्षीय राजबीर सिंह के रूप में हुई है। राजबीर सिंह हिसार जिले के सिसाय गांव का रहने वाला था। शुरुआत से ही आंदोलन से जुड़ा हुआ था। कसार मोड़ के पास ठहरा हुआ था। लंगरों व अन्य गतिविधियों में सक्रियता से भाग ले रहा था। शनिवार की रात को उसने जत्थे से कुछ दूरी पर जाकर सर्विस रोड किनारे पेड़ पर फंदा लगा लिया। रविवार की सुबह उसका शव देखा गया।

सूचना मिलते ही सेक्टर-6 थाने से पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। शव को नागरिक अस्पताल में लाया गया। राजबीर की मौत की सूचना पर दोपहर को परिजन बहादुरगढ़ पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। बहादुरगढ़ में अब तक काफी किसानों की मौत हो चुकी थी। राजबीर समेत चार लोगों ने आत्म हत्या की है।

किसान राजबीर ने सुसाइड नोट में लिखा है कि ये सरकार खून मांगती है और मैं किसानों के लिए अपनी शहादत देता हूं। मेरी शहादत खराब नहीं जानी चाहिए, चाहे मेरा शव सड़क पर पड़ा रहे। तीनों कृषि कानूनों को वापस कराने और एमएसपी की गारंटी लेकर ही किसान वापस लौटें। मृतक राजबीर के पास मिले सुसाइड नोट में यह मार्मिक अपील किसानों से की गई है। हालांकि आत्महत्या जैसे कदम को बहुत से किसान सही नहीं बता रहे, लेकिन सभी को राजबीर की मौत का गहरा दु:ख है और इनमें सरकार के प्रति रोष बढ़ रहा है। किसानों ने भी साफ शब्दों में कहा है कि ये शहादतें व्यर्थ नहीं जाएंगी। जब तक कानून रद्द नहीं होते, किसान सड़कों पर डटे रहेंगे।

दरअसल, राजबीर सिंह हिसार जिले के गांव सिसाय में खेती करता था। दो बच्चों का पिता था। कृषि कानूनों के खिलाफ वह भी लगातार आवाज उठा रहा था। जब दिल्ली कूच का एलान हुआ तो वह भी इस आंदोलन में शामिल हो गया। शुरुआत से लेकर अब तक वह आंदोलन में डटा हुआ था। कभी-कभी ही परिवार का हाल-चाल जानने घर चला जाता था। आंदोलन में वह पूरी तरह से सक्रिय था। लंगर से लेकर अन्य कामों में वह आगे रहता था। हक के लिए संघर्ष कर रहा राजबीर, सरकार के बेरुखे रवैये के कारण अंदर से टूट चुका था। शनिवार को उसने खाना खाया और देर रात तक साथियों संग ताश भी खेला। इसके बाद वह जत्थे से दूर हो गया और सर्विस रोड के साथ लगते पेड़ पर रस्सी बांधकर फंदा लगा लिया। सुबह जब किसान उठे तो किसी की नजर पेड़ पर लटके राजबीर के शव पर पड़ी। राजबीर के पास से दो पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ।

ये लिखा है सुसाइड नोट में

सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए राजबीर ने सरकार को दोषी ठहराया है। लिखा है कि मोदी जी थाम तो न्यू सोचो सो किसान में घणा दम है। खाद, दवाई, डीजल ने मारा-अंदर तै तो खत्म है। मरने वाले की आखिरी ईच्छा पूरी की जाती है। मेरी ईच्छा ये है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। भाई बलराज कुंडू और भाई दीपेंद्र हुड्डा किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। मैं इनका बड़ा फैन हूं भाइयों। भगत सिंह ने देश के लिए जान दे दी, हमने किसान भाइयों के लिए जान दे दी। ये सरकार खून मांगती है किसानों का और मैं शहादत देता हूं। जमीदार और किसान भाइयों, मेरा बलिदान व्यर्थ न जाए। तीन काले कानूनों को वापस कराकर ही घर जाएं। सारे भाइयों को राम-राम। कोई गलती हो तो माफ करना। आपका भाई राजबीर।

अब तक चार आत्महत्या

गत 27 नवंबर से टीकरी बार्डर पर चल रहे आंदोलन में अब तक 40 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। राजबीर को मिलाकर चार आत्महत्याएं हो चुकी हैं। इससे पहले छह फरवरी को किसान कर्मवीर ने फांसी लगाई थी। गत 19 जनवरी को पाकस्मा के किसान जयभगवान ने जहरीला पदार्थ निगल लिया था। वहीं 27 दिसंबर को नयागांव चौक पर पंजाब से आए वकील अमरजीत ने जहर निगलकर जान दे दी थी। लगातार हो रही शहादतों पर किसान दु:खी हैं। किसानों में सरकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि आत्महत्या सही कदम नहीं है, लेकिन सरकार की बेरुखी ऐसे हालात पैदा कर रही है। सरकार को काले कानून रद्द करने चाहिए, ताकि किसान भी अपने घर लौट सकें।

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