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10+2 की परीक्षा रद्द करने का फैसला बिलकुल सही

देश में कोविड-19 के चलते कई स्टूडेंट्स ने अपने परिवार वालों को खोया है। ऐसे में इस समय फिजिकली परीक्षा कराना न सिर्फ लाखों छात्रों और टीचर्स की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि उनके परिवार वालों के लिए भी यह परेशानी का सबब है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी परीक्षाएं रद करने की मांग की थी।

10+2 की परीक्षा रद्द करने का फैसला बिलकुल सही
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : हिंदी की कहावत है, देर आए, दुरुस्त आए। केंद्र सरकार ने दस जमा कक्षा की परीक्षा रद करके बिलकुल सही फैसला लिया है। कोरोना महामारी के बीच न केवल छात्र बल्कि अभिभावक भी परीक्षाओं को लेकर खासे आशंकित थे। लगातार खबरें आ रही थी कि इन गंभीर हालात में अभिभावक अपने बच्चों को परीक्षा केंद्र भेजने को लेकर डरे हुए हैं। कुछ अभिभावकों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई गई थी। तीन हजार छात्रों ने परीक्षाओं को लेकर करीब एक हफ्ते पहले चीफ जस्टिस एनवी रमना को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें कहा गया था, कि कोरोना के बीच फिजिकल एग्जाम कराने का सीबीएसई का फैसला रद कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट असेसमेंट का वैकल्पिक तरीका तय करने का निर्देश दे।

देश में कोविड-19 के चलते कई स्टूडेंट्स ने अपने परिवार वालों को खोया है। ऐसे में इस समय फिजिकली परीक्षा कराना न सिर्फ लाखों छात्रों और टीचर्स की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि उनके परिवार वालों के लिए भी यह परेशानी का सबब है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी परीक्षाएं रद करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि पिछली परफॉर्मेंस के आधार पर छात्रों का आकलन किया जाए। उनका कहना था कि पेरेंट्स परेशान हैं। वे नहीं चाहते कि वैक्सीनेशन किए बिना परीक्षा हो। असल में दस जमा दो हमारी शिक्षा व्यवस्था की नींव है। इसी परीक्षा के आधार पर तय होता है कि बच्चा किस क्षेत्र में जाएगा। देश 12 राज्य चाहते थे कि 3-4 विषयों की परीक्षा हो, समय भी घटे।

परीक्षा को लेकर राज्यों ने अपने सुझाव केंद्र सरकार को भेजे थे। महाराष्ट्र, दिल्ली झारखंड, केरल, मेघालय, अरुणाचल, तमिलनाडु और राजस्थान ने परीक्षा से पहले टीके का सुझाव दिया था। महाराष्ट्र ने ऑनलाइन परीक्षा की भी बात कही थी। यूपी, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, असम, हिमाचल, चंडीगढ़, सिक्किम, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और ओडिशा चाहते थे कि सिर्फ मुख्य विषयों की परीक्षा हो और परीक्षा का समय कम कर दिया जाए। एग्जाम बच्चों के अपने स्कूल में ही हों। इन्हीं सुझावों के आधार पर तीन प्रपोजल तैयार किए थे। मुख्य विषयों यानी मेजर सब्जेक्ट्स का एग्जाम लिया जाए। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के केवल तीन मुख्य विषयों की ही परीक्षा लेने के बाद बाकी सब्जेक्ट्स में मुख्य विषयों पर मिले नंबर्स के आधार पर मार्किंग का फॉर्मूला बनाया जाए। दूसरा, 30 मिनट की परीक्षाएं हो और इनमें ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएं।

इस परीक्षा में विषयों की संख्या भी सीमित करने की बात कही गई, पर इसके बारे में साफ कुछ नहीं बताया गया। तीसरा, 9वीं, 10वीं और 11वीं तीनों का इंटरनल असेसमेंट किया जाए। इसके बाद इसके आधार पर ही 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया जाए। इन्हीं प्रपोजल के साथ सीबीएसई के चेयरमैन, शिक्षा मंत्रालय के सेक्रेटरी के अलावा केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, राजनाथ सिंह और प्रकाश जावड़ेकर प्रधानमंत्री के साथ बैठक में शामिल हुए, जिसमें तय किया गया कि छात्रों की सुरक्षा और सेहत सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। ऐसे दबाव भरे माहौल में छात्रों को परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जाना ठीक नहीं होगा। यह बिलकुल सही फैसला है। यह समय ऐसा नहीं है कि बच्चों की सेहत को लेकर कोई रिस्क लिया जाए। शिक्षा जरूरी है, लेकिन भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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