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आरटीए विभाग में कम नहीं हुआ दलाली का कारोबार, आगे पढ़ें

सिटी चार्टर के अनुसार प्राधिकरण में जो कार्य एक सप्ताह में होना चाहिए, दलाल और रिश्वत के बिना उस कार्य को करने में अधिकारी और कर्मचारी महीनों का समय लगा देते हैं।

आरटीए विभाग में कम नहीं हुआ दलाली का कारोबार, आगे पढ़ें
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 आरटीए कार्यालय का फाइल फोटो।

हरिभूमि न्यूज : रेवाड़ी

भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा माने जाने वाले क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण पर हथौड़ा चलाते हुए गत वर्ष प्रदेश सरकार ने अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक में भारी फेरबदल तो कर दिया, लेकिन इसके बावजूद प्राधिकरण में फैले दलालों के जाल से सरकार वाहन मालिकों को मुक्ति नहीं दिला पाई है। सिटी चार्टर के अनुसार प्राधिकरण में जो कार्य एक सप्ताह में होना चाहिए, दलाल और रिश्वत के बिना उस कार्य को करने में अधिकारी और कर्मचारी महीनों का समय लगा देते हैं। संतोषजनक बात यह है कि रिश्वत में विश्वास नहीं करने वाले वाहन मालिकों का काम बिना पैसा दिए हो जाता है, परंतु इसकी ऐवज में वाहन मालिकों को कार्यालय के चक्कर लगाने में अपनी चप्पलें जरूर घिसनी पड़ती हैं।

प्रिंस फूड प्रोडक्ट के मालिक रमेश सचदेवा को अपनी टाटा ऐश गाड़ी की एनओसी लेने के लिए विभाग के कार्यालय को गत वर्ष 20 नवंबर को आवेदन दिया था। वाहन मालिक ने एनओसी लेने के लिए न तो किसी को रिश्वत दी और न ही उनसे किसी ने रिश्वत की मांग की। रमेश सचदेवा को शुरू में यह लग रहा था कि उसे वाहन की एनओसी नियमानुसार निर्धारित एक सप्ताह में मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रमेश सचदेवा ने बताया कि एनओसी के लिए एप्लाई करने के एक सप्ताह जब उन्होंने प्राधिकरण के कार्यालय में जाकर संपर्क किया, तो उन्हें कुछ दिन इंतजार करने के लिए कहा गया। इसके बाद उनके चकर लगवाने का दौर शुरू कर दिया गया। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद उन्हें बार-बार चक्कर लगाने के लिए मजबूर कर दिया। इसी बीच किसी ने उन्हें सलाह दी कि इस काम को कराने के लिए वह किसी दलाल की मदद ले सकते हैं। किसी कर्मचारी को इसके लिए 'नजराना' भी पेश किया जा सकता है, लेकिन रमेश सचदेवा इसके लिए तैयार नहीं थे।

आरटीए सचिव के निर्देशों के बाद भी नहीं दिखाई दिलचस्पी

रमेश सचदेवा ने बताया कि उन्हें एनओसी देने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। इस दौरान वह आरटीए सचिव से भी मिले। आरटीए सचिव के निर्देशों के बावजूद एक अधिकारी ने एनओसी बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। वह भी रिश्वत नहीं देने के अपने निर्णय पर कायम रहे। दर्जन बार से भी अधिक चक्कर लगाने के बाद आखिर 28 जनवरी को उन्हें एनओसी दी गई। एनओसी में देरी को लेकर अब रमश सचदेवा ने सीएम दरबार में शिकायत करने का निर्णय लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस विभाग से आए नए आरटीए सचिव गजेंद्र कुमार ने कार्यालय में दलालों के आवागम पर रोक लगाने के आदेश दिए हुए हैं। इसके बावजूद कुछ दलाल खुलेआम अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। इन दलालों की कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ सांठगांठ है। इन दलालों पर रोक नहीं लगने के कारण आरटीए कार्यालय पर लगे भ्रष्टाचार के दाग अभी भी धुल नहीं पाए हैं।

पारदर्शिता लाने में और होगी सख्ती

आरटीए सचिव गजेंद्र कुमार का कहना है उन्होंने कार्यालय के कार्य में पारदर्शिता लाने के पूरे प्रयास किए हैं। इसके बावजूद अगर अनियमितताएं हैं, तो वह और अधिक सख्ती से काम लेंगे।

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