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कॉटन के दाम बढ़ने से लड़खड़ाया टेक्सटाइल उद्योग, प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट में 60 % तक की गिरावट

पानीपत से दुनिया के अधिकार देशों को काटन यार्न से बने टेक्सटाइल उत्पादों का एक्सपोर्ट किया जाता है। अभी जरूरी आर्डर के ही टेक्सटाइल उत्पादों का एक्सपोर्ट किया जा रहा है।

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टेक्सटाइल उद्योग 

विकास चौधरी : पानीपत

भारत में रूई के दाम बढने से काटन यार्न के रेट बढ गए हैं। काटन यार्न के दाम बढने के चलते पानीपत से टेक्सटाइल उत्पादों के निर्यात में 60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। पानीपत से दुनिया के अधिकार देशों को काटन यार्न से बने टेक्सटाइल उत्पादों का एक्सपोर्ट किया जाता है। वहीं पानीपत से जरूरी आर्डर के ही टेक्सटाइल उत्पादों का एक्सपोर्ट किया जा रहा है। पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन ललित गोयल ने बताया कि रूई यानि कपास के दामों में रिकार्ड तोड़ तेजी है। पहली बार रुई का दाम 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा है। रुई महंगी होने से काटन यार्न महंगा हो गया है। काटन यार्न के दाम तेज होने से टेक्सटाइल निर्यात प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि जितना टेक्सटाइल उत्पाद विदेशों को निर्यात किया जाता है उसका 65 प्रतिशत तक काटन यार्न से ही तैयार किया जाता है।

वहीं अमेरिका, काटन यार्न से बने उत्पादों का सबसे बडा ग्राहक है। यूरोप महाद्वीप, अफ्रीका महाद्वीन, एशिया के अधिकार देशों, खाडी देशों, आस्ट्रेलिया महाद्वीप में भी काटन यार्न से बने उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विदेशों में बहुत जरूरी आर्डर का ही माल तैयार कर एक्सपोर्ट किया जा रहा है। वहीं जब तक रूई के दाम कम नहीं होने एक्सपोर्ट प्रभावित रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही रूई के रेट गिरेंगे और काटन यार्न सस्ता हो जाएगा, इसके बाद एक्सपोर्ट ढर्रे पर आ जाएगा। दूसरी ओर, पानीपत कारपेट निर्माता एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष चौ.जितेंद्र मलिक ने बताया कि सरकार ने पहले रुई के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया। उसके बाद अप्रैल में विदेश से कपास मंगवाने के लिए आयात ड्यूटी हटा दी। इसका फायदा भी निर्यातकों को नहीं मिला। यार्न के भाव लगातार बढ़ रहे हैं।

पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रीतम सचदेवा ने बताया कि भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में काटन यार्न के रेट बढे है, ऐसे हालात में विदेशों से भी काटन यार्न का इंपोर्ट नहीं किया जा सकता। इधर, यंग एंटरप्रिन्योर एसोसिएशन के चेयरमैन निर्यातक रमन छाबड़ा ने बताया कि टेक्सटाइल निर्यात कम होने मुख्य कारण काटन यार्न के भाव बढना, कंटेनर के भाव दोबारा बढना है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले अमेरिका के लिए कंटेनर का भाड़ा 2500 डालर था जो अब बढ कर 16000 डालर पर पहुंच चुका है। वहीं पानीपत टेक्सटाइल उत्पादों की विश्व स्तर पर डिमांड कम है। डिमांड कम होने का कारण आयात करने वाले देशों के निजी मसले है। एक्सपोर्टर सुरेश मित्तल ने बताया कि रूस-यूक्त्रेन युद्ध का असर भी टेक्सटाइल उत्पादों के एक्सपोर्ट पर पडा है।

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