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खुद को रामबिलास पासवान का पीए बता नौकरी दिलवाने के नाम पर 28 लाख रुपये हड़पे

सदर पुलिस कैथल ने एफसीआई, पुलिस व अन्य विभागों में सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर 9 व्यक्तियों से साढ़े 28 लाख रुपये हड़पने के आरोप में चार व्यक्तियों के खिलाफ माला दर्ज किया है।

खुद को रामबिलास पासवान का पीए बता नौकरी दिलवाने के नाम पर 28 लाख रुपये हड़पे
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हरिभूमि न्यूज. कैथल

सदर पुलिस कैथल ने एफसीआई, पुलिस व अन्य विभागों में सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर 9 व्यक्तियों से साढ़े 28 लाख रुपये हड़पने के आरोप में चार व्यक्तियों के खिलाफ माला दर्ज किया है। इनमें से एक व्यक्ति स्वयं को पूर्व केंद्रीय मंत्री रामबिलास पासवान का पीए बताता था। पुलिस को दी शिकायत में बरटा गांव के दिलबाग ने आरोप लगाया है कि वह एफसीआई में ठेकेदार के अन्तर्गत प्लेदार का करता था। उसने बताया कि जनकराज निवासी ग्राम गाजूवाला जिला फतेहाबाद तथा ओमबीर निवासी ग्राम सामण जिला रोहतक उसके रिश्तेदार हैं। उन्होंने उसे कहा कि वे युवाओं को एफसीआई में पक्की नौकरी दिलाते हैं।

बाद में उन्होंने उसे निर्दोष से मिलवाया। निर्दोष ने स्वयं को केन्द्रीय खाद्य एंव आपूर्ति नियंत्रक मंत्री भारत सरकार नई दिल्ली रामबिलास पासवान का पीए बताया। इसके बाद उन्हाेंने उसे विनोद भगत निवासी ग्राम भन्तापोकर जिला सिवान, बिहार से मिलवाया। बाद में उसने इन्हें अपने रिश्तेदाराें से भी मिलवाया। जहां उसने 2019 में एफसीआई में नौकरी के लिए 4 लाख 25 हजार दिए तो वहीं उनके रिश्तेदार महाबीर निवासी बरटा से 3 लाख 50 हजार, संदीप निवासी सौंगरी से 2 लाख 50 हजार, मनोज कुमार निवासी नौच से 2 लाख, कल्याण सिंह निवासी बेलरंखा से 3 लाख 50हजार , गुरमेल सिंह निवासी भूलन से 6 लाख 50 हजार एस.आई. रेलवे विभाग में, राहुल निवासी बङौदा से 2 लाख 75 हजार सिपाही हरियाणा पुलिस, अजय निवासी बुढाखेङा से 2 लाख ग्रुप-डी हरियाणा तथा बलिन्द्र निवासी रैवर से 1 लाख 50 हजार ग्रुप-डी हरियाणा में लगवाने के नाम पर ले लिए।

उसने बताया कि आरोपियों ने सुनियोजित तकरीक ने एफसीआई के कर्मचारी होने के फर्जी पहचान पत्र जारी कर दिए लेकिन इनको आज तक किसी भी विभाग में ज्वाईन नही करवाया गया। आरोपियों ने कुछ दिनों बाद एक फर्जी ज्वाइनिंग लैटर तैयार करके 10 मई 2019 को उपरोक्त व्यक्तियों में से महाबीर को भेजा जिसमें इसकी ज्वाइनिंग दिनांक 27 जून 2019 लिखी हुई है। ये फर्जी लैटर सिर्फ उन्हें गुमराह करने के लिए जारी किया। नौकरी न मिलने पर जब उसने व अन्य साथियाें ने अपनी राशि वापिस देने की मांग की तो आरोपियाें ने स्पष्ट इंकार कर दिया तथा जान से मारने की धमकी भी दी। मामले के जांच अधिकारी एएसआई रमेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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