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तहसील कल्याण अधिकारी को चार साल कैद, जानें क्यों

अदालत में चले अभियोग के अनुसार गांव कैमरी निवासी ओमप्रकाश की शिकायत पर 30 मार्च 2017 में विजिलेंस विभाग ने केस दर्ज किया था।शिकायतकर्ता का आरोप था कि विभाग के तहसील अधिकारी राजकुमार ने10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

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हिसार : अनुदान राशि की अदायगी के नाम पर रिश्वत मांगने के मामले में अदालत ने दोषी करार तहसील कल्याण अधिकारी राजकुमार को 4 साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी अधिकारी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसका भुगतान कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि अदालत ने रिश्वत केस में फंसे अधिकारी राजकुमार को 20 जुलाई को दोषी करार दिया था।

अदालत में चले अभियोग के अनुसार गांव कैमरी निवासी ओमप्रकाश की शिकायत पर 30 मार्च 2017 में विजिलेंस विभाग ने केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि 19 मार्च 2016 को उसने अंतरजातीय विवाह किया था। उस समय सरकार की तरफ से अंतरजातीय विवाह करने पर 1 लाख 10 हजार रुपये की अनुदान राशि मिलती थी। उसने कल्याण विभाग के तहसील कार्यालय में आवेदन जमा करवाया था। आवेदन के आधार पर 19 मार्च 2017 को उसके खाते में 51 हजार रुपये की राशि तो आ गई लेकिन बकाया राशि नहीं आई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग के तहसील अधिकारी राजकुमार ने शेष रकम आने की एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इस पर उसने इतनी रकम देने पर असमर्थता जताई। बाद में 5 हजार में सौदा तय हो गया। शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए विजिलेंस विभाग की एक टीम गठित की गई।

शिकायतकर्ता ने फव्वारा चौक पर तहसील अधिकारी को रिश्वत की राशि दी तो इशारा मिलता ही विजिलेंस टीम ने राजकुमार को रिश्वत की राशि सहित दबोच लिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज लिया। इस मामले में अदालत ने मंगलवार को आरोपित राजकुमार को दोषी करार दिया था। अदालत ने बृहस्पतिवार को दोषी अधिकारी को 4 साल कैद व 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

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