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टीन में था पांच लीटर घी, तीन लीटर खराब निकला, वीटा पर 5400 रुपये का जुर्माना

बिना बिल घी बेचने पर दुकानदार पर भी लगाया पांच हजार का जुर्माना, शिकायतकर्ता को तीन हजार कानूनी खर्च भी देना होगा

टीन में था पांच लीटर घी, तीन लीटर खराब निकला, वीटा पर 5400 रुपये का जुर्माना
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हरिभूमि न्यूज:रोहतक

जिला उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक को खराब घी देने के मामले में 5400 रुपये वीटा प्लांट पर जुर्माना लगाया है। पीडि़त पक्ष को वीटा कानूनी खर्च भी देना होगा। साथ ही जिस दुकानदार ने ग्राहक को घी का टीन बेचा था, उस पर भी बिल नहीं देने पर जुमार्ना लगाया गया है। मामले के अनुसार, आयोग में शिकायत में शीतल नगर निवासी दिलबाग सिंह ने बताया कि उन्होंने 3 अक्टूबर 2019 को अनाजमंडी स्थित एक स्टोर के संचालक मंगतराम से वीटा घी का टीन खरीदा था। वह तीन साल से इस दुकान से सामान खरीद रहे हैं।

बिल देने से भी इंकार किया

ग्राहक ने दुकानदार से घी का बिल मांगा तो उसे बिल देने से भी इंकार कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी वीटा प्लांट के अधिकारियों को दी। उन्होंने भी घी का टीन बदलने से इंकार कर दिया। आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए दुकानदार मंगतराम समेत वीटा के अधिकारियों को तलब किया।

वीटा ने नहीं दिया आयोग में जवाब

आयोग ने वीटा के अधिकारियों को नोटिस भेजा, लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान वीटा के अधिकारी आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। जबकि दुकानदार मंगतराम आयोग के समक्ष पेश हुआ। आयोग ने दुकानदार से पूछा कि उन्होंने घी बेचने के दौरान ग्राहक को बिल क्यों नहीं दिया। दुकानदार ने कहा कि उनकी दुुकान से यह सामान नहीं लिया गया और न ही यह आदमी तीन साल से उनकी दुुकान पर आ रहा। वह झूठी शिकायत कर रहा है। इस पर आयोग ने दुकानदार से पूछा कि उन्होंने घटना के दिन क्या-क्या सामान बेचा था, उसकी लिस्ट दी जाए लेकिन दुकानदार यह नहीं बता सका कि उसने तीन अक्टूबर 2019 को क्या-क्या सामान बेचा था। आयोग ने उसे दोषी माना।

बिल न देना गलत : आयोग अध्यक्ष

आयोग के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादयान ने आदेश जारी किए कि ग्राहक द्वारा सामान के साथ बिल मांगने पर भी नहीं देना गलत है। हर ग्राहक को सामान का बिल लेने का अधिकार है। आयोग ने मंगतराम को बिल न देने पर जुमार्ने के तौर पर पांच हजार रुपये पीडि़त को देने के आदेश दिए। इसके साथ ही वीटा प्लांट के अधिकारियों को टीन की कीमत के तौर पर 2400 रुपये और तीन हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर पीडि़त देने होंगे।

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