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फटी-पुरानी किताबों के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं विद्यार्थी, अभी तक सरकारी स्कूलों में नहीं भेजी गई हैं नई किताबें

फटी-पुरानी किताबों के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं विद्यार्थी, अभी तक सरकारी स्कूलों में नहीं भेजी गई हैं नई किताबें
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हांसी: फटी-पुरानी किताबों के साथ पढ़ाई करते बच्चे।

महाबीर यादव, हांसी

प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने को लेकर बड़े बड़े दावे व ऐलान किए जा रहे हैं लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और है। वर्तमान में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए तीन महिने से ज्यादा का समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल पाई है। ऐसे में बच्चों को पुरानी किताबों के सहारे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।

अधिकांश स्कूलों में कोर्स तक शुरू नहीं हुआ। जिम्मेदार अधिकारी राज्य पुस्तक निगम से किताबें देरी से मिलने के साथ जल्द ही वितरण करने की बात कह रहे है। ऐसे में अभी तक कई विद्यार्थियों के पास तो किताबें भी नहीं है। ऐसे में राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 30 जून तक सभी स्कूलों में किताबें पहुंचाने का वादा किया था। इसके लिए गर्मियों की छुट्‌टियों में अध्यापकों को स्कूल खोलने के निर्देश भी दिए गए थे, परंतु अभी तक सरकारी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची है।


बता दें कि राजकीय स्कूलों में पहली से 8 वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग फ्री में किताबें देता है। स्कूल अध्यापकों का कहना है कि 9वीं से बाहरवीं तक सिलेब्स की एनसीईआरटी किताबें भी विद्यार्थियों को बाजार से नहीं मिल रही है, जिससे उनको भी पढ़ाई करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ तो सरकार स्कूलों में एडमिशन बढ़ाने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों के पास किताबें नहीं है। बच्चे मजबूरन पिछली साल के विद्यार्थियों से किताबें लेकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन वे किताबें फटी पुरानी होने की वजह से बच्चे सही तरीके से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। हिसार चुंगी पर स्थित राजकीय स्कूल के मुख्य अध्यापक ने बताया कि अभी तक छठी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों की किताबें नहीं आई है। उन्होंने बताया कि अभी तक केवल 247 किताबें प्राप्त प्राप्त हुई है। उन्हें बताया गया था कि जुलाई तक किताबें आ जाएंगी, परंतु इस महीने के दस दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक किताबें नहीं आई हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा 1 अप्रैल को किताबों के बारे विभाग को लिखा गया था।

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