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खेल नर्सरियां एक साल से बंद, आठ से 19 उम्र के 400 खिलाड़ी कर रहे इंतजार

इस समय ना तो इन खिलाड़ियों को कोच के माध्यम से प्रैक्टिस हो पाई और ना ही इन्हें डाइट के तौर पर मिलने वाली हर माह राशि बैंक खाता में भेजी गई। इस कारण खिलाड़यों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खेल नर्सरियां एक साल से बंद, आठ से 19 उम्र के 400 खिलाड़ी कर रहे इंतजार
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नारनौल : शहर में बना जिलास्तरीय नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम। 

हरिभूमि न्यूज : नारनौल

कोविड-19 का साइड इफैक्ट खिलाडि़यों पर निरंतर पड़ रहा है। खेल विभाग की ओर से खिलाडि़यों की पौध तैयार करने के लिए स्थापित की गई खेल नर्सरियां बीते एक साल से बंद है। इस समय ना तो इन खिलाडि़यों को कोच के माध्यम से प्रैक्टिस हो पाई और ना ही इन्हें डाइट के तौर पर मिलने वाली हर माह राशि बैंक खाता में भेजी गई। ऐसे में इन दिनों जिला में बंद पड़ी 15 खेल नर्सरियां के खुलने का इंतजार करीब 400 खिलाड़ियों को है।

खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से साल-2012 में स्पैट प्रतियोगिता (स्पोर्ट्स एंड फिजीकल एप्टीट्यूड टेस्ट) आरंभ की थी। करीब चार साल बाद इसका नाम बदलकर स्पीड (स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एक्सरसाईजेज इवैलुएशन एंड डेवलपमेंट) प्रतियोगिता कर दिया गया। यह दो आयु वर्ग आठ से 14 साल व 15 से 19 साल की है। पहले स्कूल लेवल, फिर ब्लाक लेकर और तीसरी चरण में जिला स्तर पर सात अलग-अलग खेलों में प्रतिस्पर्धा करवाई जाती है। इसमें 30 मीटर फ्लाइंग, स्टैडिंग ब्रांड जंप, मेडिसन बाल, छह गुणा 10 शटल रन, फार्वड बैड एंड रिच, एसवी जंप व 800 मीटर रेस शामिल है। इन प्रत्येक इवेंट के तीन-तीन नंबर जोड़कर कुल 21 अंक में से नंबर जोड़े जाते है। चयनित होने पर संबंधित खेल की नर्सरी में सुबह शाम खिलाड़ी प्रैक्ट्सि करना और एक माह में कम से कम 22 दिन की हाजिरी होने पर स्कॉलरशिप के तौर पर 1500 व 2000 रुपए मासिक देने की प्रक्रिया है। इसके लिए महेंद्रगढ़ जिला से 400 खिलाडि़यों का चयन मई-2019 में हुआ था। इसके लिए जिला में 15 खेल नर्सरी स्थापित की गई। प्रत्येक एक नर्सरी में करीब 25 खिलाड़ी थे।

जिला में यह 15 खेल नर्सरी बंद

- खेल नर्सरी का स्थान खेल बॉयज/गर्ल्स

- एसडी स्कूल ककराला बॉक्सिंग बॉयज

- राजकीय सी.सै. स्कूल भुंगारका फुटबाल बॉयज

- राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल महेंद्रगढ़ कबड्डी गर्ल्स

- राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल महेंद्रगढ़ एथलेटिक्स बॉयज

- टैगोर स्कूल माजरा खुर्द कबड्डी बॉयज

- एमएलएसडीएवी स्कूल नारनौल तीरंदाजी बॉयज

- नालंदा स्कूल डालनवास हैंडबॉल बॉयज

- राजकीय सी.सै.स्कूल खेड़ी तलवाना फुटबाल बॉयज

- राजकीय सी.सै.स्कूल आजमाबाद मौखूता वॉलीबाल बॉयज

- सरस्वती स्कूल दनचौली कबड्डी बॉयज

- इंडसवैली स्कूल दौगड़ा अहीर कुश्ती बॉयज

- राव प्रहलादसिंह स्कूल खातोद एथलेटिक्स बॉयज

- राव प्रहलादसिंह स्कूल खातोद एथलेटिक्स गर्ल्स

- एसडी स्कूल ककराला वॉलीबाल गर्ल्स

- केएल मैमोरियल स्कूल इस्लामपुरा वॉलीबाल बॉयज

खिलाडि़यों की मांग, जल्द आरंभ हो स्पीड प्रतियोगिता व खेल नर्सरी

स्पीड प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का इंतजार कर रहे खिलाडि़यों की मांग है कि खेल विभाग एक साल से बंद खेल नर्सरियों को आरंभ करवाएं। साथ ही स्पीड प्रतियोगिता का शेड्यूल जारी करें ताकि खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेकर कोच के माध्यम से ओर बेहतर तैयारी कर सके।

खेल विभाग के महज आठ कोच : तैराक के लिए पुल तैयार पर कोच नहीं

खेल विभाग के मुताबिक जिला में इस समय आठ कोच है। इनमें हैंडबाल कोच गांव खुडाना के सरकारी स्कूल मैदान में खिलाडि़यों को गेम सीखा रहे है। दो वॉलीबाल कोच है। इनमें एक धानौता में कार्यरत है। तीन दिन धौलेड़ा स्टेडियम में भी ड्यूटी है। दूसरे कोच नरेशपाल की ड्यूटी नारनौल के नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम में है। एक जूडो कोच एसडी ककराला में है। तीरंदाजी कोच नारनौल के ही नेताजी सुभाषचंद बोस स्टेडियम में बच्चों को सुबह-शाम अभ्यास करवा रहे हैं। एक कुश्ती कोच खोड अखाड़ा में कार्यरत है। बुधवार व गुरुवार दो दिन कोच महेंद्रगढ़ स्टेडियम में ड्यूटी निभाते है। एक बॉक्सिंग कोच एमडी सतनाली में हैं। वह दो दिन शुक्र व शनिवार को महेंद्रगढ़ स्टेडियम में कार्यरत हैं। एक एथलेक्टिस कोच अधिकारियों की मंजूरी के बाद इन दिनों ओलिम्पक की तैयारी में रेवाड़ी स्टेडियम में प्रैक्टिस में जुटा है। महेंद्रगढ़ स्टेडियम में तैराक के लिए पुल तैयार है बावजूद अभी तक कोई कोच नहीं मिल पाया है। यहीं नहीं, जिला में आठ कोच की संख्या ना के बराबर है।

क्या कहते है डीएसओ

जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी परस राम ने बताया कि कोविड-19 के चलते खेल नर्सरियां बंद है। उच्चाधिकारियों की ओर से जैसे ही इन्हें खोलने के निर्देश मिलेंगे खोल दी जाएगी। कम कोच की जहां तक बात है, इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। स्टेडियम को नया रूप देने के प्रयास किए जा रहे है।

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