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सोनीपत के उद्योगों की कमर टूटी करीब 4500 करोड़ का लगा फटका

कोविड-19 के कारण लॉकडाउन (Lockdown) ने करीब दो माह से बंद पड़ इंडस्ट्रीज की कमर तोड़कर रख दी है। उद्योगपतियों का कहना है कि अगर सरकार टैक्स फ्री सहित कई विषयों में रियायतें देती है तो छह माह बाद उद्योग फिर से रफ्तार पकड़ लेगा।

सोनीपत के उद्योगों की कमर टूटी करीब 4500 करोड़ का लगा फटका
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विष्णु कुमार : सोनीपत

कोविड-19 (COVID-19) के कारण लॉकडाउन ने करीब दो माह से बंद पड़ इंडस्ट्रीज(Industries) की कमर तोड़कर रख दी है। अनलॉक-1 में सरकार ने शर्तों के साथ फैक्ट्री खोलने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन सरकार द्वारा दी गई शर्तों के साथ फैक्ट्री खोल पाना उद्योगपतियों(Industrialists) को मुश्किल लग रहा है।

जिन उद्योगपतियों ने सीमित वर्कर्स के साथ फैक्ट्री खोली है, उनके सामने वर्कर्स की जरूरतों को पूरा करना और उन्हें महामारी से बचाते हुए सुरक्षित रख पाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मार्जिन की आस छोड़ व्यापारी काम को पटरी पर लाने की कोशिशों में जुटा है। अगर कोरोना को काबू कर लिया जाता है, तब भी बड़ी, कुंडली व राई स्थित इंडस्ट्रीज को उतरने में करीब छह माह का समय लग जाएगा। उद्योगपतियों का कहना है कि अगर सरकार मूलभूत सुविधाओं के साथ रॉ मेटेरियल व बाहर से आने वाली मशीनों, डाइयों को टैक्स फ्री कर दें तो इंडस्ट्रीज रफ्तार पकड़ लेंगी।

सभी देशों में एक्सपोर्ट होता है यहां का माल

सोनीपत की बड़ी, राई व कुंडली स्थित इंडस्ट्रीज लंबे समय से विदेशों में अपना नाम बनाए हुए है। कुंडली इंडस्ट्रीज एरिया में करीब 1500 मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट हैं। लॉकडाउन से पहले यहां करीब 80 हजार कर्मचारी काम करते थे, लेकिन वर्तमान समय में केवल 15 हजार कर्मचारी ही रह गए हैं। यहां बर्तन, प्लास्टिक सामान, गारमेंट्स, ऑटो पार्टस, साइकिलें, मशीनरी, हाउस होल्ड आइटम के अलावा अन्य सामान बनता है। जिसे देश ही नहीं विश्व के अधिकतर देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है। यहां सालान करीब दो हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसी प्रकार राई में करीब 1500 व बड़ी इंडस्ट्रीज एरिया में एक हजार मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट हैं। यहां भी क्रमश: 1500 व 1000 करोड़ रुपये का सालान व्यापार होता है। यहां बनने वाला सामान भी विदेशों में एक्सपोर्ट होता है, परंतु लॉकडाउन के बाद से सब बंद पड़ा है।

नॉथ की सबसे बड़ी फूड इंडस्ट्री, ठप है काम

राई इंडस्ट्रीयल एरिया में नॉर्थ इंडिया की सबसे बड़ी फूड इंडस्ट्री है, यहां से देश-विदेशों में माल एक्सपोर्ट किया जाता है। कोविड-19 के कारण यहां काम ठप हो चुका है। इसके अलावा क्षेत्र में पैकिंग, प्रिंटिंग, ऑटोमोबाइल, गारमेंट्स के अलावा अन्य सामान बनता है और देश के सभी हिस्सों के साथ ही विदेशों में भी भेजा जाता है। लॉकडाउन के बाद से काम पूरी तरह प्रभावित है। अनलॉक में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में काम तो शुरू हो गया, लेकिन वर्कर्स के अभाव में अभी काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। हालांकि काम शुरू होने से उद्योगपतियों ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली है।

रॉ मेटेरियल को ट्रैक्स फ्री करें

इन्फ्रास्ट्रक्चर की सभी मुलभूत सुविधाएं सरकार के हाथ में हैं। उद्योगपतियों को अनइन्ट्रप्टेड बिजली दें। जितनी भी मशीनें, डाइयां व रॉ मेटेरियल बाहर से आता है, उसे ट्रैक्स फ्री कर दें। ताकि वो सस्ता पड़े और उससे माल बनाकर बाहर भेजें। मोदी जी जो लोकल और वोकल की बात करते हैं, यह तब संभव है, जब उद्योगपतियों को इम्पोर्ट अलॉऊ कर दिया जाए। आज हम कोई चीज बनाना चाहते हैं, उसकी डाई यहां बन नहीं पाती, मैं बाहर से मंगाना चाहता हूं। उसके ऊपर ड्यूटी लगाना गलत है। क्योंकि मैं उसको अपने कंजप्शन के लिए नहीं ले रहा। मैं उससे माल बनाकर बाहर ड्टोजूंगा, तब आपको रेवन्यू आ जाएगा। बना हुआ माल बाहर ड्टोजना बेहतर है... रॉ मेटेरियल तो अलाऊ करो। जिन चीजों से निर्माण होता हो, उन्हें ड्यूटी फ्री कर दें और इधर इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा कर दंे। चाइना को तो बहुत पीछे छोड़ देंगे।- सुभाष गुप्ता, प्रधान, कुंडली इंडस्टि्रयल एरिया, सोनीपत

संभलने में लगेंगे छह महीने

राई इंडस्ट्रीयल एरिया में करीब दो हजार मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट हैं। लॉकडाउन के बाद से पड़ी फैक्ट्रियाें को अनलॉक-1 में खोलने की अनुमती मिली है। महज 20 से 25 प्रतिशत वर्कर्स के साथ काम तो शुरू हो गया, लेकिन मार्केट बंद होने के कारण माल नहीं बिक रहा। वर्कर्स पर एक्स्ट्रा खर्च बढ़ चुका है। इस समय मार्जिन का हिसाब नहीं लगा रहे, बस आस है कि किसी प्रकार काम चल पड़े। अगर कोरोना कंट्रोल में आ गया तो काम चल पड़ेगा व डिमांड बढ जाएगी। वर्कर्स प्रोडक्शन कम होगी तो डिमांड भी ज्यादा लगेगी। अगर कोरोना वायरस खत्म हो जाए, तभी भी इंडस्ट्रीज को संभलने में करीब छह माह का समय लग जाएगा। इस संकटकाल की स्थिति को देखत हुए सरकार को चाहिए कि हुए मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाएं, तभी व्यापारी काम को पटरी पर वापस ला पाएंगे। -राकेश देवगन, प्रधान, राई इंडस्टि्रयल एरिया, सोनीपत

मार्केट बंद, नहीं बिक रहा माल

बड़ी इंडस्टि्रयल एरिया में करीब एक हजार मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट हैं। लॉकडाउन से पहले इनमें करीब छह हजार वर्कर्स काम करते थे। वर्तमान समय में केवल एक हजार वर्कर्स से ही काम लिया जा रहा है। कच्चा माल मिल नहीं रहा। जो माल बना रहे हैं, मार्केट बंद होने के कारण वह बिक नहीं रहा। यहां का पूरा व्यापार दिल्ली पर डिपेंड हैं। दिल्ली की सीमाएं कभी खोल देते हैं, कभी बंद कर देते हैं। जिससे माल भी नहीं मिल पा रहा। कुंडली, राई व बड़ी में ज्यादातर व्यापारी दिल्ली में निवास करता है। जब तक व्यापारी नहीं आ पाएगा। तब तक काम नहीं चल पाएगा। लॉकडाउन के बाद से 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। बहुत सा माल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। फैक्ट्री खोलने के लिए सरकार ने जो नियम लागू किए हैं, उन्हें अधिकतर व्यापारी फोलो नहीं कर सकते। यही कारण है कि छूट के बाद भी अनेक फैक्ट्रियों में काम शुरू नहीं हो पाया है। -शमशेर शर्मा, प्रधान, बड़ी इंडस्टि्रयल एरिया, सोनीपत

उद्योगपतियों के सामने ये चुनौतियां

< फैक्ट्रिरयों को नहीं मिल रही लेबर, काम हो रहा प्रभावित।

< मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को नहीं मिल रहे ऑर्डर।

< लॉकडाउन के कारण नहीं मिल पा रहा रॉ मैटेरियल।

< बैंक भी नहीं कर रहे सपोर्ट। लिमिट पर बढ़ता जा रहा है ब्याज।

< पैसा की उधार फंस चुकी है, पैसों का रोटेशन भी थमा हुआ है। रिकवरी करना बड़ा चैलेंज है।

< बिजली निगम ने बंद पड़ी फैक्ट्रियों को एवरेज के हिसाब से दिया भारी-भरकम बिल, अब भरने का डाल रहे दबाव।

< अनलॉक-1 में फैक्टरियां तो खुल गई, लेकिन एक्स्ट्रा खर्च बहुत अधिक बढ़ गया है, जिसे संभालना बेहद मुश्किल हो गया है।

< वर्कर्स को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती, अंदर ही मुहैया करवा रहे है सारा सामान।

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