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योगेश कुमार गोयल का लेख: कोविड-19 में साबुन की उपयोगिता

बेहद जरूरी है कि जब भी किसी कार्यवश घर से बाहर निकलें तो अपने हाथों को सेनिटाइज करते रहें और घर में रहें तो साबुन से हाथ धोते रहें।

योगेश कुमार गोयल का लेख: कोविड-19 में साबुन की उपयोगिता
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विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कुछ माह पूर्व कोरोना को वैश्विक महामारी घोषित किए जाने के बाद से ही इस संक्रमण से बचने के लिए लोगों को लगातार साबुन से हाथ धोने की सलाह दी जा रही है। साबुन इसके लिए सबसे सस्ता, सुलभ और सुरक्षित उपाय माना गया है। आस्ट्रेलिया की साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के प्रोफेसर पाल थॉर्डर्सन का कहना है कि अगर कोरोना को हराना है तो इस समय साबुन से बेहतर कोई विकल्प मौजूद नहीं है। अन्य शोधकर्ताओं का भी एक स्वर में यही कहना है कि कोरोना के कहर से बचने का सबसे आसान उपाय यही है कि बार-बार अपने हाथों को साबुन से धोते रहें। अगर साबुन और पानी उपलब्ध नहीं हो तो कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अल्कोहल युक्त हैंड सेनिटाइजर का उपयोग अनिवार्य है। देशभर में अब लॉकडाउन में काफी छूट मिलने के बाद सभी प्रकार की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं और ऐसे में कोरोना से बचे रहने के हरसंभव उपाय करना बेहद जरूरी हो गया है। दरअसल घर से बाहर निकलकर आप न जाने कब कोरोना संक्रमित किसी वस्तु या सतह के संपर्क में आ जाएं। इसलिए बेहद जरूरी है कि जब भी किसी कार्यवश घर से बाहर निकलें तो अपने हाथों को सेनिटाइज करते रहें और घर में रहें तो साबुन से हाथ धोते रहें।

तमाम विशेषज्ञों द्वारा कोरोना संक्रमण से बचने के लिए साबुन से हाथ धोना इसलिए जरूरी बताया जाता रहा है क्योंकि कोरोना वायरस मुंह, नाक तथा आंखों के जरिये ही मानव शरीर में प्रवेश करता है और प्रायः प्रत्येक व्यक्ति के हाथ जाने-अनजाने ही शरीर के इन अंगों को स्पर्श करते रहते हैं। अगर हम किसी भी संक्रमित वस्तु या सतह को छूते हैं तो कोरोना वायरस हमारे हाथों की त्वचा पर चिपक जाता है और हाथों की पर्याप्त सफाई के अभाव में हम आसानी से कोरोना के शिकार हो सकते हैं। इसलिए यदि हाथ बार-बार साबुन से धोए जाते रहें तो हाथों के स्पर्श से इन शारीरिक अंगों तक कोरोना वायरस नहीं पहुंचेगा। अब प्रश्न यह है कि कोरोना जहां पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी पहेली और चुनौती बना हुआ है, जिसकी अब तक कहीं कोई दवा उपलब्ध नहीं है, ऐसे में इस अदृश्य खतरे से निपटने में साबुन कितना कारगर है? इस सवाल का जवाब जानने से पहले कोरोना की शारीरिक संरचना को जानना बहुत जरूरी है।

अन्य वायरसों की भांति कोरोना का आकार भी 50 से 200 नैनोमीटर के बीच ही होता है। कोरोना सहित अधिकांश वायरस तीन घटकों आरएनए, प्रोटीन तथा लिपिड से मिलकर ब्लॉक्स के रूप में बने होते हैं लेकिन इन तीनों का आपस में जुड़ाव बहुत ही कमजोर होता है। तीनों को आपस में जोड़े रखने में लिपिड की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इसी लिपिड के कारण वायरस का बाहरी हिस्सा सबसे कमजोर रहता है। दुनिया की नाक में दम करने वाले कोरोना जैसे बेहद खतरनाक वायरस की आपसी संरचना भी इसीलिए बहुत कमजोर है। इसी कारण ऐसे वायरस को नष्ट करने के लिए किसी ज्यादा शक्तिशाली रसायन की जरूरत नहीं होती। कोरोना वायरस की ऊपरी लेयर फैट से बनी होती है, जो सबसे कमजोर परत है। यही परत वायरस के पूरे ढ़ांचे को बांधे रखती है। वायरस की इसी ऊपरी परत में प्रोटीन भी होता है, जो जेनेटिक मेटेरियल को अंदर से पकड़कर रखता है। केवल पानी का उपयोग इस फैटी लेयर को नहीं तोड़ सकता।

कोरोना वायरस के खात्मे के लिए साबुन का इस्तेमाल सबसे ज्यादा प्रभावी इसलिए माना गया है क्योंकि साबुन में पानी और फैट दोनों को खींचने के गुण होते हैं, जिससे साबुन के झाग फैटी लेयर से चिपक जाते हैं और इस परत को तोड़ देते हैं। ऐसा होने पर वायरस का पूरा ढांचा टूट जाता है और वायरस खत्म हो जाता है। साबुन में ऐसा गुण होता है, जो किसी भी वसा को काट देता है। ऐसे में जब हाथों में साबुन का झाग बनता है तो वह बड़ी आसानी से वायरस का सफाया कर देता है। साबुन में फैटी एसिड और सॉल्ट जैसे तत्व होते हैं, जिन्हें एम्फिफाइल्स कहा जाता है। साबुन में छिपे यही तत्व वायरस की बाहरी परत को निष्कि्रय कर देते हैं। करीब बीस सेकेंड तक हाथ धोने से वायरस को एक साथ जोड़कर रखने का कार्य करने वाला चिपचिपा पदार्थ नष्ट हो जाता है। इसीलिए कोरोना से बचने के लिए साबुन से कम से कम बीस सेकेंड तक सही प्रकार से हाथ धोने की सलाह दी जाती है। यह इसलिए जरूरी है कि अगर हाथों के किसी भी हिस्से में कोरोना वायरस चिपका हो तो साबुन का झाग वहां तक पहुंच सके और वायरस बिखरकर खत्म हो जाए। साबुन और पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करने से कोरोना से बचा जा सकता है, इसके लिए किसी विशेष साबुन, सेनिटाइजर अथवा एंटी बैक्टीरियल एजेंट की कोई आवश्यकता नहीं है। साबुन में डेटोल इत्यादि एंटी बैक्टीरियल पदार्थ डालने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि एक साधारण साबुन का झाग भी कोरोना का सफाया करने के लिए पर्याप्त है। साबुन प्रायः गरीब व्यक्ति की भी पहुंच में होता है, इसीलिए इसे कोरोना संक्रमण से बचाव का सबसे सस्ता और प्रभावकारी उपाय माना गया है।

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