Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

तिलियार झील से उड़ान नहीं भर पाया सीप्लेन, अब मोटर-बोट चलाने की तैयारी

तय शर्तों के मुताबिक यहां मोटर बोट की योजना सफल हो जाती है तो फिर झील में डल झील कश्मीर की तर्ज पर प्रेमी युगलों के लिए शिकारे के प्रबंधन किए जाएंगे।

दिल्ली बनेगी झीलों की नगरी, द्वारका में 7 एकड़ की एक नई झील हुई तैयार
X

दिल्ली बनेगी झीलों की नगरी

अमरजीत एस गिल : रोहतक

तिलियार झील से सीप्लेन उड़ान नहीं भर पाया है। इसकी सम्भावनाएं तलाशने के लिए बीते बुधवार को अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल झील पर पहुंचे थे, लेकिन अतिरिक्त उपायुक्त को यहां एक भी सम्भावना ऐसी नजर नहीं आई कि झील में सीप्लेन की लैंडिंग और टेकऑफ हो सके।

अब सरकार इसमें मोटर बोट चलाने की तैयारी कर रही है। 26 मार्च को खुलेगी बोली। तय शर्तों के मुताबिक यहां मोटर बोट की योजना सफल हो जाती है तो फिर झील में डल झील कश्मीर की तर्ज पर प्रेमी युगलों के लिए शिकारे के प्रबंधन किए जाएंगे।

ये था प्लान : केवड़िया गुजराज में जहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बना हुआ है कि तर्ज पर रोहतक की तिलियार झील से केंद्र सरकार उड़े देश का आम नागरिक योजना के तहत सी-प्लेन की उड़ान भरवाना चाहती थी। इसको लेकर बीते सप्ताह प्रशासन को नागरिक उडयन मंत्रालय की तरफ से पत्र आया था। इस पत्र पर कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त तिलियार झील पर सम्भावनाएं तलाशने के लिए गए थे। लेकिन सम्भावना नहीं मिली। केंद्र सरकार ने कहा था कि प्लेन के लेंडिंग ऑफ टेकऑफ के लिए 1100 मीटर लम्बे रनवे हो, पानी की गहराई कम से कम डेढ़ मीटर जरूरी। ये दोनों शर्ते झील पूरी नहीं कर रही है। इसके अलावा झील के जंगल में रहने वाली वन्य प्राणी भी आड़े आ गए। क्योंकि प्लेन जब उड़ान भरता तो तेज शोर करता है। ऐसा शोर वन्य प्राणी के जीवन में बड़ी बाधा डालता है। इन तीन कारणों के चलते योजना को सिरे नहीं चढ़ाया जा सकता है।

सी प्लेन के बारे में जानें : केंद्र सरकार की देश में कम से कम 100 सी-प्लेन से सेवा शुरू करने की योजना है। शुरुआती दौर में देश की करीब 111 नदियों का हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है। सरकार की समंद्र से सटी करीब 11 हजार किमी सीमाओं से हवाई सफर शुरू करने की तैयारी है। सीप्लेन एक तरह का हवाई जहाज होता है, जिसे उड़ान भरने के लिए रनवे की जरूरत नहीं होती। यह जहाज पानी से भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है। मालूम हो कि अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट से केवड़िया गुजरात के लिए सीप्लेन की सेवाएं गत वर्ष शुरू हुई थी।

टापूओं पर मिलेगा खाने-पीने का सामान : 22 एकड़ की झील में चार टापू हैं। इस समय ये चमगादड़ों के प्राकृतिक आवास हैं। इनको भी विकसित करवाए जाना है। इन पर कैफेटेरिया खोले जाएंगे। ताकि मोटर बोट में सवार होकर पर्यटक इन तक पहुंचे तो उन्हें यहां खाने-पीने की चीजें मिलें। मालूम हो कि वर्ष 1974 में झील अस्तित्व में आयी थी, लेकिन इसका अभी तक वह विकास नहीं हो पाया, जो होना चाहिए था। झील परिसर में ही मिनी जू भी है। अब इसे भी वन्य प्राणी विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है। ताकि पर्यटकों की संख्या और बढ़े।

दस साल का होगा ठेका : तिलियार झील पर पेडल बोटिंग और चप्पू बोटिंग के लिए सरकार ने फर्म को दो साल का ठेका दिया था। ठेके की अवधि 31 मार्च को खत्म होने जा रही है। अब पर्यटन निगम झील को विकसित करना चाहता है। क्योंकि राष्ट्रीय क्षेत्र में होने की वजह से यहां पर्यटकों का आना होता है। सरकार की सोच है कि झील को विकसित करने के लिए ठेके की अवधि कम से कम दस साल हो। इस समय ठेका अवधि दो साल है। जिसकी वजह से कोई भी फर्म ज्यादा पैसा लगाने का जोखिम नहीं लेती। लम्बा मिलने पर ही फर्म पैसा लगाने को तैयार हो सकती है। जिस भी फर्म को काम अलॉट होगा। उसे योजना के प्रथम चरण में 2 मोटर बोट और दो वाटर स्कूटर राइडर की व्यवस्था पर्यटकों के लिए करनी होगी। अगर यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता है ताे फिर यहां शिकारे के प्रबंधन भी फर्म से करवाए जाएंगे। ताकि प्रेमी युगलों को प्रकृति के बीच शिकारे में सुकून मिले। मालूम हाे कि पिछले दिनों पर्यटन निगम के एमडी रामस्वरूप वर्मा ने तिलियार पर्यटन केंद्र का निरीक्षण करके इसे विकसित करने की सम्भावनाएं तलाशी थी।

पर्यटकों को सुविधाएं मिलें

सरकार झील को विकसित करना चाहती है। पर्यटकों को सुविधाएं मिलें। इसके लिए 26 मार्च को खुली बोली होंगी। अब ठेका दो साल की बजाय दस साल का दिया जाएगा। - प्रताप कौशिक, प्रबंधक तिलियार पर्यटन केंद

Next Story