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इन गलतियों से फेल होती है रिटायरमेंट की प्लानिंग

ज्यादातर लोग चैन की जिंदगी बिताने के लिए जल्द रिटायर होने का सपना देखने लगते हैं, लेकिन इसमें बहुत कम लोगों को ही सफलता मिलती है। यहां आपको उन बातों के बारे में जानकारी दी जा रही है जो किसी की भी इन्वेसटमेंट प्लानिंग को फेल कर देती हैं। इसलिए यदि ध्यान रखा जाए तो आप अपना रिटायरमेंट अच्छे से प्लान कर सकते हैं।

Investment
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Investment ( प्रतीकात्मक फोटो)

शंभू भद्रा : रोहतक

वित्त वर्ष 2021-22 शुरू हो गया है। कारोना के साये में यह वित्त वर्ष भी रहने वाला है। इसलिए अगर टैक्स बचत के मकसद से या भविष्य को सेफ करने के मकसद से वित्त वर्ष के शुरू में ही आप रिटायरमेंट प्लाप्के लिए इन्वेस्टमेंट करने की सोच रहे हैं तो यह जरूरी है कि पहले कुछ बातों को जान लें। ज्यादातर लोग चैन की जिंदगी बिताने के लिए जल्द रिटायर होने का सपना देखने लगते हैं, लेकिन इसमें बहुत कम लोगों को ही सफलता मिलती है। यहां आपको उन बातों के बारे में जानकारी दी जा रही है जो किसी की भी इन्वेसटमेंट प्लानिंग को फेल कर देती हैं। इसलिए यदि ध्यान रखा जाए तो आप अपना रिटायरमेंट अच्छे से प्लान कर सकते हैं।

प्लानिंग से बचत नहीं

लोगों को हर महीने इनकम में से 10-15 प्रतिशत रिटायरमेंट के लिए बचाना चाहिए। अगर आप 60 वर्ष की आयु में रिटायर होना चाहते हैं और बड़ा फंड चाहते हैं तो यह रकम ठीक होगी। हालांकि, अगर आप 50 साल की आयु में काम छोड़ना चाहते हैं तो 25-30 सालों के लिए चलने वाले और बड़े फंड की जरूरत होगी। इसका मतलब है कि आपको रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अपनी इनकम में से ज्यादा रकम बचानी होगी। प्लानिंग के मुताबिक बचत नहीं करने से रिटायरमेंट प्लान फुस्स हो जाता है।

सही जगह पर बचत नहीं

रिटायरमेंट के लिए सेविंग करने वालों के सामने सेफ्टी एक बड़ी चिंता होती है। लेकिन, अगर आप बहुत ज्यादा सावधानी से चलेंगे तो मुश्किल हो सकती है। एक 100 प्रतिशत डेट बेस्ड रिटायरमेंट प्लान जरूरी रेट पर नहीं ग्रोथ करेगा और 50 वर्ष की उम्र में इनवेस्टर को इससे परेशानी होगी।

स्टॉक्स में निवेश की अनदेखी

हम इक्विटी में एक्सपोजर की बात नहीं कर रहे, क्योंकि स्टॉक्स बहुत ज्यादा रिस्की हो सकते हैं, लेकिन रिटायरमेंट पोर्टफोलियो का कम से कम 25-30 प्रतिशत इनफ्लेशन को पीछे छोड़ने के लिए शेयरों में लगाना होगा। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर इस एक्सपोजर को कम किया जा सकता है। अगर आप 50 वर्ष की आयु में भी काम करना बंद करते हैं तो इक्विटी एक्सपोजर 10 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।

शॉट टाइम म्युचुअल फंड

निवेश के लिए अनुशासन की जरूरत होती है। यह सिर्फ 6-8 महीनों के लिए नहीं, बल्कि वर्षों के लिए होना चाहिए। जो निवेशक 5 महीनों के लिए एक म्यूचुअल फंड में पैसा लगाता है और फिर 3 एसआईपी चूक जाता है तो वह जल्द रिटायरमेंट लेने के अपने सपने को अलविदा कह सकता है। इसी वजह से प्रोविडेंट फंड में जरूरी निवेश लॉन्ग-टर्म सेविंग के लिए बेहतर तरीका माना जाता है।

जॉब चेंज पर पीएफ निकालना

हर बार नौकरी बदलते समय आपके रिटायरमेंट प्लान का पटरी के उतरने का खतरा रहता है, क्योंकि आपके पास प्रोविडेंट फंड अकाउंट से रकम निकालने या उसे नए एंप्लायर के पास ट्रांसफर कराने का विकल्प होता है। युवा अक्सर नौकरी बदलने पर इस रकम को निकाल लेते हैं और यह गैर-जरूरी खर्चों के लिए इस्तेमाल हो जाती है। रिटायरमेंट सेविंग्स को इस्तेमाल अन्य खर्चों के लिए करना आपकी भविष्य की फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी के लिए ठीक नहीं होता।

गलत कैलकुलेशन

अगर आप अपनी जरूरतों का गलत कैलकुलेशन करते हैं तो रिटायरमेंट टारगेट को चूक सकते हैं। बहुत से लोग रिटायरमेंट की जरूरतों के कैलकुलेशन के समय इनफ्लेशन को ध्यान में नहीं रखते। अगर आपकी उम्र 30 वर्ष की है और आपके मासिक खर्च 75,000 रुपये तो 8 प्रतिशत की इनफ्लेशन आपके 50 वर्ष का होने पर इस खर्च को बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये कर देगी। रिटायरमेंट का टागरेट बनाते समय 8 प्रतिशत के लॉन्ग-टर्म इनफ्लेशन रेट को ध्यान में रखें।

एसआईपी सही तरीका

एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) निवेश का एक अच्छा विकल्प है। एसआईपी के जरिए पैसे बनाने के लिए आपको एसआईपी को आदत बनानी होगी। एक लक्ष्य बना कर ही एसआईपी के जरिए निवेश किया जाना चाहिए। एफडी करते समय हमें अपने लक्ष्य और एफडी के मैच्योर होने के समय को ध्यान में रखना चाहिए। हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एफडी उस समय मैच्योर हो जब पैसों की जरूरत हो।

निवेश को आदत बनाएं

फाइनेंशियल लिट्रेसी से वित्तीय फैसले लेने में मदद मिलती है। आय से ज्यादा ये जानना जरूरी होता है कि बचत कितनी हुई। बचत की शुरूआत जितनी जल्दी कर दी जाए फायदा उतना ही ज्यादा होगा। निवेश की शुरूआत छोटी रकम से किया अच्छा होता है। आगे चलकर कंपाउंडिंग से आपके पैसे में बढ़त होती है। हमें निवेश करते समय पर्सनल फाइनेंस के हर टर्म के बारे में पता करना चाहिए। एक बात याद रखें ज्यादा रिटर्न में हमेशा रिस्क होता है। पैसे बनाने के लिए हमें निवेश की आदत को बनाए रखना चाहिए।

इसलिए जरूरी है वित्तीय साक्षरता

इसलिए सही निवेश का लाभ लेने के लिए जरूरी है व्यक्ति के पास फाइनेंशियल लिट्रेसी (वित्तीय साक्षरता) हो। फाइनेंशियल लिट्रेसी के चार मुख्य अंग होते हैं। जिसमें डीमैट अकाउंट खोलने के मकसद, साथ ही शेयर पोर्टफोलियो में कितनी जगह ले सकते हैं। एसआईपी के जरिए निवेश करने में क्या है समझदारी और बैंक एफडी के क्या हैं फायदे। फाइनेंशियल लिट्रेसी की शुरूआत बचपन से ही की जानी चाहिए। बच्चे को पहली बार मॉल ले जाने के एक दिन पहले उनको बता दें कि कल हम मॉल जाएंगे और वहां हमें कैसे पैसे खर्च करने हैं। बच्चों को खर्च के अलावा बचपन से ही बचत की जानकारी देनी भी जरूरी होती है।

बजट का रखें ध्यान

अपने परिवार के बजट की निगरानी करना भी जरूरी होता है। हमें युवाओं को बैंक अकाउंट और निवेश के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए। डीमैट अकाउंट के जरिए ही निवेश की सुविधा मिलती है। आने वाले समय में डीमैट अकाउंट काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा, क्योंकि किसी व्यक्ति के सभी एसेट और लायबिलिटीज की जानकारी डीमैट अकाउंट में होगी। अगर आपके पास समय और जानकारी हो तभी शेयर बाजार में निवेश करें। कम जानकारी और समय के अभाव वाले निवेशक म्युचुअल फंड के जरिए शेयर बाजार में निवेश का रास्ता अपनाएं। शेयर में निवेश करने के बाद संबंधित कंपनी के तिमाही, वार्षिक रिपोर्ट जरूर देखें।

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