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Ravana Dahan : हर साल जलता है रावण, फिर भी सुरक्षित नहीं सीता मैया

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो ( एनसीआरबी ) के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष देशभर में रोजाना औसतन 77 मामलों के साथ दुष्कर्म के कुल 28 हजार 46 मामले दर्ज हुए। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध में नहीं आ रही कमी, आत्ममंथन करने और कठोर निर्णय लेने की जरूरत।

Ravana Dahan : हर साल जलता है रावण, फिर भी सुरक्षित नहीं सीता मैया
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प्रतीकात्मक तस्वीर

रवींद्र राठी. बहादुरगढ़

कागज और लकड़ी से बने रावण के पुतले का हर साल दहन होता है, लेकिन कटु सत्य है कि सीता मैया अब तक सुरक्षित नहीं हैैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो ( एनसीआरबी ) के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष देशभर में रोजाना औसतन 77 मामलों के साथ दुष्कर्म के कुल 28 हजार 46 मामले दर्ज हुए। इनमें 28 हजार 153 पीड़िताओं में से 2 हजार 655 बच्चियां 18 साल से कम उम्र की थीं। जबकि 2019 में 32 हजार 33 मामले, 2018 में 33 हजार 356 मामले और 2017 में 32 हजार 559 मामले दर्ज किए गए थे।

बेशक भगवान श्रीराम द्वारा त्रेता युग में रावण का वध करने के बाद से आज तक हम विजयदशमी पर प्रत्येक वर्ष रावण दहन की परंपरा का निर्वाह करते हैं। लेकिन आसुरी शक्तियों का विनाश अब तक नहीं हो पाया है। शाम ढलने के बाद बेटी घर आई या नहीं, यह तो हम देखते हैं, पर बेटा कहां शाम गुलजार कर रहा है। अधिकतर हम इससे अनभिज्ञ ही रहते हैं। सही विजयदशमी तभी होगी, जब दहलीज के भीतर और बाहर, दोनों जगह सीता महफूज रहें। ऐसे में दरकार है कि हम अपने अंदर के दशानन की पहचान करें, आत्ममंथन करें और हमारे मन के किसी कोने में छिपे रावण का वध करें।

सर्वजातीय सर्वखाप महिला महापंचायत की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया के अनुसार हजारों साल पहले सीता मैया के अपहरण के लिए रावण का वध किए जाने पर भी असुरी शक्तियों ने सबक नहीं लिया। आधी आबादी के लिए वर्तमान समाज बिल्कुल सुरक्षित नहीं दिखता। कागज-काठ के पुतले तो हम हर साल जलाते हैं, पर अपने भीतर के राक्षस को खुद ही पोषित करते रहते हैं। इस विजयदशमी पर अपने भीतर की बुराई का समूल नाश करने का प्रयास कीजिए, मन मंदिर में राम विराजेंगे।

भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष डॉ. नीना राठी के अनुसार विजयदशमी एक शुभ अवसर है, जब हम राम को याद करते हुए सामाजिक समरसता के लिए पहल करते हैं। कोई भी देश महिलाओं के प्रति संवेदनशील हुए बिना प्रगति नहीं कर सकता। जब तक महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे। अपराधियों के खिलाफ तत्परता से कार्रवाई कर महिलाओं, बालिकाओं और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

पर्वतीय इलाकों में चिकित्सा सेवाएं दे रही डॉ. अनीता भारद्वाज के अनुसार दहलीज के बाहर ही नहीं, भीतर भी यही हाल है। रिश्ते भी कलंकित हो रहे हैैं। यह भी एक गंभीर मसला है। बेटियों की सुरक्षा को नजरअंदाज करके कोई भी प्रदेश वास्तविक उन्नति नहीं कर सकता। समाज में इसी तेजी से अपराध बढ़ते रहे, तो उन्हें काबू करना बहुत कठिन हो जाएगा। महिलाओं-बालिकाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में पूरी तत्परता और संवेदनशीलता से कार्रवाई करनी होगी।

राजकीय महिला महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर रेणू गुलिया के अनुसार पारदर्शिता का खोना विश्वसनीयता का खोना है। इस शुभ मौके पर हम दशानन की पहचान करें और भीतर हो या बाहर उसे परास्त करने का प्रयास करें। महिलाओं और बच्चियों के प्रति बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने ही होंगे। उपेक्षित और वंचित वर्ग के लिए भी मन में प्रेम-संवेदना का एक दीप तो जलाकर देखिए, मन के भीतर के राम मुस्कुराते नजर आएंगे।

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