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रक्षाबंधन आज : 474 वर्षों बाद बन रहा ऐसा योग, ग्रहों का भी विशेष संयोग, जानिये राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan : राखी पर इस बार चंद्रमा कुंभ राशि में मौजूद रहेंगे और गुरु कुंभ राशि में ही वक्री चाल में मौजूद है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु और चंद्रमा की इस युति से रक्षाबंधन पर गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ माना गया है।

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Raksha bandhan 2021

Rakshabandhan : 22 अगस्त रविवार को रक्षाबंधन का पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। रक्षाबंधन का त्यौहार बहुत ही शुभ योग और भद्रा रहित काल में है। कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली के डायरेक्टर व श्रीदुर्गा देवी मन्दिर पिपली के अध्यक्ष डॉ.सुरेश मिश्रा ने बताया कि इस बार राखी पर्व पर वर्षों के बाद एक महासंयोग का निर्माण होने जा रहा है। राखी पर इस बार चंद्रमा कुंभ राशि में मौजूद रहेंगे और गुरु कुंभ राशि में ही वक्री चाल में मौजूद है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु और चंद्रमा की इस युति से रक्षाबंधन पर गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ माना गया है।

गजकेसरी योग पर शुभ कार्य करने पर उसमें विजय होने और सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। इस योग में किये जाने वाले कार्यों का परिणाम अच्छे प्राप्त होते हैं। किसी जातक की कुंडली में जब चंद्रमा और गुरु केंद्र में विराजमान हो और एक दूसरे पर दृष्टि डालते हैं तब गजकेसरी योग बनता है। डॉ.मिश्रा के अनुसार रक्षाबंधन के दिन सूर्य, मंगल और बुध तीनों एक साथ सिंह राशि में रहेंगे। 474 वर्षों बाद रक्षाबंधन धनिष्ठा नक्षत्र में और सूर्य, मंगल और बुध का सिंह राशि में होने पर मनाया जाएगा। राखी बांधते समय भद्राकाल का विशेष ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि भद्राकाल में राखी बांधने पर अशुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। इस वर्ष राखी भद्रा रहित होगी और इस बार राखी का त्योहार पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इस कारण से राखी पर पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

रक्षासूत्र का मंत्र- येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र का सामान्यत: यह अर्थ लिया जाता है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षे! रक्षासूत्र तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो। धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि रक्षा सूत्र बांधते समय ब्राह्मण या पुरोहित अपने यजमान को कहता है कि जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे अर्थात धर्म में प्रयुक्त किए गये थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं। इसके बाद पुरोहित रक्षा सूत्र से कहता है कि हे रक्षे तुम स्थिर करना, स्थिर रहना। इस प्रकार रक्षा सूत्र का उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को धर्म के लिए प्रेरित एवं प्रयुक्त करना है।

राहु काल और भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती

पंडित कृष्ण कुमार बहल वाले ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। रक्षाबंधन में राहु काल और भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है, क्योंकि इन दोनों ही काल को अशुभ माना गया है, लेकिन इस बार 22 अगस्त को भद्रा काल का साया नहीं होने से पूरे दिन राखी बंधेगी। पंचांग के अनुसार भद्रा काल रक्षाबंधन के अगले दिन 23 अगस्त 2021 को सुबह 5.34 बजे से सुबह 6.12 बजे तक रहेगा।

इस बार शोभन योग सुबह 6.15 से 10.35 बजे तक

पंडित के अनुसार इस बार राखी के पर्व पर शोभन योग सुबह 6.15 से 10.35 बजे तक रहेगा। शोभन योग में सवा चार घंटे तक राखी बांधना श्रेष्ठ रहेगा। इसके अलावा देव गुरू, बृहस्पति और चंद्रमा मिलकर सावन पूर्णिमा पर गजकेसरी योग भी बनाएंगे। रक्षाबंधन पर सूर्य, मंगल और बुध सिंह राशि में रहेंगे। सिंह राशि का स्वामी भी सूर्य ही है। इस राशि में उसका मित्र मंगल भी रहेगा। इस दिन शुक्र कन्या राशि में रहेगा।

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