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हरियाणा में 163 नहीं 154 कानूनों से हटेगा पंजाब शब्द

हरियाणा विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में सोमवार 15 मार्च को प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार द्वारा सदन में हरियाणा संक्षिप्त नाम संशोधन विधेयक, 2021 भी पेश किया जाएगा।

हरियाणा में 163 नहीं 154 कानूनों से हटेगा पंजाब शब्द
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हरियाणा विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में सोमवार 15 मार्च को प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार द्वारा सदन में हरियाणा संक्षिप्त नाम संशोधन विधेयक, 2021 भी पेश किया जाएगा। इस विधेयक द्वारा हरियाणा में पंजाब एवं पूर्वी पंजाब के संक्षिप्त नाम (शीर्षक) से लागू 154 अधिनियमों (कानूनों) में से पंजाब एवं पूर्वी पंजाब शब्द के स्थान पर हरियाणा शब्द करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कंवर पाल गुर्जर द्वारा सदन में पेश होगा।

गत वर्ष हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) ज्ञान चंद गुप्ता द्वारा राज्य सरकार के साथ उक्त विषय उठाया गया था। जिसके लिए प्रदेश के विधि परामर्शदाता (एलआर) की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित की गई जिसमें चार अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, जिन्होंने उक्त संशोधन विधेयक लाने पर अपनी रिपोर्ट दी। जिसे बाद में मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री की भी मंजूरी मिल गई। हालांकि तब ऐसी खबरें आयी थीं कि 163 कानूनों में ऐसा संसोधन किया जाएगा जिसे अब नौ घटाकर 154 में किया जा रहा है।

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि साढ़े 54 वर्षों पूर्व भारतीय संसद द्वारा सितम्बर, 1966 में अधिनियमित (बनाये ) पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के 1 नवंबर, 1966 से लागू होने के बाद तत्कालीन संयुक्त पंजाब सूबे से अलग होकर हरियाणा देश का 17 वां राज्य बना जिस कारण विभिन्न विषयो पर तत्कालीन पंजाब विधानमंडल द्वारा बनाये गए सभी अधिनियम (कानून ) तत्काल प्रभाव से हरियाणा में भी लागू हो गए।

जहां तक हरियाणा में वर्तमान में लागू पंजाब के नाम से कानूनों के संक्षिप्त नामों से पंजाब को हटाकर हरियाणा शब्द प्रतिस्थापित करने का विषय है, इस पर हेमंत ने बताया की आज से 48 वर्ष पूर्व 1973 में तत्कालीन बंसीलाल सरकार के दौरान भी ऐसी कवायद चली थी परंतु विस्तृत विचार विमर्श के बाद यह प्रस्ताव किया गया कि ऐसा करना इतना सहज नहीं होगा एवं इसके लिए उन सभी संबंधित कानूनों को अलग से विधानसभा द्वारा अधिनियमित करवाना होगा एवं जो कानून संविधान की समवर्ती सूची में हैं, उनमें केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति भी आवश्यक होगी. बहरहाल तब नये सिरे से सारे कानून बनवाने की सारी प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पाई थी जिसे हालांकि अब किया जा रहा है.

बहरहाल, हेमंत ने आगे बताया कि हरियाणा विधानसभा द्वारा उपरोक्त संशोधन कानून पारित करने के फलस्वरूप प्रदेश में पंजाब और पूर्वी पंजाब के नाम से लागू 154 कानूनों के संक्षिप्त नाम में हरियाणा शब्द डल जाने के बावजूद जहाँ तक सम्बंधित मूल कानून के अधिनियमित (बनाने ) वाले राज्य, सम्बंधित वर्ष और अधिनियम की क्रम संख्या का विषय है, उसमें पंजाब शब्द ही रहेगा क्योंकि हरियाणा विधानसभा द्वारा कोई संशोधन नहीं किया जा सकता. उक्त संशोधन विधेयक के क्लॉज़ 4 में भी ऐसा स्पष्ट उल्लेख है।

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