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प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल में बदलने की प्रक्रिया तेज

मास्टर ट्रेनरों ने प्रदेश की सभी सीडीपीओ और सुपरवाइजर को दिया पांच दिवसीय प्रशिक्षण।

प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल में बदलने की प्रक्रिया तेज
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प्रशिक्षण लेतीं सीडीपीओ और सुपरवाइजर।

नौनिहालों की देखभाल का माध्यम बनने वाले आंगनवाड़ी केंद्र अब उन्हीं नौनिहालों की शिक्षा की पहली आधिकारिक सीढी बनने जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति के अनुरूप अब प्रदेश की आंगनवाड़ी केंद्रों में न केवल संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा, अपितु व्यवहारिक तरीके से प्रशिक्षित स्टाफ 4000 आंगनवाड़ी केंद्रों में औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए तैयार होगा। कोरोना महामारी संक्रमण के चलते हुई देरी को पाटते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस दिशा में तेजी से कदम बढाए हैं।

नई शिक्षा नीति, 2020 प्रदेश ही नहीं, अपितु देशभर में शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है और हरियाणा ने इस क्षेत्र में बड़ी तेजी से पहल की है। ग्रामीण-शहरी आंचल में बड़ी पहुंच रखने वाली आंगनवाड़ी केंद्रों में इन बदलावों की आहट को महसूस किया जा सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की 4000 आंगनवाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल में बदलने की घोषणा को जमीनी रूप देने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा अपने अधिकारियों की टीम के साथ जुट गई हैं। राज्यमंत्री कमलेश ढांडा बताती हैं कि विभाग ने 4000 आंगनवाड़ी को प्ले स्कूल में बदलने के लिए पहले चरण में 1135 प्ले स्कूल शुरू करने के लक्ष्य को पूरा करना शुरू कर दिया है।

इस दिशा में प्रदेश भर में जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों में 89 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए थे और उन्होंने बीते पांच दिन में विभाग की तकरीबन 100 सीडीपीओ तथा 777 सुपरवाइजरों को 40 से 50 के ग्रुप में प्रशिक्षित किया गया है। अब सभी प्रशिक्षित अधिकारी फील्ड में जाकर आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रशिक्षण देंगी। मंत्री कमलेश ढांडा ने बताया कि प्रशिक्षित सीडीपीओ, सुपरवाइजर अपने-अपने क्षेत्र में 14 दिन का अभ्यास करेंगी तथा इसके बाद दो दिन की समीक्षा के दौरान उनके प्रशिक्षण की गुणवत्ता को परखते हुए भविष्य में सभी आंगनवाडी केंद्रों को कवर करने का लक्ष्य रखा जाएगा।


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