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Private स्कूलों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सुनवाई सात सितंबर तक टली

हाईकोर्ट (High Court) ने कहा कि मामले में अभिभावकों (The parents) का पक्ष भी सुना जाना बेहद जरुरी है और फ़िलहाल इस मामले में कोई जल्दी भी नहीं है।

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प्रतीकात्मक फोटो

हरियाणा। निजी स्कूल संचालकों को ट‍्यूशन (tuition) सहित अन्य फीस लेने के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल पाई। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस केस में अभिभावकों (The parents) का पक्ष सुनना जरूरी है। इसलिए कोई जल्दी नहीं है। यह कहकर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई सात सितंबर तक टाल दी है।

सोमवार को जस्टिस रामेंद्र जैन ने निजी स्कूलों की संस्था सर्व विद्यालय संघ की याचिका पर सुनवाई शुरू की तो कहा कि मामले में अभिभावकों का पक्ष भी सुना जाना जरुरी है इस पर संघ ने आपत्ति जताई, जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अभिभावक भी इस मामले में एक पक्ष हैं ऐसे में उन्हें सुने बिना कैसे कोई निर्णय किया जा जा सकता है और निजी स्कूलों को फीस वसूली की इतनी जल्दी क्यों है। इस मंकले में काफी देर चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 7 सितंबर तक स्थगित कर दी, जिस पर संघ ने कहा कि इस मामले की जुलाई के पहले सप्ताह सुनवाई हो सकती है।

बता दें कि सर्व विद्यालय संघ हरियाणा ने दायर याचिका में कहा है की लॉकडाउन से सिर्फ छात्रों के अभिभावक ही प्रभावित नहीं हुए हैं, बल्कि निजी स्कूल भी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। वही मामले में अभिभावकों की संस्था ने भी एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के जरिए अर्जी दायर कर कहा है कि लॉकडाउन होने के कारण अभिभावकों की आय भी प्रभावित हुई है। बहुत सारे अभिभावक या तो बेरोजगार हो गए हैं या आय बहुत कम बची है।

सभी निजी शिक्षण संस्थाएं गैर-लाभ के इरादे से स्थापित की गई हैं, लेकिन निजी स्कूलों के पास करोड़ों रूपए का रिजर्व फण्ड है। अर्जी में हरियाणा सरकार के उन आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार प्रत्येक निजी स्कूल को हर साल ऑडिट बैलेंस सीट निदेशालय के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए हुए हैं लेकिन अधिकांश निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग के समक्ष ऑडिट बैलेंस सीट जमा नहीं कराई है। पहले इन निजी स्कूलों से बैलेंस शीट मांगी जाए।

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