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सोनीपत : निजी अस्पताल को नहीं थी अनुमति, फिर भी भर्ती किए कोरोना मरीज, एक घंटे में तीन की मौत

मृतकों के परिजनों ने लगाया ऑक्सीजन खत्म होने का आरोप, सिविल सर्जन की गाड़ी रूकवाकर अस्पताल संचालक के खिलाफ दी शिकायत, चार सदस्यीय टीम जांच के लिए पहुंची।

सोनीपत : निजी अस्पताल को नहीं थी अनुमति, फिर भी भर्ती किए कोरोना मरीज, एक घंटे में तीन की मौत
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सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर विरोध जताते हुए परिजन।

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

शहर के बहालगढ़ रोड पर स्थित निजी अस्पताल में एक घंटे में कोरोना से तीन मरीजों की मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने निजी अस्पताल में सुविधाएं नहीं होने व प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। साथ ही परिजनों ने अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने और वेंटीलेंटर के काम नहीं करने आरोप लगाया। सांसद की मीटिंग में जा रहे सिविल सर्जन की गाड़ी रुकवाकर परिजन आगे बैठ गए और अस्पताल संचालक के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।

इसके बाद सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल को कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज की अनुमति नहीं है। उसके बावजूद बहालगढ़ रोड स्थित प्राइवेट अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को एडमिट करना गलत है। ऐसे में चार सदस्यीय टीम को जांच के लिए अस्पताल भेजा, जहां टीम ने नोटिस जारी करके अस्पताल के संचालक से 17 अप्रैल से अब तक भर्ती हुए मरीजों व इलाज के दौरान मृत हुए मरीजों की रिपोर्ट मांगी। सोनीपत के गांव अटेरना की रहने वाली बुजुर्ग महिला को सांस में दिक्कत होने के कारण मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया था। उसके बाद कोरोना टेस्ट कराया गया, रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर उसे बहालगढ़ रोड पर निजी अस्पताल में दो दिन पहले ही भर्ती किया गया।

वहीं दिल्ली के गांव हिरणकी के रहने वाले बुजुर्ग को स्वास्थ्य खराब होने पर परिजन उसके लेकर दिल्ली के मधुबन चौक पर लेकर गए वहां पर वेंटीलेटर सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण बहालगढ़ रोड पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी भी कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। इसी तरह झज्जर के गांव कानौंदा की रहने वाली बुजुर्ग महिला को भी तीन दिन पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन सोमवार सुबह एक घंटे के अंदर तीन लोगों की मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने पहले अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ही देर पहले तीनों मरीजों की हालत ठीक थी। अस्पताल में वेंटीलेटर और आक्सीजन की सुविधा कहकर मरीजों को भर्ती किया गया था। आक्सीजन की कमी के कारण वेंटीलेटर फेल हो गए।

इसके बाद परिजन अस्पताल के संचालक पर कार्रवाई की मांग को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे और जमकर बवाल काटा। इसके साथ ही अस्पताल के संचालक पर कार्रवाई कराने के लिए सिविल सर्जन की गाड़ी के सामने तब परिजन बैठ गए। जब सिविल सर्जन लघु सचिवालय में सांसद रमेश कौशिक की मीटिंग में जा रहे थे। लेकिन लोगों ने सिविल सर्जन को मीटिंग में जाने नहीं दिया। साथ ही परिजनों ने सिविल सर्जन को बताया कि बहालगढ़ रोड पर अस्पताल में कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही और केवल मोटी रकम वसूली जा रही है। उन्होंने शिकायत देकर अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के कारण तीन कोरोना संक्रमित बुजुर्ग लोगों को मौत हो गई। साथ ही यह आरोप लगाया कि दो दिन के अंदर अस्पताल में सात लोगों की मौत हुई है।

शिकायत मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया ने उप सिविल सर्जन डॉ. आदर्श शर्मा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम का गठन किया। इस टीम में डॉ. जयकिशोर, डॉ. तरुण यादव व डॉ. गीता दहिया को शामिल किया। प्रारंभिक जांच में तीन कोरोना संक्रमितों के आस्कर अस्पताल में मरने की पुष्टि हुई है। तीनों मरीज कोरोना संक्रमित थे, लेकिन प्राइवेट अस्पताल की ओर से स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना नहीं दी गई। परिजनों के हंगामें के बाद प्राइवेट अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन सिलिंडर का स्टाक मंगवाया गया। इसके बाद टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचे अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया और अस्पताल के संचालक से 17 अप्रैल से लेकर अब तक भर्ती हुए मरीजों व इलाज के दौरान मृत हुए मरीजों की रिपोर्ट मांगी। टीम को वहां पर 29 मरीज भर्ती मिले।



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