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पुलिस का साइबर फ्रॉड रोकने का प्लान तैयार

पलवल, नूहं, रेवाड़ी व महेन्द्रगढ़ में साइबर ठगी की वारदातों को रोकने के लिए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर ऋषिकांत ने कुछ बिंदु सुझाये है, जिससे आम लोग खुद जागरूक होकर इन वारदातों पर अंकुश लगा सकते है।

पुलिस का साइबर फ्रॉड रोकने का प्लान तैयार
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रेवाड़ी : इंस्पेक्टर ऋषिकांत

हरिभूमि न्यूज : रेवाड़ी

कुछ दिन पहले ही साइबर ठगी को रोकने के लिए बनाए गए रेवाड़ी रेंज के साइबर थाना में 12 दिनों के भीतर ही तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इस थाने के अधीन आने वाले चारों जिलों पलवल, नूहं, रेवाड़ी व महेन्द्रगढ़ में साइबर ठगी की वारदातों को रोकने के लिए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर ऋषिकांत ने कुछ बिंदु सुझाये है, जिससे आम लोग खुद जागरूक होकर इन वारदातों पर अंकुश लगा सकते है। साथ ही पुलिस ने फ्रॉड के मामले रोकने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने के लिए खाका भी तैयार कर लिया है।

थाना प्रभारी ऋषिकांत ने बताया कि साइबर फ्रॉड के मामलों से निपटने के लिए उनकी टीम द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। अभी तक 3 एफआईआर दर्ज की गई है जिनमें अनुसंधान जारी है। जल्द ही इन मामलों में खुलासा कर दिया जाएगा। थाना प्रबंधक ने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों की बड़ी वजह यह है कि हम किसी न किसी माध्यम से अपने खातों से संबंधित जानकारी शेयर कर देते हैं। बैंक कभी भी फोन पर किसी ग्राहक से खाता, एटीएम और ओटीपी से संबंधित जानकारियां नहीं मांगता। यदि फिर भी किसी का फोन आता है तो उसे खुद ही बैंक में आने की बात कहें।

थाना प्रबंधक ने कहा कि मोबाइल पर आए हुए किसी भी संदिग्ध मैसेज, ईनाम, लॉटरी के साथ आने वाले क्यूआर कोड को बिल्कुल भी क्लिक नहीं करें। इन पर क्लिक करते ही इंटरनेट के जरिए खाता से संबंधित अथवा फोन हैकिंग के माध्यम से जानकारी शातिर तक पहुंच जाती है। अब यही ट्रेंड चल रहा है कि किसी परिचित का नाम लेकर पैसे भेजने का झांसा देकर कयूआर कोड या लिंक भेज देते हैं जिस पर क्लिक करते ही अकाउंट की डिटेल्स चली जाती है। उन्होंने कहा कि अपना ओटीपी दो से तीन माह के अंतराल बदलते रहे हैं और कभी सामान्य पासवर्ड जैसे वाहन नंबर, जन्मतिथि या बच्चे की जन्मतिथि से संबंधित पासवर्ड नहीं बनाएं। पासवर्ड हमेशा कैपिटल लेटर के साथ उसमें एल्फाबेटिक नंबरों का इस्तेमाल करें।

सर्चिंग से मिलने वाले कस्टमर केयर पर नहीं करें विश्वास

थाना प्रभारी ने बताया कि कई मामलों में सामने आया है कि गूगल अथवा अन्य सचिंर्ग इंजन से कस्टमर केयर या अन्य किसी हेल्पलाइन के नंबर सर्च करके डायल किए थे। कस्टमर केयर अथवा हेल्पलाइन के नंबर संबंधित कंपनी की बुकलेट या एटीएम कार्ड पर दिए हुए नंबरों पर विश्वास करें। अन्य माध्यमों से मिलने वाले नंबरों पर कतई विश्वास नहीं करें। कोई भी बैकिंग गेट-वे केवाईसी अपडेट नहीं कराती है, इसलिए इस तरह की भ्रामक कॉल पर विश्वास नहीं करें।

सोशल मीडिया अकाउंट लॉग आउट अवश्य करें

उन्होंने बताया कि हम अपने सोशल मीडिया के अकाउंट को हमेशा लॉग-इन रखते हैं यह गलत है। यूज नहीं होने पर उसे लॉग आउट कर दें और अपनी प्रोफाइल के लिए लॉक आप्शन अवश्य चुने। इससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपकी जानकारी नहीं ले सकता है। इसके भी पासवर्ड समय पर बदलने के साथ मजबूत बनाएं।

चलेगा जागरूकता अभियान

थाना प्रभारी ने बताया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में बचाव के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता और सतर्कता बरतना। हम जानकारी नहीं देंगे तो ठगी नहीं हो सकती है। उन्होंने बताया सोशल मीडिया के दुरुपयोग और महिलाएं की सुरक्षा को लेकर जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। कॉलेज और स्कूलों के बच्चों को इनके प्रति जागरूक किया जाएगा।

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