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जर्मनी में वर्ल्ड टेक्सटाइल व हेंडीक्राफ्ट मेले न होने से पानीपत के एक्सपोर्टरों को 2000 करोड़ का फटका

जर्मनी के हेनओवर शहर में इंटरनेशनल टेक्सटाइल व फ्रैंकफर्ट में वर्ल्ड हेंडीक्राफ्ट मेलों का आयोजन होता है। दोनों मेलों में दुनिया भर के टेक्सटाइल व हैंडीकाफ्ट बॉयर आते हैं

जर्मनी में वर्ल्ड टेक्सटाइल व हेंडीक्राफ्ट मेले न होने से पानीपत के एक्सपोर्टरों को 2000 करोड़ का फटका
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प्रतीत्तात्मक फोटो

विकास चौधरी : पानीपत

कोरोना महामारी का काला साया पानीपत टेक्सटाइल उद्योग पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अभी भी छाया हुआ है। वहीं, जनवरी माह के दूसरे पखवाड़े में जर्मनी के शहरों हेनओवर व फ्रैंकफर्ट में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल टेक्सटाइल व हैंडीक्राफ्ट मेलों का आयोजन नहीं होने से पानीपत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टरों को 2000 करोड़ से अधिक का फटका लगा है साथ ही इन मेलों के माध्यम से साल भर में मिलने वाला बिजनेस भी राम भरोसे हो गया।

स्मरणीय है कि जर्मनी के हेनओवर शहर में इंटरनेशनल टेक्सटाइल व फ्रैंकफर्ट में वर्ल्ड हेंडीक्राफ्ट मेलों का आयोजन होता है। टेक्सटाइल वर्ग में बैडशीट, पर्दे, बैडकवर, कंबल, कुशन कंवर, कपडे का सजावटी सामान जबकि हैंडीक्राफ्ट में बडी व छोटी दरियां, फुटमैट, हाथ व मशीन से बने कारपेट आते हैं। वहीं दोनों मेलों में दुनिया भर के टेक्सटाइल व हैंडीकाफ्ट बॉयर (विदेशी कारोबारी ) आते हैं और यहां पर उत्पादों के सैंपल देख, जांच परख कर टेक्सटाइल उत्पादों के आर्डर देते हैं। दोनों मेलों में पानीपत के 250 से अधिक संख्या में एक्सपोर्टर भाग लेते हैं और मेलों में अपने स्टाल बुक करवा कर विदेशी बॉयरों को अपने टेक्सटाइल व हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के सैंपल दिखा कर आर्डर लेते थे और माल को पानीपत में तैयार करवा कर विदेशों में निर्यात करते थे। वहीं दोनों मेलों में पानीपत के एक्सपोर्टरों को सबसे अधिक रिस्पांस उत्तरी अमेरिका, यूरोप व आस्ट्रेलिया महाद्वीपों के बॉयरों से मिला है। जबकि एशिया के ईसाई व बौद्ध धर्म के बाहुल देशों से भी पानीपत के एक्सपोर्टरों का बहुत अच्छा न सही पर काम चलाऊ रिस्पांस मिलता है।

कोरोना का काला साया दुनिया भर में

वहीं मुस्लिम बाहुल देशों के बायरों का रूझान तुर्की, पाकिस्तान, बांग्लादेश के प्रति अधिक रहता है, मुस्लिम बाहुल देशों के बॉयर चीन को भी प्राथमिकता देते है। वहीं मेलों में दुनिया भर के बॉयर जुटते है जो टेक्सटाइल या फिर हेंडीक्राफ्ट के सैंपल देख कर साल भर के कारोबार का खाका तैयार करते है। वहीं कोरोना का काला साया दुनिया भर में है। जर्मनी भी कोरोना की महामारी से अछुता नहीं है। कोरोना महामारी के चलते जर्मनी में चालू वर्ष में टेक्सटाइल व हेंडीक्राफ्ट मेलों का आयोजन नहीं हुआ। इधर, इंडिया एक्सपोर्ट कौंसिल के मैंबर विनोद धमीजा ने बताया कि जर्मनी के हेनओवर व फ्रैंकफर्ट शहरों में आयोजित होने वाले टेक्सटाइल व हेंडीक्राफ्ट मेलों का आयोजन होता था और इन मेलों में विदेशी बॉयरों से पानीपत के एक्सपोर्टरों को बहुत अच्छा रिस्पांस मिलता था, लेकिन इस बार मेलों का आयोजन नहीं होने से पानीपत टेक्सटाइल उद्योग को भीषण नुकसान हुआ है, इन मेलों में प्रथम चरण के जो अनुमानित हजारों करोड़ के आर्डर मिलते थे, वे नहीं मिले, साथ ही मेलों में कारोबार का साल भर का जो खाका तैयार होता था, वह भी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि दुनिया में कोरोना का प्रकोप शुन्य होने पर ही टेक्सटाइल व हेंडीक्राफ्ट कारोबार ढर्रे पर आएगा। वहीं यह संभावना है कि जर्मनी के हेनओवर व फ्रैंकफर्ट शहरों में मई या फिर जून में टेक्सटाइल व हैंडीक्राफ्ट मेलों का आयोजन हो सकता है।

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