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हरियाणा में जून-जुलाई में भी नहीं हो पाएंगे पंचायती चुनाव, जानें वजह

सरकार ने गत फरवरी में गठित 101 नई पंचायतों की वार्डबंदी अभी तक नहीं करवाई है। वार्डबंदी में कम से कम 42 दिन और इसके बाद नई मतदाता सूची तैयार करने में 45 दिन लगते हैं।

Haryana Panchayat Election : हरियाणा सरकार पंचायत चुनाव करवाने को तैयार, अब हाईकोर्ट में इस कारण अटका केस
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हरियाणा पंचायत चुनाव

अमरजीत एस गिल : रोहतक

कल शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसान आंदोलन अगर खत्म भी हो जाए ताे पंचायती राज संस्थाओं का छठा आम चुनाव जून-जुलाई में भी नहीं होगा पाएगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि सरकार ने गत फरवरी में गठित 101 नई पंचायतों की वार्डबंदी अभी तक नहीं करवाई है।

वार्डबंदी में कम से कम 42 दिन और इसके बाद नई मतदाता सूची तैयार करने में 45 दिन लगते हैं। दोनों प्रक्रियाएं पूरी करने में जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत को पूरे तीन महीने का समय लगेगा। इस हिसाब से देखा जाए तो चुनावों की तैयारियां पूरी करते गर्मियां बीत जाएंगी और सर्दी का मौसम आ पहुंचेगा। वार्डबंदी और मतदाता सूची के अलावा ऑड आरक्षण के मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में फैसला होते-होते अगर दो चार महीने लग जाते हैं तो फिर चुनाव सर्दी में हो पाएंगे। यह कहा जा सकता है कि चुनावों की गर्मी, सर्दी के मौसम में होगी।

41-42 दिन में पूरी होती है वार्डबंदी

सरकार ने 23 फरवरी को 101 नई पंचायतों का गठन किया था। गठन प्रक्रिया तभी पूरी होती है। जब नई पंचायतों की वार्डबंदी हो जाए। इसके लिए पूरी प्रकि्रया में 41 दिन लगते हैं। सबसे पहले सर्कल राजस्व अधिकारी द्वारा वार्ड का प्रथम प्रकाशन किया जाता है। वार्डबंदी सात चरणों में होती है। पहले चरण में 14 दिन में वार्ड का गठन, प्रकाशन के बाद 4 दिन तक आपत्ति, उसके अगले 6 दिन में इनका निपटान, सर्कल राजस्व अधिकारी द्वारा की वार्डबंदी के विरूद्ध 3 दिन में शिकायत दर्ज करवाई जाती हैं।

इसके अगले 8 दिन में मतदाताओं द्वारा दर्ज की गई शिकायतों का निवारण किया जाता है। यह कार्य पूरे होने के 3 दिन के भीतर वार्डो का अंतिम प्रकाशन होता है। मालूम हो कि रोहतक जिले में तीन नई पंचायतें अस्तित्व में आयी हैं। इनमें सांघी से अलग होकर पाना दुदान, सैमाण से सैमाण टोडर और मदीना गिन्धरान पंचायतों को मदीना गिन्धरान प्रथम और द्वितिय में विभाजित किया गया गया है।

45 दिन में तैयार होती है वोटर लिस्ट

जिस तरह से वार्डबंदी होती हैं, ठीक उस तर्ज पर मतदाता सूची तैयार की जाती हैं। इस कार्य मेें कम से कम 45 दिन का समय लगता है। 14 दिन वोटर लिस्ट बनाने में लगते हैं। फिर इनका प्रथम प्रकाशन होता है। फिर तीन-चार दिन तक वोटर लिस्ट वार्ड में लगाई जाती है। ताकि मतदाता को कोई आपत्ति हो तो शिकायत दर्ज करवा सके। प्रथम प्रकाशन पर 3-4 दिन तक आपत्ति दर्ज होती हैं। इनका निपटारा आठ दिन में किया जाता है। इस निपटारे पर किसी भी वोटर को फिर से आपत्ति है तो अपील जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत को की जाती है। इसके लिए पांच दिन मुर्कर होते हैं। अधिकारी द्वारा 3 दिन में अपील का निपटारा किया जाता है। अगले आठ दिन में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन करके इसकी इत्तला राज्य निर्वाचन आयोग को देनी होती है। ताकि आयोग चुनावों की घोषणा कर सके।

सरकार जोखिम लेने को तैयार नहीं

कायदे से नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना के बाद राज्य सरकार ने वार्डबंदी और मतदाता सूची तैयार करने के लिए कार्यक्रम जारी करना चाहिए था। लेकिन ऐसा शायद किसान आन्दोलन की वजह से नहीं किया गया। सरकार किसान आंदोलन के मद्देनजर पंचायत चुनावों को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम लेने को तैयार नहीं है। मालूम हो कि गत 23 फरवरी को पंचायती राज संस्थाओं का निर्धारित पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ग्रामीण विकास के कार्य अब प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा करवाए जा रहे हैं।

तीन महीने का समय लगता है

नई पंचायतों के गठन बारे में पिछले दिनों सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई थी। लेकिन अभी तक पंचायतों की वार्डबंदी और मतदाता सूचियां तैयार करने के लिए कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। ये दोनों कार्य पूरा करने में करीब तीन महीने का समय लगता है। -राजपाल चहल, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, रोहतक

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