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Haryana : जून से पहले नहीं होंगे पंचायत चुनाव

महिलाओं के ऑड आरक्षण पर भी उच्च न्यायालय में मामला विचारधीन है। जिसकी अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होनी है। ऐसे में न्यायालय आरक्षण को लेकर कोई फैसला उसी दिन कर देगा। इसकी सम्भावना कम है। क्योंकि वर्ष 2015 में पंचायती राज संस्थाओं के उम्मीदवारों की योग्यता निर्धारण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

अमरजीत एस गिल : रोहतक

23 फरवरी तक पंचायती राज संस्थाओं को भंग करके प्रशासक नियुक्त कर दिए जाएंगे। अब संस्थाओं के छठे आम चुनाव जून से पहले किसी भी सूरत में नहीं होंगे। जून में भी तभी हाे सकते हैं, जब सरकार चुनाव से पहले की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करे।

नई पंचायतों के गठन सरकार के पास विचारधीन है। अगर किसी एक पंचायत को दो पंचायतों में विभाजित करके चुनाव करवाना है तो उसके लिए भी 40-45 दिन का समय कम से कम लगता है। इसके अलावा महिलाओं के ऑड आरक्षण पर भी उच्च न्यायालय में मामला विचारधीन है। जिसकी अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होनी है। ऐसे में न्यायालय आरक्षण को लेकर कोई फैसला उसी दिन कर देगा। इसकी सम्भावना कम है। क्योंकि वर्ष 2015 में पंचायती राज संस्थाओं के उम्मीदवारों की योग्यता निर्धारण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। जिसकी वजह से पंचायतों के चुनाव में छह सात महीने देरी हो गई थी। बताया तो यह भी जा रहा है कि रोहतक और पानीपत जिले के अलावा बाकि जिलों में अभी तक वार्डबंदी भी नहीं हुई है। ऐसे में चुनाव कब होंगे, इसको लेकर पंचायत विभाग को कोई भी अधिकारी कुछ नहीं कह पा रहा है।

न्यायालय में फंसा चुनाव

कहा जा सकता है कि वर्ष 2015 का पांचवा आम चुनाव जिस तरह से कोर्ट-कचहरी में फंस गया था। ठीक उसी तरह ही 2021 का इलेक्शन भी न्यायालय के फेर में आ गया है। न्यायालय जब ऑड आरक्षण को लेकर फैसला करेगा, उसके बाद ही सरकार चुनाव की तैयारियां शुरू करेगी।

अगर सरकार ने चुनाव में देरी नहीं करना चाहती है तो वार्डबंदी समेत दूसरी प्रक्रियाएं 20 अप्रैल तक पूरी करवाए। ताकि जिस दिन कोर्ट आरक्षण को लेकर निर्णय करे,उसके तत्काल बाद सरकार राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव करवाने की सिफारिश भेज दे।

नहीं हो रहा पत्र व्यवहार

जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत कार्यालय सूत्रों के मुताबिक गत 20-21 जनवरी के बाद राज्य निर्वाचन आयोग, विकास एवं पंचायत विभाग के बीच चुनाव को लेकर पत्र व्यवहार तक नहीं हो रहा है।ऐसे में चुनाव जून में भी हो जाएंगे। इसको लेकर पूरा संशय बन गया है। गत19 जनवरी हाईकोर्ट ने महिलाओं के ऑड आरक्षण मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिए थे कि वह 20 अप्रैल को अपना पक्ष रखे। इसके बाद से ही चुनाव को लेकर पत्र व्यवहार बंद किया गया है।

किसान आंदोलन आ रहा आड़े

बताया जा रहा है कि जब से प्रदेश में कृषि कानूनों को लेकर किसान और दूसरे संगठनों ने जब आंदोलन शुरू किया है, तब से सरकार ने पंचायत चुनाव बट्टे-खाते में डाल दिए हैं। 25-26 नवम्बर को किसानों ने दिल्ली की सरहदों की तरफ कूच किया था। इसके ठीक एक दो दिन बाद 27 नवंबर को जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत ने पंचायतों की मतदाता सूचियों को अंतिम प्रकाशन करवा दिया था। इसके बाद से लगातार मामला ठंडे बस्ते में है। हालांकि बीच में एक बार उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि 24 फरवरी से पहले-पहले इलेक्श्न करवा दिए जाएंगे। गत अक्टूबर में राज्य चुनाव आयुक्त डॉ दलीप सिंह ने कहा था कि 24 फरवरी 2021 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी प्रक्रिया ली जाएगी। लेकिन चुनाव करवाने की बजाय पंचायतों को उससे पहले ही भंग करने की प्रक्रिया शुरू करवा दी गई।

वार्डबंदी में लगता है समय

सांघी समेत जिले में तीन-चार नई पंचायतों के गठन के बारे में सरकार के पास प्रस्ताव विचारधीन है। अगर सरकार नई पंचायतों का गठन कर देती है तो नई पंचायत की वार्डबंदी समेत दूसरी प्रक्रियाएं पूरी करने में ही 40-45 दिन का समय लग जाता है। घर-घर जाकर पंचायत विभाग नई मतों के लिए सर्वे करना होगा। मतदाता सूचियों का प्रथम प्रकाशन से लेकर अंतिम प्रकाशन करवाना कानूनी रूपी जरूरी होता है। इस दाैरान मतदाताओं की आपत्ति भी मांगी जाती हैं। आपत्तियों का निपटारा करने के लिए समय तय होता है। प्रथम अपीलीय अधिकारी के बाद द्वितिय अपीलीय अधिकारी को आपत्ति सुननी हाेती है।

सरकार जैसे भी आदेश देगी, पालना की जाएगी

इस बारे में जब खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल से बात की तो उन्होंने बताया कि चुनाव को लेकर सरकार जैसे भी आदेश देगी, उनकी पालना विभाग द्वारा की जाएगी। मतदाता सूचियों का प्रकाशन गत 27 नवम्बर को करवाया जा चुका है। इसके अलावा दूसरी कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की जा रही हैं।

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