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बाज नहीं आ रहे मुनाफाखोर : साढ़े 5 हजार में बिक रहा ऑक्सीजन सिलेंडर का नोजल सेट

आपदा काल में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनके लालच ने मानवता को तार-तार करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ऑक्सीजन और दवाई के बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के नोजल में भी कालाबाजारी का मामला सामने आया है। बारह सौ रुपए कीमत के नोजल को साढ़े पांच हजार रुपए में बेचा जा रहा है।

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ऑक्सीजन सिलेंडर

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

कोरोना महामारी काल में जहां कुछ लोग मानव धर्म निभाते हुए सेवा में जुटे हैं और एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनके लालच ने मानवता को तार-तार करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ऑक्सीजन और दवाई के बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के नोजल में भी कालाबाजारी का मामला सामने आया है। बारह सौ रुपए कीमत के नोजल को साढ़े पांच हजार रुपए में बेचा जा रहा है।

कालाबाजारी की पोल खोलते हुए इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। सिलेंडर में भरी ऑक्सीजन को मरीज तक पहुंचाने और रोकने का काम करने वाले नोजल की डिमांड फिलहाल काफी बढ़ी रही। क्योंकि ऑक्सीजन की मांग बढ़ने के साथ तमाम पुराने और चलन से बाहर हो चुके सिलेंडर को भी प्रयोग में लाया जा रहा है। ऐसे में उनके खराब हो चुके नोजल को बदलने के लिए मांग बढ़ रही है।

उधर, मांग बढ़ती देख कुछ लोगों ने आपदा काल में इसे भी कमाई का जरीया बना लिया है। महाबीर पार्क निवासी योगेश ने आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में नोजल की कालाबाजारी करने वाले व्यक्ति को खूब खरी-खोटी सुनाई। योगेश के अनुसार नोजल और फ्लोमीटर की कीमत 12 सौ रुपये है। जिसे वह एमआईई से 54 सौ रुपये में नोजल लेकर आया। इसमें भी दो नग कम थे। ऐसे में वह दिल्ली के मोती नगर गए और वहां से साढ़े तीन हजार रुपये में नोजल का पूरा सैट लेकर आए। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में भी तरुण जैसे लोग मुनाफाखोरी के शर्मशार उदाहरण पेश कर रहे हैं।

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