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कोरोना : लगातार कम होती जा रही है ऑक्सीजन की खपत

जींद में 22 मई के बाद नागरिक अस्पताल में धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम होने लगी और ऑक्सीजन की खपत भी घटती चली गई।

कोरोना : लगातार कम होती जा रही है ऑक्सीजन की खपत
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 नागरिक अस्पताल स्थित ऑक्सीजन टैंक।

हरिभूमि न्यूज. जींद

नागरिक अस्पताल में ज्यों-ज्यों कोविड मरीजों की संख्या कम हो रही है, वैसे-वैसे ऑक्सीजन की खपत भी लगातार कम होती जा रही है। दो सप्ताह पहले तक नागरिक अस्पताल में 2.5 टन ऑक्सीजन की खपत प्रतिदिन हो जाती थी वहीं अब यह घटकर 1.5 टन रह गई है। ऐसे में अब जिले में न तो ऑक्सीजन के लिए मारामारी रही है और न ही इसकी कमी। अस्पताल में मरीज कम होने के कारण स्वास्थ्य विभाग को भी काफी राहत मिली है।

कोरोना काल से पहले नागरिक अस्पताल में 10 सिलेंडर ऑक्सीजन की खपत होती थी। गत वर्ष सितंबर से नवंबर महीने में औसतन 50 ऑक्सीजन सिलिंडर लगने लगे। इस बार कोरोना की दूसरी लहर आई तो अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह से जिले में ऑक्सीजन की खपत अधिक होने लगी। मई महीने के शुरुआत सप्ताह में ऑक्सीजन की खपत एक टन से अधिक होने लगी। 15 मई के आसपास जिले में कोरोना संक्रमण पीक पर पहुंचा तो ऑक्सीजन की खपत भी 2.5 टन तक पहुंच गई और खूब मारामारी भी रही। नागरिक अस्पताल में तीन टन का ऑक्सीजन टेंक लगाया हुआ है। जिससे नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग में पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है।

वहीं पुरानी बिल्डिंग में सिलिंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। अब पुरानी बिल्डिंग में भी एक जगह ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर पूरी बिल्डिंग में ऑक्सीजन सप्लाई दी जाती है। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक सिलिंडर आने लगे और तीन दिन में ऑक्सीजन टेंक भी भरवाया जाने लगा। 22 मई के बाद नागरिक अस्पताल में धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम होने लगी और ऑक्सीजन की खपत भी घटती चली गई। फिलहाल नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1.5 टन ऑक्सीजन लगती है। इनमें से 100 ऑक्सीजन सिलिंडर तथा आधा टन ऑक्सीजन टेंक से ऑक्सीजन का प्रयोग किया जाता है।

तिमारदार ऑक्सीजन का प्रेशर खोल कर देते हैं बर्बाद

नागरिक अस्पताल में इस समय 1.5 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है लेकिन इतनी ऑक्सीजन मरीजों को नहीं मिल रही है। इसमें से काफी ऑक्सीजन खराब हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण मरीज तीमारदार हैं। काफी मरीजों के तीमारदार जितनी मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होती है, उससे अधिक ऑक्सीजन का प्रेशर खोल लेते हैं। जब मरीज बाथरूम आदि के लिए जाता है, उस समय भी ऑक्सीजन चलती रहती है। इस कारण काफी ऑक्सीजन खराब हो जाती है।

लापरवाही के चलते ऑक्सीजन होती है बर्बाद : डा. गोयल

नागरिक अस्पताल के एसएमओ डा. गोपाल गोयल ने बताया कि ऑक्सीजन को लेकर अब मारामारी नहीं रही है। अस्पताल में इस समय 1.5 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। मरीज के साथ आए तीमारदारों की लापरवाही से काफी ऑक्सीजन बर्बाद भी हो रही है। बिना जानकारी के मरीज को जितनी ऑक्सीजन चाहिए, तीमारदार उससे अधिक ऑक्सीजन प्वायंट खोल देते हैं। इसके अलावा जब भी मरीज को बाथरूम या अन्य जांच के लिए जाना होता है, तब वह कर्मचारियों को नहीं बताते, जिस कारण ऑक्सीजन चलती रहती है। इन लोगों को समझाया भी है कि ऑक्सीजन रेग्यूलेटर से छेड़छाड़ नहीं करें।

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