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Online study में बाधा बना र्स्माटफोन, विद्यार्थी न कर पा रहे होमवर्क न दे पा रहे टेस्ट

अभिभावकों ने कहा कि वो इतने अमीर नहीं है कि दो- दो फोन का खर्चा उठा पाए ऐसे में सरकार को इसके लिए जल्द से जल्द कोई व्यवस्था करनी चाहिए।

सरकारी स्कूल के छात्र ऑनलाइन पढ़ाई में ले रहें है बढ़-चढ़कर हिस्सा, ये जिला है टॉप पर
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प्रतीकात्मक तस्वीर

कुलदीप शर्मा : भिवानी

विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई करना अब दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उठानी पड़ रही है। अभिभावक सुबह ही काम पर चले जाते हैं तथा घर में एक ही स्मार्ट फोन होने के चलते विद्यार्थी दिन भर इंतजार करते रहते हैं। ऐसे में एक तरफ जहां उनका सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ टेस्ट भी देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने कहा कि वो इतने अमीर नहीं है कि दो- दो फोन का खर्चा उठा पाए ऐसे में सरकार को इसके लिए जल्द से जल्द कोई व्यवस्था करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के चलते अभी तक सिर्फ नौ वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल में बुलाया जा रहा है। पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। अध्यापकों द्वारा स्कूल का कार्य भी दिए गए नंबरों पर भेजा जा रहा है। अब जिन घरों में सिर्फ एक ही स्मार्ट फोन है वो विद्यार्थी पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों के पिता जब काम पर जाते हैं तो फोन को अपने साथ ले जाते हैं तथा बच्चे दिन भर फोन का इंतजार करते रहते हैं। कुछ स्थानों पर पड़ोसियों द्वारा इसमें मदद की जाती है लेकिन बीच में फोन आने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है।

लॉकडाउन के दौरान नहीं थी समस्या

कोरोना संक्रमण के चलते जब लॉकडाउन लगाया गया था तो सभी लोग घर पर ही थे। ऐसे में विद्यार्थियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा था। अब अनलॉक में जब अन्य व्यवस्था पटरी पर लौट रही है तो विद्यार्थियों की पढ़ाई बेपटरी होती जा रही है। अभिभावकों को डर बना हुआ है कि इसका खामियाजा उनके बच्चों को भुगतना पड़ सकता है। बच्चों से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब वो सुबह सोकर उठते हैं तब तक उनके पिता काम पर चले जाते हैं तथा रात को लेट आने पर वो तब तक सो जाते हैं तथा काफी बार घर वाले उन्हें उठाकर पढ़ाई करवाते हैं लेकिन उस समय पढ़ाई कर पाना बेहद मुश्किल होता है।

अध्यापक हर रोज कर रहे फोन

ऑनलाइन कार्य देने के लिए स्कूलों में नंबर लिखवाए गए हैं तथा उन्हीं नंबरों पर अध्यापक फोन कर गृह कार्य के बारे में पूछते हैं। सुबह से लेकर दोपहर तक जब भी अध्यापक दिए गए नंबर पर फोन करते हैं तो उन्हें एक ही जबाव मिलता है कि अभी वो काम के चलते घर पर नहीं है तथा शाम को घर जाने के बाद बता पाएंगे कि बच्चे ने कार्य किया है या नहीं। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की तरफ से 100 प्रतिशत गृह कार्य तथा टेस्ट करवाने के लिए जिम्मेवारी सौंपी गई हैं तथा ऐसे में लक्ष्य पूरा होना बेहद कठिन होता जा रहा है। कुछ अध्यापकों ने तो बताया कि अब अभिभावकों ने फोन तक उठाने बंद कर दिए हैं।

स्मार्ट फोन नहीं होने से आ रही परेशानी

मौलिक मुख्याध्यापक जयबीर नाफरिया ने बताया कि काफी विद्यार्थियों के पास स्मार्ट फोन नहीं होने के चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनका प्रयास रहता है कि वो ज्यादा से ज्यादा बच्चों से शिक्षण कार्य करवाया जाए। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान जब सब घर पर थे तो बच्चों को आसानी से फोन मिल जाता था लेकिन अब विद्यार्थियों को फोन समय पर नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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