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चिकित्सा उपकरण उद्योग पर अब किसान आंदोलन ने लगाए ब्रेक

ट्रांसपोटरों के पास सामान की डिलीवरी करवाने के लिए सुबह से लेकर शाम तक फोन घनघनाते रहते हैं तथा ट्रांसपोटर सिर्फ एक ही जबाव दे पा रहे हैं कि किसान आंदोलन के जाम में फंसी हुई है इसलिए इंतजार करना पड़ेगा।

चिकित्सा उपकरण उद्योग पर अब किसान आंदोलन ने लगाए ब्रेक
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कच्चा माल नहीं होने से खाली बैठे वर्कर व फैक्ट्री संचालक। 

कुलदीप शर्मा : भिवानी

लॉकडाउन के बाद हुए अनलॉक में पटरी पर आए भिवानी अर्थव्यवस्था की रीड ही हड्डी कहे जाने वाले चिकित्सा उपकरण उद्योग पर एक बार फिर से ब्रेक लग गए हैं । ब्रेक लगने का मुख्य कारण दिल्ली से कच्चे सामान का समय पर डिलवरी नहीं होना है।

ट्रांसपोटरों के पास सामान की डिलीवरी करवाने के लिए सुबह से लेकर शाम तक फोन घनघनाते रहते हैं तथा ट्रांसपोटर सिर्फ एक ही जबाव दे पा रहे हैं कि किसान आंदोलन के जाम में फंसी हुई है इसलिए इंतजार करना पड़ेगा। कुछ ट्रांसपोटर दिल्ली से आने वाले सामान को रूट डायवर्ट कर मंगवा रहे हैं लेकिन इसमें तेल की खपत ज्यादा हो रही है जिससे ट्रांसपोटरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। फिलहाल ट्रांसपोटरों के द्वारा किराये में इजाफा नहीं किया गया है लेकिन आंदोलन ज्यादा लंबा चला तो ट्रांसपोटर आर्थिक नुकसान को नहीं झेल पाएंगे तथा किराये में वृद्धि करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

चिकित्सा उद्योग के अलावा भिवानी में कपड़े के थैले, प्लास्टिक दाना सहित अन्य उद्योग की भी फैक्ट्री लगी हुई है तथा उन्हें भी कच्चे सामान के इंतजार में सामान बनाने में देरी हो रही है। जब भी आप्रेशन टेबल लाइन को रिपेयर करवाया जाता है तो उसके लिए दिल्ली जाना पड़ता है तथा फिलहाल दिल्ली की तरफ जाने वाले रास्ते जाम होने के चलते चिकित्सा उद्योग से जुड़े लोगों को लंबे रूट को तय करना पड़ रहा है।

लॉकडाउन में बेहद बुरे दौर से गुजरा था चिकित्सा उद्योग

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए लॉकडाउन में चिकित्सा उपकरण उद्योग के साथ साथ अन्य उद्योग भी बेहद बुरे दौर से गुजरा है। लॉकडाउन के बाद अब अनलॉक में भी उद्योग जगत को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कहीं लेबर की कमी के चलते व्यवसाय से जुड़े लोगों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है तो वहीं कोरोना काल ने कारोबारियों के बीच बनी विश्वाव की डोर को भी कच्चा कर दिया है। इसके चलते अब जब भी माल मंगवाने के लिए आर्डर दिए जा रहे हैं तो कैश पेमेंट की डिमांड की जा रही है। उद्योग जगत में प्रयोग होने वाला कच्चा माल दिल्ली से आता है लेकिन किसान आंदोलन के चलते दिल्ली की तरफ से न तो सामान आ रहा है तथा न ही दिल्ली जा रहा है। फिलहाल फैक्ट्रियों में जो कच्चा माल था उसी से काम चलाया जा रहा है। लॉकडाउन से पहले जो टर्न ओवर करोड़ों रुपये का था वो अब लाखों रुपये तक पहुंच गया है। भिवानी में बनने वाली ऑप्रेशन टेबल, ऑप्रेशन थियेटर लाइट के साथ साथ डेंटल केयर उपकरण की सप्लाई इंडिया के साथ साथ अफ्रिकन देशों में की जाती है।

1960 में लगी थी पहली फैक्ट्री

भिवानी में चिकित्सा उपकरण व्यवसाय का इतिहास 60 साल पुराना है। भिवानी में सबसे पहले 1960 में नंदराम कटला में फैक्ट्री लगाई गई थी । जब व्यवसाय शुरू हुआ तो डिमांड कम थी लेकिन भविष्य में इसकी जरूरत को महसूस करते हुए अन्य लोगों ने भी इसमें हाथ आजमाए तथा धीरे धीरे भिवानी आप्रेशन टेबल लाइटों का हब बन गया। शहर में करीब पांच दर्जन से अधिक अकेले चिकित्सा उद्योग की फैक्ट्री लगी हुई है तथा इन फैक्ट्रियों में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है।

परेशानी झेल रहे चिकित्सा उपकरण उद्योग से जुड़े व्यवासयी

इसी प्रकार इंडो मेडिक के नाम से फैक्ट्री चलाने वाले बंटी अली ने बताया कि जब लेबर की कमी को पूरा करते हैं तो कच्चा माल की कमी हो जाती है तथा जब कच्चा माल किसी तरह से पूरा हो जाता है तो लेबर की कमी हो जाती है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान ठप हुआ कामकाज अनलॉक में पटरी पर लौटा था तथा अब फिर से कच्चे माल समय पर नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जल्द से जल्द निकाला जाए हल

इस बारे में सर्जिकल एसोसिएशन के प्रधान जोरावर अली व उप प्रधान सोमेश शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान चिकित्सा उद्योग आर्थिक परेशानी के दौर से गुजरा था तथा अब एक बार फिर से उद्योग संचालकों को कच्चा माल समय पर नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को हो रही परेशानी का सरकार को जल्द से जल्द हल करना चाहिए ताकि किसानों को भी राहत मिल सके तथा उद्योग जगत से जुड़े लोगों को भी कच्चे माल संबंधी आने वाली परेशानी से निजात मिल सके।

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