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अब रोडवेज की बसों की छत पर तथा पीछे लटक कर सफर नहीं कर सकेंगे यात्री

कॉलेज तथा स्कूल के विद्यार्थी सबसे ज्यादा बसों के पीछे लटक कर या फिर बसों की छत पर बैठकर सफर करते थे। इसी डर को समाप्त करने के लिए तथा यात्रियों को सुरक्षित उनके गंत्वय तक पहुंचाने के लिए रोडवेज विभाग ने यह फैसला लिया है

अब रोडवेज की बसों की छत पर तथा पीछे लटक कर सफर नहीं कर सकेंगे यात्री
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 रोडवेज बसें

कुलदीप शर्मा : भिवानी

रोडवेज की बसों में अब छत पर बैठकर तथा पीछे लटक कर यात्रा करना नामुमकिन होगा। रोडवेज ने यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से बसों की छत पर सामान रखने के लिए बनाए गए स्टैंड तथा बसों की पीछे लगी लोहे की सीढ़ियों को हटवा दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि यात्रा करते समय कोई हादसा न हो।

कॉलेज तथा स्कूल के विद्यार्थी सबसे ज्यादा बसों के पीछे लटक कर या फिर बसों की छत पर बैठकर सफर करते थे। यह जोखिम भरा था क्योंकि ड्राइवर द्वारा जब भी इमरजेंसी ब्रेक लगाए जाते हैं या फिर बस के पीछे चल रहे वाहन अनियंत्रित होकर बस से टकरा जाए तो इससे जान जाने का डर हमेशा बना रहता था। इसी डर को समाप्त करने के लिए तथा यात्रियों को सुरक्षित उनके गंत्वय तक पहुंचाने के लिए रोडवेज ने यह फैसला लिया है। भिवानी रोडवेज डिपो की सभी बसों से सामान रखने के लिए बनाए गए स्टैंड तथा बस के पीछे लगाई गई लोहे की सीढ़ियों को हटा दिया गया है। रोडवेज जीएम ने कहा कि यह फैसला एक तरफ जहां यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मुहैया करवाएगा तो वहीं दूसरी तरफ लटक कर सफर करने वाले यात्री किराया भी नहीं देते थे तथा अब जब वो बस के अंदर सफर करेंगे तो उन्हें किराया देना होगा जिससे रोडवेज की आमदनी बढ़ेगी।

बार- बार कहने के बावजूद नहीं मानते थे विद्यार्थी

रोडवेज बस में सफर करने वाले यात्रियों में कॉलेज तथा स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी ऐसा वर्ग है जो पीछे लटक कर या फिर बस की छत पर बैठकर सफर करता था। चालक तथा परिचालक द्वारा बार बार समझाने के बावजूद भी विद्यार्थी जोखिम भरा सफर करने से बाज नहीं आ रहे थे। अनेक स्थानों पर ऐसे हादसे भी हुए थे जब चालक द्वारा इमरजेंसी ब्रेक लगाए जाने से छत पर बैठकर सफर कर रहे विद्यार्थी गिर कर घायल हुए थे। इसके साथ साथ पेड़ों की टहनियों तथा बिजली के तारों से भी हादसा होने का डर बना रहता था। जब कभी किसी स्थान पर कोई एग्जाम होता था या फिर कॉलेज की छुट्टी होने पर अनेक विद्यार्थी बस के पीछे लटक कर सफर करते थे। यह सफर काफी जोखिम भरा होता था क्योंकि बस के पीछे चल रहे वाहनों में से कोई अनियंत्रित होकर बस से टकराए जाने पर लटक कर सफर करने वालों की जान तक ले सकता था। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए रोडवेज ने बस की छत पर या पीछे लटक कर सफर करने से होने वाले अंदेशों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अब लोहे की सीढ़ी तथा छत पर बैठने के लिए कोई स्थान नहीं होने से विद्यार्थी या अन्य कोई भी इस तरह का सफर नहीं कर पाएगा।

हटवा दिए गए हैं स्टैंड तथा लोहे की सीढ़ियां

इस बारे में रोडवेज के जीएम गुलाब सिंह दूहन से बात हुई तो उन्होंने बताया कि यात्रियों को बेहतर सुविधा तथा हादसों को नियंत्रित करने के लिए बस की छत पर सामान रखने के लिए बनाए गए स्टैंड तथा पीछे लगी लोहे की सीढ़ियों को हटा दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी भी यात्री की जान जोखिम में न आए। उन्होंने सभी यात्रियों से अनुरोध किया है कि बस के अंदर ही सफर करें खिड़कियों में लटक कर सफर करना भी खतरा बना रहता है।

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