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किसानों ने बताया दूसरी जीत : अब पराली जलाने पर अपराधिक मामला नहीं होगा दर्ज, मिठाई बांटकर मनाई खुशी

शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पराली जलाने पर क्रिमिनल ओफेंस ना लगाने का फैसला लिया। इसके साथ ही एमएसपी पर किसान संगठनों को साथ लेकर समिति बनाए जाने का भी निर्णय लिया।

किसानों ने बताया दूसरी जीत : अब पराली जलाने पर अपराधिक मामला  नहीं होगा दर्ज, मिठाई बांटकर मनाई खुशी
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बसताड़ा टोल प्लाजा पर मिठाईयां बांटकर खुशी मनाते किसान।

घरौंडा ( करनाल )

तीन कृषि कानूनों ( Farm Laws ) को रद्द किए जाने की मांग के बाद सरकार ने किसानों की कुछ और मांगों पर भी अपनी सहमति जताई है। जिसमें एमएसपी ( msp ) व मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग शामिल है। जिसके बाद बसताड़ा टोल प्लाजा पर आंदोलनरत किसानों में भारी खुशी देखने को मिली। सरकार द्वारा मांगें माने जाने पर किसानों ने मिठाई बांटी और एक-दूसरे को बधाई दी तथा इसे किसानों की दूसरी बड़ी जीत बताया।

बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों के धरने प्रदर्शन को 11 माह का समय बीत चुका है। किसान सरकार से तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग करते आ रहे थे। किसानों द्वारा लंबे संघर्ष के बाद सरकार जागी और पीएम नरेंद्र मोदी ( Pm Modi ) ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा कर दी। जिसको केबिनेट में भी मंजूरी मिल चुकी है। शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ( Union Agriculture Minister Narendra Tomar ) ने पराली जलाने ( Paddy Straw ) पर क्रिमिनल ओफेंस ना लगाने का फैसला लिया। इसके साथ ही एमएसपी पर किसान संगठनों को साथ लेकर समिति बनाए जाने का भी निर्णय लिया। मृतक किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने और मुकद्मों को खारिज किए जाने का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया है।

सरकार के इस निर्णय के बाद किसानों में भारी खुशी देखने को मिली। बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों ने मिठाईयां बांटी। किसान नेता हैप्पी औलख, रामपाल चहल व अन्य ने कहा कि सरकार का यह फैसला किसानों की दूसरी सबसे बड़ी जीत है। किसानों के संघर्ष के कारण सरकार झुकी है और किसानों पर पराली जलाने पर दर्ज होने वाला अपराधिक मामला वापिस ले लिया गया है। जब तक किसानों पर दर्ज मुकद्मे वापिस नहीं होते और मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजा नहीं मिलता, तब तक किसानों की जीत अधूरी रहेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मुआवजे व मुकदमे खारिज करने के फैसले को राज्य सरकारों को पर छोड़ा है और उम्मीद है कि राज्य सरकारें भी किसानों की मांगों को जल्द ही पूरा कर देंगी, लेकिन तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

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