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अब फ्यूज उड़ा तो महज चार घंटे में करना होगा ठीक, नहीं तो बिजली कर्मचारी पर लगेगा जुर्माना

सरकार ने बिजली निगम में लागू किया राईट टू सर्विस एक्ट, कर्मचारियों एवं अधिकारियों की तय की जवाबदेही, शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्र के हिसाब से तय किया गया है समस्याओं के निराकरण का समय।

बिजली
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हरिभूमि न्यूज : नारनौल

अब बिजली फ्यूज उड़ने, तार एवं पोल टूटने जैसी शिकायतों के लिए बिजली अधिकारियों एवं कर्मचारियों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने बिजली निगम में राईट टू सर्विस एक्ट-2014 को लागू कर दिया है। जिसके चलते अब निगम को निर्धारित समयावधि में बिजली समस्या को हल करना होगा, अन्यथा जिस अधिकारी या कर्मचारी का क्षेत्र होगा, उसकी जवाबदेही रहेगी। इस जागरूकता से संबंधित फ्लैक्स एवं बोर्ड निगम की ओर से विभिन्न कार्यालयों में लगाए गए हैं, ताकि वहां आने-जाने वाले आम लोगों खासकर बिजली ग्राहकों को इसकी जानकारी लग सके और वह इन अधिकारों का सदुपयोग कर सकें।

जानकारी के मुताबिक सरकार ने बिजली निगम कार्यालयों में राईट टू सर्विस एक्ट लागू कर दिया है। अब इस एक्ट के तहत तैयार की गई गाइड लाइंस के हिसाब से अधिकारियों व कर्मचारियों को शिकायतों का निवारण तय समय से करना होगा। कोताही बरतने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी पर जुर्माना निर्धारित किया जाएगा। बिजली उपभोक्ता की शिकायत का समय पर समाधान न किए जाने की स्थिति में अधिकारी व कर्मचारी को आन रिकार्ड जवाब देकर बताना होगा कि देरी क्यों हुई है। शहरों में फ्यूज आफ कॉल के लिए चार घंटे की टाइम लाइन तय कर दी गई है तो ग्रामीण क्षेत्र में 16 घंटे फ्यूज आफ काल टाइम लाइन तय कर दी गई है। इससे अधिक समय होने पर संबंधति जेई व एसडीओ को इसका पूर्ण जवाब देना होगा।

बिजली निगम के अधिकारियों की मानें तो गत दिनों राज्य सरकार की बिजली वितरण निगम अधिकारियों के साथ विशेष बैठक हुई। बैठक में बिजली उपभोक्ताओं की समस्या को लेकर चर्चा की गई। इस पर सरकार ने बिजली वितरण निगम के लिए नई गाइडलाइन तय की हैं। इसमें बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर निपटारा करना मुख्य रूप से है। साथ ही बार-बार लगने वाले कट या लंबे कटों की भी समय अवधि तय की गई है। तय अवधि से अधिक कट लगने पर संबंधित एरिया इंचार्ज पर जुर्माना लगाने का प्रावधान तय किया गया है। नए नियमों को तय कर बिजली वितरण निगम अधिकारियों को भेजा गया है। इसके साथ ही अलग से जांच कमेटी बनाए जाने का भी निर्णय लिया गया है।

नई गाइड लाइन में ये तय किए नियम

-नेचुरल फ्यूज ऑफ कॉल : शहर में चार घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 16 घंटे

-लाइन ब्रेकडाउन : शहरी क्षेत्र में आठ घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 16 घंटे

-पोल टूटने पर ब्रेकडाउन : शहरी क्षेत्र में 24 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे

-अंडरग्राउंड केबल ब्रेकडाउन : शहरी क्षेत्र में 48 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में भी 48 घंटे

-डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर फेलियर : शहरी क्षेत्र में 24 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे

-मेजर पॉवर फेलियर : शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में सात दिन, मगर 24 घंटे में वैकल्पिक व्यवस्था कर बिजली आपूर्ति देनी होगी।

-पीरियड ऑफ शेड्यूल आउटेज या रिस्टोरशन सप्लाई : आठ घंटे किसी भी दिन या शाम छह बजे बाद

-वोल्टेम कम या ज्यादा : शहरी क्षेत्र में चार घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में आठ घंटे

-मीटर कंपलेंट धीमे अथवा तेज गति : रसीद प्राप्ति के सात दिनों के अंदर

-नए कनेक्शन बदलने के लिए : रसीद प्राप्ति के बाद 30 दिन

-ट्रांसफर ऑफ टाइटल एंड कंजरवेशन : सात दिन

-शिफ्टिंग ऑफ मीटर कनेक्शन : रसीद प्राप्ति के बाद 15 दिन

-ग्राहक के बिल संबंधित शिकायत : शहर में रसीद प्राप्ति के 24 घंटे में एवं ग्रामीण क्षेत्र में सात दिनों में

-रि-कनेक्शन : शहरी क्षेत्र में छह घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्र में 12 घंटे

राईट टू सर्विस एक्ट की करनी होगी पालना: एसई

बिजली निगम नारनौल सर्कल के एसई राजकुमार राजोरिया ने बताय कि सरकार की ओर से बिजली निगम में राईट टू सर्विस एक्ट सक्रिय रूप से लागू कर दिया गया है। अब बिजली की कोई भी समस्या होने पर उसकी सूचना मिलने उपरांत तय अवधि में उसे ठीक करना होगा। यदि कोई ऐसा नहीं करेगा तो उसे उसका कारण बताना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारी व कर्मचारी पर निर्धारित किया गया जुर्माना लगाया जाएगा।

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