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अब तो मानसून की बारिश से भी नहीं धुलता प्रदूषण का जहर

आपकी जानकारी के लिए हमने केवल जुलाई 2019 और 2021 का औसत निकाला है। 2019 में रोहतक का औसत एक्यूआई 110.53 था। जबकि 2021 में यह 117.63 हो गया। दो साल में सात अंकों की बढ़ोतरी होना किसी भी पर्यावरणविद के लिए चिंता की बात हो सकता है।

Mausam Ki Jankari:  मानसून
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मानसून : फाइल फोटो 

अमरजीत एस गिल : रोहतक

मानूसन की बारिश प्रदूषण का जहर धो डालती थी। लेकिन अब यह भी नहीं हो पा रहा है। बारिश होते हुए लगभग दो महीने बीत बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक एक बार भी रोहतक के लोगों को सांस लेने के स्वच्छ हवा नसीब नहीं हुई। बीते 55-60 दिन में से एक दिन भी ऐसा नहीं बीता जब आबोहवा में पीएम 2.5 की मात्रा 50 से कम रही हो। जबकि वर्ष 2019 में जुलाई और अगस्त में 13 दिन ऐसे थे, जब रोहतक का एक्यूआई 50 से कम दर्ज किया गया था। एक्यूआई 50 तक हो तो ही वह सांस लेने के लिए सही माना जाता है। इतना ही प्रदूषण के सूचकांक में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2019 और 2021 में अभी तक हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए हमने केवल जुलाई 2019 और 2021 का औसत निकाला है। 2019 में रोहतक का औसत एक्यूआई 110.53 था। जबकि 2021 में यह 117.63 हो गया। दो साल में सात अंकों की बढ़ोतरी होना किसी भी पर्यावरणविद के लिए चिंता की बात हो सकता है।

2020 में रोहतक की आबोहवा रही सबसे अच्छी : हमने वर्ष 2019 और 2021 का विश्लेषण इसलिए किया है। क्योंकि वर्ष 2020 के मानूसन में लाॅकडाउन-1 लगा था। जिसकी वजह से वाहन और कल-कारखाने नहीं चल रहे थे। हालांकि जुलाई आते वाहन चलने लगे थे और कुछ औद्योगिक इकाई भी उत्पादन शुरू करने लगी थी। बावजूद इसके लोगों को मानूसन में प्रदूषण नहीं गटकना पड़ा। वर्ष 2020 के मानसून में रोहतक की आबोहवा न केवल अच्छी थी। बल्कि बीते छह-सात दशक के रिकॉर्ड तोड़ रही थी। जुलाई 2020 में 15 दिन एक्यूआई 50 से नीचे रहा। इसी प्रकार अगस्त में 27 दिन लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिली। 12 जुलाई 2020 को तो एक्यूआई 27 दर्ज किया गया था। इस पहले 28 मार्च को यह लॉकडाउन की वजह से 26 तक पहुंच गया था। यह दिन शायद 60-70 साल में शायद सबसे कम प्रदूषित रहा हो।

ये है पैमाना : एक्यूआई अगर 0-50 के बीच है तो उसे अच्छा माना जाता है। 51-100 के बीच संतोषजनक, 101-200 के बीच सामान्य, 201-300 के बीच खराब, 301-400 के बीच बहुत खराब और 401-500 गंभीर माना जाता है। अगर एक्यूआई 500 से ऊपर है तो उसे गंभीर और आपातकालीन श्रेणी में माना जाता है।

वाहनों की भीड़ से हवा हो रही जहरीली : वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और प्रदूषण नियंत्रण पर जमीनी काम न होने की वजह से आबोहवा साल दर साल जहरीली होती जा रही है। मानव जीवन के लिए जल के साथ वायु का होना अति आवश्यक है। वायु रहित स्थान पर मानव जीवन की कल्पना बेमानी है। एक मनुष्य दिन भर में औसतन 20 हजार बार सांस लेता है। जाहिर सी बात है जीवन देने वाली यह वायु शुद्ध नहीं होगी तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगी। पुराने समय में मानव के समक्ष वायु प्रदूषण जैसी समस्या सामने नहीं आई,क्योंकि प्रदूषण का दायरा सीमित था, साथ ही प्रकृति भी पर्यावरण को संतुलित रखने का लगातार प्रयास करती रही। उस समय प्रदूषण कम होने के कारण प्रकृति ही इसे संतुलित कर देती थी। मगर आज स्थितियां एक दम प्रतिकूल हैं। हम अपने लाभ के लिये बिना सोचे-समझे प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर रहे हैं। वायुमंडल में नाइट्रोजन, आक्सीजन, कार्बन डाई आक्साइड,कार्बन मोनो आक्साइड आदि गैस एक निश्चित अनुपात में मौजूद रहती हैं। इसे अशुद्ध करने वाले प्रदूषण कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, हाइड्रोकार्बन, धूल मिट्टी के कण है।

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