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अब स्विमिंग पूल बना रहे आंदोलनकारी किसान

टीकरी बॉर्डर से लेकर बहादुरगढ़ के बाईपास पर चार महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे किसान कहते हैं कि खेती के मायने अब सिर्फ शारीरिक श्रम से नहीं, बल्कि यह पेशा तकनीक और दिमाग की जुगलबंदी का है। मिट्टी में रचे-बसे किसान इस सूत्र को समझ, परख और अपना भी रहे हैं।

अब स्विमिंग पूल बना रहे आंदोलनकारी किसान
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बहादुरगढ़ : बाईपास पर बनाई मचान के नीचे बनाया जा रहा स्वीमिंग पूल व गांव घोलिया के किसानों द्वारा विकसित किसान हवेली।

रवींद्र राठी : बहादुरगढ़

पारंपरिक किसान के मिथक को तोड़ते हुए आंदोलनकारी किसान टीकरी बॉर्डर पर नित नए प्रयोग कर रहे हैं। फल-फूल और सब्जियों की खेती के अलावा यहां उजाड़ ग्रीन बेल्ट में अनेक सुंदर नेचर पार्क बना चुके हैं। मोगा जिले के किसानों ने नए बस अड्डे के निकट गंदगी को हटाकर दो महीने पहले हरी-भरी किसान हवेली बनाकर मिसाल पेश की थी। अब भीषण गर्मी को देखते हुए इन किसानों द्वारा स्वीमिंग पूल का निर्माण करवाया जा रहा है। इसके ऊपर मचान नुमा ढांचा तैयार भी कर दिया गया है।

टीकरी बॉर्डर से लेकर बहादुरगढ़ के बाईपास पर चार महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे किसान कहते हैं कि खेती के मायने अब सिर्फ शारीरिक श्रम से नहीं, बल्कि यह पेशा तकनीक और दिमाग की जुगलबंदी का है। मिट्टी में रचे-बसे किसान इस सूत्र को समझ, परख और अपना भी रहे हैं। प्रकृति से बेहद लगाव रखने वाले पंजाब के मोगा जिले के गांव घोलिया के सरपंच गुरसेवक बिट्टू अपने साथियों के साथ 30 नवंबर को बहादुरगढ़ के बाईपास पर पहुंचे थे। एक दिसंबर से ही इनके द्वारा यहां लंगर सेवा चलाई जा रही है। इन्होंने बाईपास की ग्रीन बेल्ट में फैली गंदगी को साफ कर किसान हवेली बना दी। यहां बड़े-छोटे टैंट लगाए। पार्क विकसित किया गया, गमले व पौधे लगाए गए। टॉयलेट के साथ ही सेप्टिक टैंक के अलावा बाथरूम भी बनाए गए। यहां पानी से लेकर दूध का टैंकर भी मौजूद हैं।

किसान हवेली को देखकर दर्जनों स्थानों पर इस तरह के प्रयोग अन्य किसानों ने भी किए। यहां से गुजरने वाले लोग भी इन किसानों के इस प्रयास की सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाते। अब गर्मी के मौसम को देखते हुए किसान हवेली के साथ में ही स्वीमिंग पूल का निर्माण करवाया जा रहा है। इसके ऊपर एक मचान नुमा ढांचा तैयार हो चुका है। स्वीमिंग पूल बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है। इसमें बोरिंग से पानी भरा जाएगा। आंदोलनकारी किसानों का प्रयास लोगों को ग्राम्य जीवन के नजदीक लाना और खेती की प्रत्येक शैली को समझाना है। लोग इसके प्रति आकर्षित होते हैं और इसे महसूस करने यहां आते हैं।

घोलिया के सरपंच गुरसेवक बिट्टू के अनुसार किसान सदैव प्रकृति के साथ रहता है। मिट्टी, पेड़-पौधे और पानी के साथ ही किसान की सारी उम्र बीतती है। कृषि कानूनों के विरोध में वे यहां 30 नवंबर को आए थे, अगले दिन से यहां लंगर चला रहे हैं। सामने गंदगी थी, जिसकी सफाई कर हरी-भरी हवेली बना दी। अब गर्मी को देखते हुए स्वीमिंग पूल बनाया जा रहा है। सरकार को साफ संदेश है कि किसान पीछे नही हटेंगे, यहीं रहेंगे, लड़ाई लड़ेंगे और जीत के जाएंगे।

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