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बेसहारा गोवंश की चपेट में आकर जान गंवाने वालों का नहीं कोई रिकॉर्ड

एक आरटीआई के जवाब से यह खुलासा हुआ है। बहादुरगढ़ शहर में बड़ी तादाद में बेसहारा गोवंश हैं। सड़कों पर गोवंश की मौजूदगी के चलते कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा शहर की सफाई पर काफी रुपया खर्च किया जाता है, लेकिन जगह-जगह गंदगी देखने को मिल जाती है।

बेसहारा गोवंश की चपेट में आकर जान गंवाने वालों का नहीं कोई रिकॉर्ड
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बहादुरगढ़ : सतपाल हाडा

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

शहर में बेसहारा गोवंशों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन मृतकों का कोई रिकार्ड नहीं है। एक आरटीआई के जवाब से यह खुलासा हुआ है। इसके अलावा सामने आया कि 24 सितंबर 2019 से लेकर 23 सितंबर 2020 तक शहर की सफाई व सौंदर्यकरण पर 15 करोड़ 90 लाख 58 हजार 351 रुपये खर्च किए गए हैं।

दरअसल, बहादुरगढ़ शहर में बड़ी तादाद में बेसहारा गोवंश हैं। सड़कों पर गोवंश की मौजूदगी के चलते कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा शहर की सफाई पर काफी रुपया खर्च किया जाता है, लेकिन जगह-जगह गंदगी देखने को मिल जाती है। इन दो जरूरी सहित अन्य विषयों के बारे में शहर के निवासी सतपाल हाडा ने नगर परिषद में 24 सितंबर 2020 को आरटीआई लगाई थी। लेकिन काफी समय के बाद भी कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील दायर कर दी।

बकौल सतपाल हाडा, उन्होंने 3 मार्च को अपील दायर की थी। जिसके बाद अपीलीय अधिकारी ने नप के सूचना अधिकारी को 19 मार्च तक सारी सूचनाएं उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। उन्होंने कुल छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जिनमें से एक अहम विषय ये था कि 24 सितंबर 2019 से 23 सितंबर 2020 तक बेेसहारा गोवंशों के कारण कितने लोगों की जान गई। इसका उत्तर मिला कि कोई रिकार्ड नहीं है। दूसरा विषय सफाई को लेकर था। सामने आया कि 24 सितंबर 2019 से लेकर 23 सितंबर 2020 तक शहर की सफाई व सौंदर्यकरण पर 15 करोड़ 90 लाख 58 हजार 351 रुपये खर्च किए गए हैं। हैरानी की बात है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर मंे कहीं-कहीं गंदगी के ढेर देखें जा सकते हैं।

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